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2017 के फॉर्मूले पर 2027 का यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी में सपा-कांग्रेस, सीट बंटवारे पर बनी सहमति - sp congress alliance for 2027 up elections 2017 formula likely

2017 के फॉर्मूले पर 2027 का यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी में सपा-कांग्रेस, सीट बंटवारे पर बनी सहमति कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 2017 के फार्मूले पर गठबंधन कर सकती हैं। सीटों ...और पढ…

Jagran के अनुसार6 सितंबर 2026 को 02:30 pm बजे
2017 के फॉर्मूले पर 2027 का यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी में सपा-कांग्रेस, सीट बंटवारे पर बनी सहमति
 - sp congress alliance for 2027 up elections 2017 formula likely

सौजन्य से:- Jagran

2017 के फॉर्मूले पर 2027 का यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी में सपा-कांग्रेस, सीट बंटवारे पर बनी सहमति

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 2017 के फार्मूले पर गठबंधन कर सकती हैं। सीटों ...और पढ़ें

HighLights

- सपा-कांग्रेस 2027 यूपी चुनाव में 2017 फॉर्मूला अपनाएंगे।

- कांग्रेस को 105-115 सीटें मिलने की उम्मीद है।

- राहुल गांधी की स्वीकार्यता से गठबंधन को बल मिला।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अगले साल होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपनी सांगठनिक तैयारी लगभग पूरी कर चुकी है। अब समाजवादी पार्टी के सीटों के बंटवारे पर बातचीत शुरू होनी है।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि चर्चा मुख्यत: इस बिंदु पर होनी है कि किन-किन सीटों पर किस दल का प्रत्याशी होगा, क्योंकि गठबंधन में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बन जाने के संकेत है।

इन संकेताें के अनुसार 2017 के फार्मूले पर ही यह गठबंधन होगा।

कांग्रेस के हिस्से में 105 से 115 सीटें आ सकती हैं। इनमें से यदि कुछ सीटों पर कांग्रेस की तुलना में सपा के प्रत्याशी हर तरह के समीकरण में मजबूत दिखेंगे तो वह कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़ सकते हैं। संगठन सृजन अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में जिलाध्यक्षों के नए सिरे से चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों सहित प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और नेता विधानमंडल दल की बैठक राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हो चुकी है।

सूत्रों ने बताया कि इसके बाद प्रदेश के नेताओं की भेंट पार्टी की वरिष्ठतम नेता सोनिया गांधी के साथ हुई। इस दौरान सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी औपचारिक चर्चा हुई।

इसमें स्पष्ट संदेश दे दिया गया कि सपा के साथ बेहतर तालमेल करते हुए यह चुनाव लड़ना है। उधर, सपा मुखिया अखिलेश यादव का भी कार्यकर्ताओं को संदेश है कि कांग्रेस के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा जाएगा। ऐसे में सीटों की संख्या का कोई पेंच फंसने की आशंका अब कम है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस की ओर से अपने स्तर से सर्वे कर ऐसी 150 सीटें चिन्हित की हैं, जहां कांग्रेस अच्छा चुनाव लड़ सकती है और उसके पास अच्छे उम्मीदवार भी हैं।

प्रदेश के नेता भी अधिक से अधिक सीटों पर जोर देते रहे हैं, लेकिन दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच 2017 का फार्मूला सामने है। तब कांग्रेस 114 सीटों पर लड़ी थी, जिसमें से 105 पर उसके प्रत्याशी थे और नौ सीटें ऐसी थीं, जहां कांग्रेस के सिंबल पर सपा के प्रत्याशी मैदान में थे और इस दफा भी कमोबेश यही स्थिति दोहरायी जा सकती है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सपा के स्थानीय नेताओं ने भले ही अब तक कांग्रेस को 40-50 सीटें दिए जाने का दावा किया हो, लेकिन अब सपा के बड़े नेता भी इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जनता के मुद्दों को उठाया है, उससे उनकी स्वीकार्यता विभिन्न वर्गों में बढ़ी है।

दोनों दलों के समर्पित मतदाताओं के अलावा विकल्प तलाश रहे भाजपा विरोधी मतदाताओं के बीच विशेष तौर पर राहुल ने प्रभाव बढ़ाया है। इसके अलावा बिहार में महागठबंधन के बीच रही खींचतान के परिणाम से भी सपा और कांग्रेस ने सबक लेते हुए बेहतर तालमेल पर ही ध्यान केंद्रित कर दिया है।

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