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2022 में मिली हार से कांग्रेस ने लिया सबक, यूपी चुनाव में अब 'पैसे वालों' पर लगाएगी दांव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान जारी है. इस बीच कांग्रेस आर्थिक रूप से…

AajTak के अनुसार2 सितंबर 2026 को 01:31 am बजे
2022 में मिली हार से कांग्रेस ने लिया सबक, यूपी चुनाव में अब 'पैसे वालों' पर लगाएगी दांव

सौजन्य से:- AajTak

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान जारी है. इस बीच कांग्रेस आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों को तरजीह देने की योजना बना रही है. इसका मकसद चुनाव अभियान में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना है.

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को बेहद गंभीरता से लड़ने का इरादा रखती है. इसलिए, जनता के बीच मजबूत पकड़ और अपनी व्यवस्था खुद करने के काबिल उम्मीदवारों को तरजीह दी जाएगी.

हालांकि, जहां जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले साधारण पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं के जीतने की संभावना ज्यादा होगी, वहां रियायत दी जाएगी. इसके अलावा, पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों से पार्टी फंड में योगदान की भी उम्मीद की जा रही है.

2022 के अनुभवों से लिया सबक

कांग्रेस का ये नया रुख 2022 के विधानसभा चुनाव के अनुभवों का नताजी है. रिपोर्टों के मुताबिक, उस वक्त पार्टी ने कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए 70 लाख रुपये तक की मदद दी थी. लेकिन चुनाव के बाद शिकायतें आईं कि फंड पाने के बावजूद कई प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में सही तरीके से खर्च नहीं किया और पैसे खुद के पास बचा लिए.

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399 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी.

50-50 प्रतिशत सीट बंटवारे पर जोर

2024 के लोकसभा चुनावों में छह सीटों पर मिली जीत और उत्तर भारत में राहुल गांधी की बढ़ती पॉपुलैरिटी के आधार पर कांग्रेस सपा पर 50-50 के अनुपात में सीटें बांटने का दबाव बना रही है. सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बताया कि सीटों पर समझौता करके सिर्फ अखिलेश यादव की सरकार बनाने के लिए कांग्रेस खुद को कमजोर नहीं करेगी.

वहीं, यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी 403 में से 50 फीसदी सीटों की मांग कर रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वो किसी भी हाल में 115 से 120 सीटों से कम पर राजी नहीं होंगे. दूसरी तरफ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का रुख यह है कि गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन आधार 'सीटें नहीं, जीत' का फॉर्मूला होगा.

यह भी पढ़ें: यूपी चुनाव से पहले किलेबंदी... लखनऊ में आज सपा-बीजेपी-बसपा तीनों की बड़ी बैठक, जानिए प्लान

दलित, अल्पसंख्यक और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं के समर्थन के दम पर कांग्रेस राज्य में 'बलिया से मेरठ' तक यात्रा और सामाजिक न्याय अभियान के जरिए 2026 में अपनी राजनीतिक वापसी को मजबूत करने में जुटी है.

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