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बच्चों की वैज्ञानिक सोच को मिलेगी नई उड़ान: भारतीय वैज्ञानिक विरासत से जोड़ेगी योगी सरकार; ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन-2026’ में कक्षा 6 से 11 तक के छात्र ले सकेंगे हिस्सा

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bhaskar.com के अनुसार11 अगस्त 2026 को 10:18 pm बजे
बच्चों की वैज्ञानिक सोच को मिलेगी नई उड़ान:  भारतीय वैज्ञानिक विरासत से जोड़ेगी योगी सरकार; ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन-2026’ में कक्षा 6 से 11 तक के छात्र ले सकेंगे हिस्सा

सौजन्य से:- bhaskar.com

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बच्चों की वैज्ञानिक सोच को मिलेगी नई उड़ान:भारतीय वैज्ञानिक विरासत से जोड़ेगी योगी सरकार; ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन-2026’ में कक्षा 6 से 11 तक के छात्र ले सकेंगे हिस्सा

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उत्तर प्रदेश के स्कूली बच्चों को विज्ञान, रिसर्च और इनोवेशन से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन-2026’ अभियान को गति दी है। कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के जरिए वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ भारतीय वैज्ञानिक विरासत और आधुनिक उपलब्धियों से परिचित कराया जाएगा। प्रदेश सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। प्रतियोगिता में स्कूल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में विज्ञान प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी।

30 सितंबर तक कर सकेंगे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM)-2026-27’ में कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थी 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। प्रतियोगिता के लिए प्रति विद्यार्थी 200 रुपए पंजीकरण शुल्क तय किया गया है। वीवीएम पोर्टल पर प्रतियोगिता से जुड़े नियम, दिशा-निर्देश, अध्ययन सामग्री और दूसरी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूलों को पात्र विद्यार्थियों का अधिकतम पंजीकरण कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

विज्ञान के साथ भारतीय वैज्ञानिक विरासत की जानकारी

प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी विज्ञान तक सीमित रखना नहीं है। इसके जरिए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक नजरिया, तार्किक सोच, रिसर्च और नई चीजें बनाने की रुचि विकसित की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें भारत की प्राचीन और आधुनिक वैज्ञानिक परंपरा, वैज्ञानिकों के योगदान और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी।

तीन चरणों में होगी प्रतिभाओं की पहचान

विद्यार्थी विज्ञान मंथन का आयोजन तीन स्तरों पर किया जाएगा। पहले स्कूल स्तर पर प्रतियोगिता होगी। इसके बाद चयनित विद्यार्थी राज्य स्तर और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। इससे अलग-अलग स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता भारत के अलावा छह मध्य-पूर्वी देशों में भी आयोजित की जाती है।

स्कूलों में चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षकों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को अधिकतम पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। माध्यमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी जाएगी। खास तौर पर छात्राओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

आर्थिक वजह से कोई बच्चा न छूटे, इसलिए फीस में भी सहूलियत

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि आर्थिक कारणों से इच्छुक विद्यार्थी प्रतियोगिता से वंचित न रहें। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं की स्टाइपेंड राशि और माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का इस्तेमाल पंजीकरण शुल्क के भुगतान के लिए किया जा सकता है। इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

नई शिक्षा नीति के लक्ष्य से भी जुड़ी पहल

‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भी देखा जा रहा है। इसके जरिए बच्चों में अनुभव से सीखने, सवाल पूछने, प्रयोग करने और नई चीजें खोजने की आदत विकसित करने पर जोर है। सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि विज्ञान और तकनीक को समझकर भविष्य में रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ें।

‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, वैज्ञानिक सोच विकसित करने का अभियान

योगी सरकार का लक्ष्य हर बच्चे में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना विकसित करना है। ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ बच्चों को भारतीय वैज्ञानिक विरासत, विज्ञान और रिसर्च की संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। हमारा प्रयास है कि उत्तर प्रदेश का हर प्रतिभाशाली विद्यार्थी इस मंच का लाभ उठाए और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।

- संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

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