डेढ़ कुंतल का कांवड़, 18 साल का कांवरिया... योगी आदित्यनाथ को तीसरी CM बनाने की मनोकामना के साथ 80 किमी के सफर पर निकला हिमांशु
Prayagraj News सावन के महीने में यूं तो लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग को जल अर्पित करते हैं और भगवान भोलेनाथ से अपनी मनोकामनाएं भी मांगते हैं. लेकिन जब कोई कांवरिया जल लेकर के एक स्थान से शिवा…

सौजन्य से:- gnttv.com
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सावन के महीने में यूं तो लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग को जल अर्पित करते हैं और भगवान भोलेनाथ से अपनी मनोकामनाएं भी मांगते हैं. लेकिन जब कोई कांवरिया जल लेकर के एक स्थान से शिवालयों या किसी ज्योतिर्लिंग के लिए रवाना होता है तो उसके साथ एक संकल्प भी जुड़ा होता है. ये लोग कई बार अपनी किसी इच्छा को लेकर कांवड़ उठाते हैं तो कई बार ये लोग देश और समाज से जुड़े विषयों का भी संकल्प लेकर चलते हैं और भगवान भोलेनाथ से उसे पूरा करने की प्रार्थना करते हैं. यूपी में भी एक अनोखा कावड़ियां है, जो योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने की मनोकामना के साथ कांवड़ लेकर चला है.
डेढ़ कुंतल के कांवड़ के साथ हिमांशु-
इस कावड़िए का नाम हिमांशु है और ये प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं. 18 साल के हिमांशु प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से डेढ़ कुंतल का कांवड़ लेकर रवाना हुए हैं. जिसमें 10 बड़े स्टील के घड़े और कई प्लास्टिक की केन शामिल हैं. जिनमें 101 लीटर गंगाजल भरा है. हिमांशु ये कांवड़ लेकर यहां से 80 किलोमीटर दूर प्रतापगढ़ के नाथ मंदिर पहुंचकर वहां भोले बाबा को गंगाजल अर्पित करेंगे.
योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार CM बनाने की मन्नत-
18 साल का हिमांशु ये कांवर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने और गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के संकल्प और मनोकामना लेकर निकला है. हिमांशु का कहना है कि उसके रास्ते में मुश्किलें आएंगी, क्योंकि वो अकेला ये कांवड़ लेकर निकला है. लेकिन वो अपना संकल्प हर हाल में पूरा करेगा. हिमांशु का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधरी है, जिससे मां-बहनों का सम्मान सुरक्षित हुआ है.
हिमांशु का क्या है सपना?
हिमांशु ये भी चाहता है कि योगी आदित्यनाथ भविष्य में देश के प्रधानमंत्री बनें. हमेंशा की डगर कठिन और मुश्किल भरी है. लेकिन हिमांशु का कहना है कि वो पहले भी बड़े कांवड़ उठाकर हरिद्वार तक जा चुका है और इस बार भी वो अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगे, भले ही वो अकेला क्यों न हो.
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