उत्तर प्रदेश चुनाव 2027ः 20 सितंबर से चुनावी सभाएं, अखिलेश यादव को चुनौती देंगे असदुद्दीन ओवैसी
उत्तर प्रदेश चुनाव 2027ः 20 सितंबर से चुनावी सभाएं, अखिलेश यादव को चुनौती देंगे असदुद्दीन ओवैसी By राजेंद्र कुमार | Updated: September 8, 2026 17:44 IST2026-09-08T17:43:03+5:302026-09-08T17:44:05+5:30 Uttar Pradesh Elect…

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi
उत्तर प्रदेश चुनाव 2027ः 20 सितंबर से चुनावी सभाएं, अखिलेश यादव को चुनौती देंगे असदुद्दीन ओवैसी
By राजेंद्र कुमार | Updated: September 8, 2026 17:44 IST2026-09-08T17:43:03+5:302026-09-08T17:44:05+5:30
Uttar Pradesh Elections 2027: सपा मुखिया अखिलेश यादव यूपी में एआईएमआईएम के साथ चुनावी तालमेल करने के पक्ष में नहीं है.
लखनऊः करीब तीन महीने उत्तर प्रदेश की सियासत से दूर रहने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी 20 सितंबर से प्रदेश में लगातार चुनावी दौरे और जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे. असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर, श्रावस्ती, अजमगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर में चुनावी सभाओं को संबोधित करने के कार्यक्रमों को अपनी सहमति दे दी है.प्रवक्ता शादाब चौहान के अनुसार उक्त जिलों में होने वाली इस चुनावी सभाओं के जरिए असदुद्दीन ओवैसी लोगों से संवाद करेंगे और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे.
शादाब चौहान का दावा है कि यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम के उम्मीदवार मुस्लिम समाज के वोटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के एकाधिकार को तोड़कर बड़ी संख्या में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचेंगे. कहा जा सकता है कि एआईएमआईएम यूपी में सपा को चुनौती देने के लिए तैयारी करने में जुट गई है और इसके चलाए असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी पर ध्यान देना शुरू किया है.
इन जिलों में ओवैसी की होंगी सभाएं
एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब चौहान का यह दावा अकारण नहीं है. बीती 15 जून को एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के बहराइच जिले के मटेरा क्षेत्र में एक बड़ी रैली कर मुस्लिम मतदातों से पार्टी का साथ देने की अपील की थी. इस रैली में उन्होने यह ऐलान किया था कि एआईएमआईएम यूपी की कई सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर अपनी ताकत का अहसास करेगी.
कहा जा रहा है कि ओवैसी ने इस रैली के जरिए इंडिया गठबंधन के साथ चुनावी तालमेल करने का संकेत दिया था, लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव यूपी में एआईएमआईएम के साथ चुनावी तालमेल करने के पक्ष में नहीं है. जिसके चलते ही बीते माह अखिलेश यादव ने ओवैसी के नजदीकी अब्दुल मन्नान को सपा में शामिल कर अपना जवाब दे दिया.
इसके बाद कांग्रेस ने भी एआईएमआईएम के प्रवक्ता को पार्टी में शामिल कर लिया. जाहिर है कि सपा और कांग्रेस के इस सियासी जवाब का मतलब समझते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भी सपा और कांग्रेस को अपनी ताकत का एहसास करने का फैसला किया. राजनीति में अपना ताकत का अहसान चुनावी रैली में भीड़ जुटाकर किया जाता है.
इसलिए असदुद्दीन ओवैसी ने भी 20 सितंबर को कानपुर, 27 सितंबर को श्रावस्ती, 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में बड़ी चुनावी सभा करने का फैसला किया. इन तीनों जिलों के बाद ओवैसी अक्टूबर और नवंबर की मेरठ तथा मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभाओं को संबोधित करने पहुंचेगे.
शादाब का कहना है कि इन सभाओं में भी ओवैसी साहब यूपी में किन-किन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी उतारेगी, इसका ऐलान किया जाएगा. प्रत्याशियों के नामों की भी घोषणा की जाएगी. शादाब का कहना है कि असदुद्दीन ओवैसी का उद्देश्य यूपी में भाजपा को हराना और सेक्युलर वोटों के बंटवारे को रोकना है. इसके लिए जो सेक्युलर दल एआईएमआईएम का साथ चाहेंगे हम उनसे हाथ मिलाने की सोच सकते हैं.
एआईएमआईएम हर हाल में चुनाव लड़ेगी
एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब के अनुसार, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने ने 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली. उसका वोट शेयर सिर्फ 0.24 प्रतिशत रहा. इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन नतीजा फिर वही पुराना वाला ही रहा.
पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट शेयर 0.49 प्रतिशत पर पहुंचा. इस नाते सपा और कांग्रेस एआईएमआईएम से दूरी बना रहे हैं, जबकि यूपी में ओवैसी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं. यूपी में ओवैसी की हर सभा में बिना किसी प्रचार के 50 हजार से अधिक लोग पहुँच रहे हैं.
ऐसे में यूपी की मुस्लिम बाहुल्य 143 सीटों पर एआईएमआईएम के उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए अगर खड़े हुए तो उन्हे बड़ी संख्या में वोट मिलेंगे, भले ही वह चुनाव न जीते. इसलिए पार्टी की मंशा है कि यूपी में सपा और कांग्रेस के गठबंधन में एआईएमआईएम को भी जगह मिले और पार्टी एक 12-13 सीटों पर चुनाव लड़े. पार्टी की यह मंशा अगर पूरी नहीं हुई हुई तो बीते विधानसभा चुनावों की तरह ही पार्टी इस बार भी चुनाव लड़ेगी. यानी एआईएमआईएम हर हाल में चुनाव लड़ेगी.
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

लखनऊ: पूर्व मुख्य सचिव भोलानाथ तिवारी का निधन, 85 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस - former up chief secretary bhola nath tiwari passes away at 85

2027 चुनाव से पहले पीएम मोदी और सीएम योगी कानपुर को देंगे बड़ा तोहफा!, जानिए आपको क्या होगा फायदा?

यूपी: प्रदेश में पहली बार तेंदुओं की तादात रोकने की कोशिश, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए एक बड़ी पहल


