स्मृति ईरानी को 2 साल बाद बड़ी जिम्मेदारी, उत्तर प्रदेश की कमान के क्या मायने? राहुल गांधी को हरा चुकीं
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय सचिव बनाकर बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की कमान भी सौंप दी है। पिछले (2019) लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी को हराने वाली स्मृति के सामने अगले साल (2027) होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव की भी चुनौ…

सौजन्य से:- Navbharat Times
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय सचिव बनाकर बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की कमान भी सौंप दी है। पिछले (2019) लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी को हराने वाली स्मृति के सामने अगले साल (2027) होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव की भी चुनौती है।
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई कार्यकारिणी का ऐलान हो गया है। ये टीम पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में काम करने वाली है। खास बात यह है कि इस टीम में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा भारी-भरकम मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल चुकीं स्मृति ईरानी को भी शामिल किया गया है। उन्हें यूपी की कमान भी सौंपी गई है। देश में सबसे ज्यादा विधानसभा सीट (403) वाले उत्तर प्रदेश में अगले साल (2027) विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में स्मृति ईरानी के सामने यूपी में जीत बरकरार रखने की बड़ी चुनौती भी होगी।
अमेठी की हार के बाद पहली बड़ी जिम्मेदारी
स्मृति ईरानी को बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव बनाते हुए यूपी की कमान मिलना बेहद अहम माना जा रहा है। स्मृति के लिए ये इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2 साल पहले साल 2024 में अमेठी लोकसभा चुनाव हारने के बाद से उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। बता दें कि स्मृति साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी से लोकसभा चुनाव हराकर इतिहास रच चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश की कमान मिलने के मायने
यूपी की कमान मिलने के बाद स्मृति के सामने उत्तर प्रदेश की जीत को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी। यूपी में समाजवादी पार्टी लगातार अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे बड़े मुद्दे उठा रही है। ऐसे में स्मृति के सामने इस मुद्दे रूपी चक्रव्यूह को तोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। यूपी लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी बेहद अहम है। यूपी में विधानसभा के साथ-साथ पूरे देश में लोकसभा की भी सबसे ज्यादा सीटें (80) हैं। यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावी नतीजों का बड़ा असर साल 2029 के लोकसभा चुनावी पर भी पड़ सकता है। इसलिए भी स्मृति के सामने चुनौती और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
कांग्रेस परिवार के गढ़ में लगा चुकीं सेंध
हालांकि, स्मृति अमेठी सीट पर राहुल गांधी को 2019 में हराकर पहले ही खुद की साबित कर चुकी हैं। दरअसल, यूपी के अमेठी को शुरू से ही कांग्रेस परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। साल 1967 में अमेठी को लोकसभा सीट का दर्जा मिला। इसके बाद से ही ये सीट गांधी परिवार का गढ़ बन गई। अस्तित्व में आने के बाद से ही पूरे 31 साल तक यहां कांग्रेस काबिज रही। हालांकि, साल 1998 में सोनिया गांधी के करीबी सतीश शर्मा को बीजेपी के संजय सिंह से हार का सामना करना पड़ा।
3 बार लगातार जीते राहुल, स्मृति ने हाराया
साल 1999 में सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा और संजय सिंह को पूरे 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराया। इसके साथ ही ये सीट दोबारा कांग्रेस के खाते में आ गई। फिर साल 2004 में सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल के लिए रास्ता बनाया और खुद रायबरेली से चुनाव लड़ा। राहुल अमेठी से 2004 फिर 2009 और इसके बाद साल 2014 में 3 बार लगातार सांसद रहे। लेकिन साल 2019 में बीजेपी की टिकट पर स्मृति ईरानी ने चुनाव लड़कर पूरी बाजी पलट दी और राहुल को हार का सामना करना पड़ा।
लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।
करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।
पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।
अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

मुस्कान को अरेस्ट करने वाली महिला दरोगा सस्पेंड: वीडियो बनाकर शेयर करती क्यूआर कोड, मेरठ के SSP ऑफिस में तैनात थी - Meerut News

दून में सात किलो गांजे के साथ यूपी के दो नशा तस्कर गिरफ्तार

कांकेर में अपहरण कर नाबालिग से दुष्कर्म: आरोपी मिंटू मंडल उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया - Kanker News


