गोरखपुर: 1000 करोड़ का बजट और AI टेक्नोलॉजी भी फेल! आखिर क्यों हर साल डूब जाता है सीएम योगी का शहर?
गोरखपुर: 1000 करोड़ का बजट और AI टेक्नोलॉजी भी फेल! आखिर क्यों हर साल डूब जाता है सीएम योगी का शहर? मनीष चौहान के संपादन में मुकेश पांडेय की खास रिपोर्ट By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : October 8, 2026 at 9:1…

सौजन्य से:- ETV Bharat
गोरखपुर: 1000 करोड़ का बजट और AI टेक्नोलॉजी भी फेल! आखिर क्यों हर साल डूब जाता है सीएम योगी का शहर?
मनीष चौहान के संपादन में मुकेश पांडेय की खास रिपोर्ट
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : October 8, 2026 at 9:10 PM IST
गोरखपुर: कई बार जो दिखाई देता है वही सच नहीं होता, बल्कि उसके पीछे हैरान करने वाली हकीकत छिपी होती है. इस समय यही हालत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर की है, जहां चमचमाती सड़कें, चौड़े कटआउट्स और रामगढ़ ताल का मखमली किनारा देखकर कोई भी कह देगा- वाह, गोरखपुर बदल रहा है, लेकिन जैसे ही आसमान में मानसून के बादल घिरते हैं, इस वीआईपी शहर का यह चमकीला मुखौटा उतर जाता है और डरावनी तस्वीर सामने आती है. फिर नजर आता है घुटनों तक डूबा गोलघर, टापू बने रिहायशी इलाके, प्रमुख बाजार और जल भराव से बेहाल जनता. इस रिपोर्ट में पढ़िए 1000 करोड़ खर्च के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम बदहाल और जनता बेहाल...
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार और नगर निगम ने जलभराव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए करीब 1000 करोड़ की लागत से 'इंटीग्रेटेड अर्बन स्टार्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान' की शुरुआत की है. आधुनिक AI तकनीक और गोड़धोइया नाला जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, जिसकी तारीफ खुद पीएम मोदी और नीति आयोग कर चुके हैं, लेकिन सवाल वही है, इतने भारी भरकम बजट और तकनीक के बाद भी गोरखपुर का ड्रेनेज सिस्टम हर साल फेल क्यों हो जाता है?
सीएम योगी ने की पहल
यहां जल भराव के लिए कुछ भौगोलिक कारण भी माने जा रहे हैं, क्योंकि गोरखपुर शहर राप्ती नदी के किनारे एक कटोरे जैसी स्थिति में बसा हुआ है, जहां वर्षों से भारी बारिश में जल भराव की स्थिति पैदा होती रही है. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इस समस्या से निजात दिलाने की पहल की. इसके लिए लगभग 1000 करोड़ से अधिक का बजट जहां तकनीकी को विकसित करने में खर्च हुआ है, वहीं निर्माण की प्रक्रिया पर भी इससे कम रुपए खर्च नहीं हुए हैं.
विकास का दावा, दो दिन में खुली पोल
इसी क्रम में शहर को जल भराव से मुक्त करने के लिए गोड़धोइया नाले का निर्माण हो रहा है, जो करीब 9.5 किलोमीटर की लंबाई में 80% तक पूरा कर लिए जाने का दावा किया जा रहा है. वहीं, अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना भी हुई है, जो देश का आधुनिक अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम है. यह सब दिखाते हैं कि शहर में विकास की रफ्तार काफी तेज है. इसी बीच करीब 15 दिन पहले दो दिन लगातार हुई बारिश ने सारे दावों को पोल खोलकर रख दी. जल भराव ने ऐसा संकट पैदा किया कि सांसद से लेकर महापौर और सभी अधिकारियों को सड़क पर उतरकर सफाई अभियान को आगे बढ़ाना पड़ा. इस दौरान उन्हें व्यापारियों और लोगों के गुस्से का शिकार भी होना पड़ा.
घरों में घुस गया पानी
सरकार ने जल भराव की समस्या से निपटने के लिए जीआईएस मैपिंग और आधुनिक सैटेलाइट सिस्टम से मास्टर प्लान तैयार किया है. उसी प्रोजेक्ट के तहत निर्माण कार्य चल रहा है. जल भराव की स्थिति उत्पन्न होने पर अनुबंध फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम इसकी जानकारी देता है, फिर वहां पंपिंग सेट लगाकर जल निकासी की प्रक्रिया तेज की जाती है, लेकिन जब तक यह सब होता है, उससे पहले व्यापारियों के व्यापार स्थल और घरों में पानी घुस जाता है.
नालों को नदी में टैप करने की योजना पूरी नहीं
करीब 13 नालों को राप्ती नदी में टैप करने की योजना लंबे समय से अभी पूरी नहीं हो पाई है. गोड़धोइया नाला के माध्यम से रामगढ़ ताल में पानी ले जाने पर काम चल रहा है. इसके अलावा नालों की सफाई में लापरवाही भी बड़ा कारण है. मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार ने का कहना है कि उनकी जांच में यह बात पाई गई है कि नाले सही समय पर साफ नहीं किए जाते, जिससे जल भराव की स्थिति उत्पन्न होती है. अगर बीते तीन सालों का बात करें तो इस साल बारिश ने पिछले 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसकी वजह से इस साल जल भराव की समस्या में अधिक रही.
क्या कहते हैं नगर आयुक्त ?
नगर आयुक्त अजय जैन का कहना है कि जल भराव की समस्या से निपटने के लिए जो भी सिस्टम और निर्माण कार्य जरूरी हैं, उन पर काम चल रहा है. योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है. उम्मीद है कि इससे शहरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्होंने यह भी बताया कि अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम से सटीक जानकारी उन्हें मिलती हैं, लेकिन भारी बारिश के दौरान उसे नियंत्रित करने में दिक्कत भी आती है, जो हॉटस्पॉट चिन्हित हुए हैं उनको भविष्य के लिए दुरुस्त किया जाएगा. गोड़धोइया नाला निर्माण में अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया, जिनके घर, जमीन नाले के भीतर आ रहा था उन्हें मुआवजा दिया गया.
क्या बोले व्यापारी?
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष जितेंद्र कुमार शुक्ला का कहना है कि यह समस्या साल दर साल की है. इसको दूर करने के बेहतर प्लान नहीं बनते. उन्होंने कहा कि सभी व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक जिलाधिकारी के साथ सालभर में कई बार होती है. वह अपनी समस्याओं को उन्हें बताते हैं महापौर और नगर आयुक्त को भी बताते हैं, लेकिन उसे अनसुना किया जाता है. जिसका नतीजा है कि 2026 के सितंबर माह की 2 दिन की बारिश में व्यापारियों के लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक बर्बाद हुए हैं.
स्थानीय नागरिक राहुल पटवा ने कहा कि गोरखपुर में सरकार ड्रेनेज के निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है. यह हमें दिखाई भी दे रहा है, लेकिन भारी बारिश में जब पूरा शहर जलमग्न हो गया तो लगा कि निर्माण में धांधली की गई है, जिसका परिणाम है कि शहर जल भराव से जूझ रहा है.
जल भराव की समस्या को लेकर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर पवन कुमार का कहना है कि प्राकृतिक जल के स्रोतों को जीवित करना चाहिए. विकास की प्रक्रिया में हम पुरानी चीजों को तोड़ तो देते हैं, लेकिन उसका मजबूत विकल्प न बना पाने की वजह से फिर जल भराव का संकट झेलते हैं. उन्होंने कहा कि जितना फोकस हम सड़क और बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के निर्माण पर करते हैं, उतना ही जरूरी जल निकासी के बेहतर प्लान को भी तैयार करना होता है.
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