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यूपी: बेहट सीट 2027 के चुनावों के लिए खास क्यों, किसका पलड़ा भारी?

यूपी: बेहट सीट 2027 के चुनावों के लिए खास क्यों, किसका पलड़ा भारी? Behat Assembly Seat: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बेहट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उमर अली खान चुनाव 1,34,513 वोटों से जीते थे. तब सपा राष्ट्रीय…

ABP News के अनुसार6 अगस्त 2026 को 09:18 am बजे
यूपी: बेहट सीट 2027 के चुनावों के लिए खास क्यों, किसका पलड़ा भारी?

सौजन्य से:- ABP News

यूपी: बेहट सीट 2027 के चुनावों के लिए खास क्यों, किसका पलड़ा भारी?

Behat Assembly Seat: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बेहट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उमर अली खान चुनाव 1,34,513 वोटों से जीते थे. तब सपा राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ गठबंधन में थी.

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. भारतीय राजनीति में एक कहावत है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है. यही कारण है कि हर पार्टी यहां अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराना चाहती है. यूपी के 403 विधानसभा सीटों की बात करें तो इसकी हर एक सीट की सामाजिक बनावट, आबादी के आंकड़े और भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है.

ऐसे में यहां हर एक सीट पर जीत को तय करने में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय मुद्दे और विकास की मांगों की भूमिका बड़ी बन जाती है. आज इस रिपोर्ट में हम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की बेहट विधानसभा सीट की बात करेंगे, जो पश्चिमी यूपी की सबसे चर्चित सीटों में से एक मानी जाती है.

बेहट विधानसभा सीट का चुनावी विशलेषण

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में 7 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 5 विधानसभा सीटों को मिलाकर सहारनपुर लोकसभा सीट बनती है. उत्तर प्रदेश की विधानसभा संख्या में पहली सीट बेहट विधानसभा की आती है. बेहट विधानसभा सहारनपुर जिले में हैं और सहारनपुर लोकसभा सीट का भी हिस्सा है.साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बेहट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उमर अली खान चुनाव 1,34,513 वोटों से जीते थे. तब सपा राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ गठबंधन में थी.

बीजेपी के नरेश सैनी इस सीट से चुनाव हार गए थे और उन्हें केवल 96,633 वोट ही मिले थे. रईस मलिक इस सीट से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार थे और उन्हें केवल 45,075 वोट मिले थे और पूनम कांबोज कांग्रेस की उम्मीदवार थीं, जिन्हें केवल 1,632 वोट मिले थे.

SIR से बदली बेहट सीट पर मतदाताओं की संख्या

वर्तमान की बात करें तो अब समीकरण बदल चुके हैं. RLD सपा का साथ छोड़ बीजेपी से हाथ मिला चुकी है. वहीं, 2026 में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से इस सीट पर मतदाताओं की संख्या बदल चुकी है. SIR से पहले साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बेहट सीट पर मतदाताओं की संख्या 3,74,730 थी, लेकिन SIR के बाद यह संख्या 3,47,520 हो गई है. इसका मतलब है कि इस सीट से 27 हजार 210 मतदाता कम हुए हैं.

सपा का है दबदबा

साल 2022 में सपा ने बेहट विधानसभा सीट को 37,880 वोटों के अंतर से जीता था. वहीं, साल 2024 के लोकसभा चुनावों में सहारनपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली बेहट विधानसभा सीट में सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार इमरान मसूद को सबसे अधिक 1,33,394 वोट मिले थे. बीजेपी और RLD गठबंधन के उम्मीदवार राघव लखन पाल शर्मा को 95,165 वोट, जबकि बसपा के उम्मीदवार माजी दली को 36045 वोट मिले थे.

आंकड़ों को देखें तो 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन के जीत का अंतर 2022 के विधानसभा चुनावों में हुई जीत के नंबर से अधिक है. सपा ने साल 2022 में 37,880 वोटों के अंतर से आगे थी, जबकि साल 2024 में इस सीट पर जीत का अंतर 38,229 रहा. साफ है कि इस सीट पर हुए पिछले कुछ चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं रहे.

बेहट सीट का जातीय समीकरण

बेहट विधानसभा सीट के जातीय समीकरणों को देखें तो यहां की स्थिति और साफ हो जाएगी. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, मुस्लिम लगभग 1,30,000 हजार की संख्या में हैं, अनुसूचित जाति (SC) की संख्या 45,000, सैनी मतदाताओं की संख्या करीब 40,000, कश्यप जाति 45,000 के आसपास है. इसके अलावा क्षेत्रीय मतदाताओं की संख्या 20,000 है, जबकि गुर्जर 12,000और पाल धोबी, खटिक बंजारा मिलाकर 30,000 के आसपास मतदाताओं की संख्या बैठती है.

मुस्लिम बहुल सीट, लेकिन हिंदुओं की आबादी अधिक

इस सीट पर ब्राह्मण लगभग 8000 की संख्या में है, जाट 3000 है और अन्य मतदाता लगभग 14,000 की संख्या में है. बेहट एक मुस्लिम बहुल सीट है, लेकिन इस सीट पर हिंदुओं की कुल आबादी मुस्लिमो से अधिक है. इस सीट पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) निर्णायक भूमिका में हैं. हालांकि, पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों का वोट यहां अच्छी खासी संख्या में है.

SIR के बाद बेहट सीट पर 27,210 मतदाता कम हुए हैं. बेहट सीट पर बीजेपी आम तौर पर सैनी समाज के ही प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतरती रही है, लेकिन इस बार 2027 के चुनाव में कौन सी पार्टी किस उम्मीदवार को मैदान में उतारती है वो भी सीट से हार-जीत तय करने में भूमिका निभाएगी.

किसका पलड़ा भारी?

उत्तर प्रदेश के दोनों प्रमुख दल चाहे वो बीजेपी हो या सपा यूपी का चुनाव जाति के सहारे ही लड़ते दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी RLD के साथ गठबंधन में है, तो उसे जाट वोटों का फायदा हो सकता है. वहीं, सपा अपने पीडीए के सहारे अति पिछड़े और पिछड़े और एससी वोट को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, 2027 के चुनावों के बाद ही साफ सकेगा की किस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा. ये देखना दिलचस्प होगा कि इस सीट पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी में से कौन बाजी मारता है.

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