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यूपी में आलू की बंपर पैदावार, मगर खेती घाटे का सौदा! क्या सरकार की ये 2 योजनाएं किसानों के लिए मददगार?

यूपी में आलू की बंपर पैदावार, मगर खेती घाटे का सौदा! क्या सरकार की ये 2 योजनाएं किसानों के लिए मददगार? आलू किसानों की दशा और सरकारी लाभ मिलने में अड़चनों पर संवाददाता श्यामवीर की खास रिपोर्ट.... By ETV Bharat Uttar Prade…

etvbharat.com के अनुसार11 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
यूपी में आलू की बंपर पैदावार, मगर खेती घाटे का सौदा! क्या सरकार की ये 2 योजनाएं किसानों के लिए मददगार?

सौजन्य से:- etvbharat.com

यूपी में आलू की बंपर पैदावार, मगर खेती घाटे का सौदा! क्या सरकार की ये 2 योजनाएं किसानों के लिए मददगार?

आलू किसानों की दशा और सरकारी लाभ मिलने में अड़चनों पर संवाददाता श्यामवीर की खास रिपोर्ट....

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 11, 2026 at 7:44 PM IST

आगरा: इस साल यूपी में आलू की फसल बहुत अच्छी हुई है. इससे किसानों के चेहरे पर खुशी तो है, लेकिन दाम सही न मिलने से मायूसी भी है. आलू की सही कीमतें न मिलने से कोल्ड स्टोरेज से निकासी बेहद धीमी है. हालांकि यूपी सरकार ने किसानों की आर्थिक मदद के लिए अनुदान और भामाशाह भाव स्थिरता योजना शुरू की है. मगर, इस योजना में पट्टे या बटाई पर आलू की खेती करने वाले किसान शामिल नहीं हैं. जो प्रदेश में हजारों की संख्या में हैं.

ईटीवी भारत की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए सरकार की दोनों योजनाओं के बारे में. साथ ही बॉयर्स सेलर मीट पर भी नजर, जो कि 12 सितंबर को आयोजित होगी. इसके साथ ही उद्यान विभाग ने इस साल आलू के बीज वितरण को लेकर नई व्यवस्था तय की है. जिसके लिए किसानों को आलू बीज अनुदान पर मिलेगा. इसके लिए विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा.

लागत निकालना भी मुश्किल, क्या करें किसान

आलू के रिकॉर्डतोड़ उत्पादन से किसानों के चेहरे खिल गए. मगर, बीते कई माह से खाड़ी देशों में सतत असामान्य स्थिति बनी हुई है. जिससे परिवहन में व्यय-वृद्धि हुई है. जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश से अन्य राज्य और देश के बाहर आलू का विपणन अपेक्षाकृत बेहद कम रहा है. यही कारण है कि यूपी में आलू का बाजार भाव गिरा है. जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है. ऐसे में योगी सरकार ने कृषकों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए दो योजनाएं शुरू की हैं. आगरा के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार बताते हैं कि यह योजनाएं कोल्ड स्टोरेज भंडारण प्रभार अनुदान योजना और दूसरी भामाशाह भाव स्थिरता है.

कोल्ड स्टोरेज भंडारण प्रभार अनुदान योजना

कोल्ड स्टोरेज भंडारण प्रभार अनुदान योजना में किसान को दो हेक्टेयर में 200 क्विंटल पैदावार पर 100 रुपये प्रति क्विंटल के अनुदान की घोषणा की गई है. जिसमें अधिकतम लाभार्थी किसान को अधिकतम 20000 रुपये का अनुदान मिलेगा. आगरा के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि किसान को जरूरी दस्तावेज देने होंगे. उनका सत्यापन किया जाएगा. अभी इस योजना में 14 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इस बारे में किसानों से संवाद किया जा रहा है.

भामाशाह भाव स्थिरता योजना

आलू किसानों की आर्थिक मदद के लिए यूपी सरकार ने भामाशाह भाव स्थिरता कोश की स्थापना की है. जिसमें सरकार ने करीब 1000 करोड़ रुपये का कोष जारी किया है. इसमें आलू उत्पादक को अधिकतम दो हेक्टेयर के 240 क्विंटल आलू उत्पादन से अधिकतम 200 क्विंटल पर अनुदान देय है. इस योजना में हर किसान शामिल हो सकता है. आगरा के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि हर साल शासन की ओर से बनाई गई कमेटी को आलू का भाव तय करना है. कमेटी के तय भाव से किसान को आलू का कम दाम मिलता है तो वह इस योजना का लाभार्थी बन सकता है. इसके लिए किसान को आवदेन करना होगा. जिसके लिए जरूरी दस्तावेज की बात करें तो जिस मंडी या व्यापारी को बेचे गए आलू की रसीद और जिस बैंक खाते में रकम पहुंची, उसकी डिटेल्स देनी होगी. यदि किसान का आलू कोल्ड स्टोरेज से बिक जाता है तो इस दशा में किसान, कोल्ड स्टोरेज संचालक और व्यापारी के बीच का शपथ पत्र, बेचे गए आलू की रसीद और बैंक डिटेल्स देनी होगी. जिससे तय मूल्य और बिक्री मूल्य के अंतर वाला भुगतान सरकार करेगी.

दोनों योजनाओं के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन

आगरा के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि शासन से आलू किसानों की आर्थिक मदद के लिए कोल्ड स्टोरेज भंडारण प्रभार अनुदान योजना और भामाशाह भाव स्थिरता योजना लान्च की गई हैं. जिसका लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना है. जिसके लिए सरकार ने पोर्टल https://potato.uphorticulture.in/ लॉन्च किया है. जिस पर ही ऑनलाइन आवेदन करना होगा. तभी किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा.

पट्टे या बटाई की खेती करने वाले परेशान

आगरा के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि आलू किसानों की अनुदान योजना में अभी ऐसे किसान शामिल नहीं हो पा रहे हैं, जो पट्टे या बटाई पर खेत लेकर आलू की खेती करते हैं. क्योंकि, भू अभिलेख में जमीन का मालिक दूसरा है. ऐसे में जमीन संबंधी दस्तावेज आलू की खेती करने वाले किसान के पास नहीं हैं. ऐसे ही किसी किसान ने अपना आलू बेटा या अन्य परिजन के नाम से कोल्ड स्टोरेज में भंडारित किया है, वह भी इन योजना के लिए पात्र नहीं हैं. ऐसे किसान की बात करें तो इनकी संख्या अधिक है. लगातार ऐसे किसान कार्यालय आ रहे हैं. ऐसे किसानों की समस्या जायजा है. अभी योजना शुरू हुईं है. इसलिए, इनमें जो भी कमियां हैं, उन्हें शासन स्तर पर दूर किया जाएगा. इसके लिए पट्टे या बटाई पर आलू की खेती करने वाले किसानों की पीड़ा के बारे में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है. दूसरे जिलों से भी ऐसी शिकायतें विभाग के अधिकारियों तक पहुंची हैं. अब विभाग से इन आलू किसानों को लेकर लिए जाने वाले निर्णय का इंतजार किया जा रहा है.

आगरा में बॉयर सेलर मीट

मनोज कुमार ने बताया कि किसानों की मदद के लिए यूपी सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसमें ही यूपी सरकार के उद्यान विभाग के अधिकारी छह राज्यों में गए हैं. इन राज्यों में झारखंड, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, उड़ीसा और राजस्थान शामिल हैं. जहां के आलू व्यापारियों से संपर्क किया जा रहा है. जिससे इन प्रदेशों में आलू की डिमांड को बढ़ाया जाए. विभाग की ओर से आगरा और आसपास के जिलों के आलू किसानों को अच्छा भाव दिलाने के लिए 12 सितंबर को आगरा में बायर्स एवं सेलर मीट का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें कोल्ड स्टोरेज स्वामी, देश-विदेश के बड़े बायर्स के साथ ही प्रगतिशील आलू किसान शामिल होंगे. जो अपने आलू का सीध सौदा बायर्स से कर सकेंगे. आगरा में होने वाली बॉयर सेलर मीट का मुख्य उद्देश्य आलू किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना और सीधे बड़ी फूड प्रोसेसिंग व चिप्स निर्माता कंपनियों से जोड़ना है.

आगरा में आलू की निकासी की धीमी

इस बार दूसरे प्रदेशों की मंडियों में आगरा के आलू की मांग कमजोर दिख रही है. जिसकी वजह आलू की गुणवत्ता पर असर होना है. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से इस बार आलू की डिमांड कम आ रही है. जिसकी वजह से आलू की डिमांड कम हो रही है. यही वजह है कि कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू बेहद धीमी गति से निकल रहा है. सितंबर के पहले सप्ताह तक आगरा में 40 फीसदी आलू की निकासी हुई है. आलू यदि कोल्ड स्टोरेजह में और रुकता है तो आगे आलू की कीमत कम होने की संभावना अधिक है.

थोक में चार से पांच रुपये का रेट

आगरा के कोल्ड स्टोरेज में आलू भरा हुआ है. इस बार आलू का भाव बेहद कम है. जिससे आलू उत्पादक किसान परेशान हैं. किसानों का कहना है कि आलू की लागत करीब 12 प्रति किलोग्राम आ रही है. जबकि, अभी आलू का थोक में रेट चार से पांच रुपये प्रति किलोग्राम है. आलू का एक पैकेट 200 रुपये में बिक रहा है. जिसमें से 130 रुपये प्रति पैकेट भाड़ा है. ऐसे में किसान को 70 रुपये प्रति पैकेट मिल रहे हैं. इसमें अभी अन्य खर्चे शामिल हैं. किसान के हाथ खाली हैं. जबकि, फुटकर की बात करें तो आलू का रेट आगरा में ही 12 से 15 रुपये तक है.

अनुदान बेहद कम, रकबा घटेगा

किसान विरेंद्र सिंह ने बताया कि आलू के भाव कम होने से उत्पादक किसान कर्ज में डूब रहा है. सरकार ने किसान की आर्थिक मदद के लिए दो अनुदान योजनाएं शुरू की हैं. जिससे आलू उत्पादक किसानों को महज दो हेक्टेयर की आलू उपज 200 क्विंटल पर 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से महज 20000 रुपये का अनुदान मिलेगा. इसमें बड़े किसान शामिल नहीं हैं. ठीक है, सराकर छोटे किसान को ही अनुदान दे रही हैं. मगर, ये भी बेहद कम है. आलू के गिरते भाव की वजह से जिले में आलू का रकबा घटने के आसार हैं. क्योंकि, अभी किसान असमंजस की स्थित में हैं. जब इस साल आलू का भाव सही नहीं मिला है तो अगले साल सही भाव मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है.

कोल्ड स्टोरेज संचालकों की बढ़ेगी मनमानी

किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि योगी सरकार आलू किसानों की आर्थिक मदद को अनुदान योजनाएं लाई है. यह योजनाएं वैसे तो सही हैं, मगर, इस योजना में बेहद खराब कड़ी कोल्ड स्टोरेज संचालक हैं. जो पहले से ही मनमानी करते आए हैं. अनुदान योजना में जो टर्म ऑफ कंडीशन लगाए गए है, उसमें सबसे ज्यादा इनकी ही मनमानी होनी है. कोल्ड स्टोरेज संचालक इस योजना में शामिल होने वाले किसानों का नुकसान करेंगे. आशंका जताई कि इस योजना में ऐसे किसानों को शामिल कराएंगे, जो आलू की खेती ही नहीं करते हैं. मगर, अनुदान की बंदरबांट के लिए रसीदें ऐसे लोगों के नाम पर जारी करेंगे. छोटे किसानों की बेहद कम रकम होने पर उन्हें जरूरी रसीद और अन्य दस्तावेज के लिए परेशान करेंगे. जिससे ऐसा लग रहा है कि ये दोनों ही योजनाएं आलू किसानों से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज संचालक के लिए बनाई गई हैं.

आगरा में 450 व यूपी में 2000 से अधिक कोल्ड स्टोरेज

यूपी की बात करें तो करीब 2000 से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं. जिनमें आलू के साथ ही अन्य फसलें स्टोरेज की जाती हैं. आगरा की बात करें तो जिले में 450 कोल्ड स्टोरेज हैं. आगरा में सबसे अधिक एत्मादपुर, खंदौली, फतेहाबाद, खेरागढ़, किरावली और शमसाबाद ब्लॉक हैं.

छह अधिकारी और कर्मचारी हुए थे घोटाले में निलंबित

बता दें कि, बीते साल आलू बीज वितरण में बड़ा घोटाला हुआ था. किसानों के रजिट्रेशन और रुपये जमा कराने के बाद भी आलू का बीज नहीं मिलने पर हंगामा हुआ था. जिस पर शासन स्तर पर आलू बीज वितरण घोटाले में तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह, उप निदेशक (उद्यान) उद्यान धर्मपाल यादव और उप निदेशक आलू (उप्र) कौशल कुमार नीरज, बीज वितरण प्रभारी संजीव यादव और लिपिक सुनील कुमार को निलंबित किया गया था. इसके बाद यूपी सरकार ने आलू बीज वितरण को लेकर नई गाइडलाइन बनाई थी.

यूं मिलेगा सब्सिडी पर आलू का बीज

जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि इस बार प्रदेश सरकार ने अनुदान पर आलू की बीज देने के लिए भी विशेष प्लानिंग की है. जिसमें किसानों को सब्सिडी पर आलू का बीज लेने के लिए पहले विभागीय पोर्टल https://potato.uphorticulture.in/ पर रजिट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसान को आलू की अलग-अलग वैरायटी के बीज की संख्या दर्ज करनी होगी. जिसके मुताबिक, बीज का मूल्य जमा करना होगा. जिसके बाद किसान के बैंक खाते में डीबीटी से सीधे ही बीज अनुदान की रकम पहुंच जाएगी. जिससे बीज के वितरण में पादर्शिता रहेगी. इसके साथ ही हर पात्र किसान को बीज मिल सकेगा.

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