यूपी चुनाव: कांग्रेस मांग रही 100 सीट, सपा पुराने फॉर्मूले पर तैयार नहीं?
यूपी चुनाव: कांग्रेस मांग रही 100 सीट, सपा पुराने फॉर्मूले पर तैयार नहीं? कांग्रेस नेताओं की दलील है कि 2017 में गठबंधन के तहत उनकी पार्टी ने 100 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार दिए थे. ऐसे में इस बार भी उसे इतनी सीटें मिलन…

सौजन्य से:- abplive.com
यूपी चुनाव: कांग्रेस मांग रही 100 सीट, सपा पुराने फॉर्मूले पर तैयार नहीं?
कांग्रेस नेताओं की दलील है कि 2017 में गठबंधन के तहत उनकी पार्टी ने 100 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार दिए थे. ऐसे में इस बार भी उसे इतनी सीटें मिलनी चाहिए.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अब पार्टियों के गठबंधन की चर्चाएं भी तेज हो गई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस ने 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का हवाला देते हुए बड़ी हिस्सेदारी मांग रही है. सूत्रों की माने तो कांग्रेस 100 सीटों की डिमांड कर रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता लोकसभा की उन सीटों की सभी विधानसभा सीट मांग रहे हैं जहां पर पार्टी के सांसद हैं. हालांकि अभी इसको लेकर के दोनों पार्टियों के बीच मंथन चल रहा है.
सूत्रों की माने तो कांग्रेस की ओर से 100 से ज्यादा सीटों पर दावा किया जा रहा है. इसमें उन जिलों की पूरी सीटें शामिल है जहां पर लोकसभा सीट कांग्रेस की जीती हुई है. कांग्रेस का तर्क है कि जिन छह सीटों पर उनके सांसद है उन जिलों में उनका प्रभाव है. ऐसे में वो उन जिलों विधानसभा सीटें में कामयाब होगी.
इन जिलों में कांग्रेस ने दर्ज की है सीट
कांग्रेस की यूपी से लोकसभा में छह सीटें है. इसमें सहारनपुर से इमरान मसूद, सीतापुर में राकेश राठौर, रायबरेली से राहुल गांधी, अमेठी में किशोरी लाल शर्मा, बाराबंकी में तनुज पुनिया और इलाहाबाद से उज्ज्वल रमण सिंह सांसद है. इन छह जिलों में 30 विधानसभा सीटें है.
हर सीट पर होगा उम्मीदवार का आकलन
सपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक सीट बंटवारे के दौरान कई बिंदुओं को देखा जाएगा. इनमें उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, जातीय समीकरण, संगठन की स्थिति और विपक्षी दलों को चुनौती देने की क्षमता प्रमुख होगी. इसी आधार पर तय होगा कि किसी सीट पर सपा चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस को मौका दिया जाएगा. पार्टी के भीतर कांग्रेस के हिस्से में करीब 40 से 50 सीटें आने की चर्चा भी है. हालांकि, अंतिम संख्या दोनों दलों के बीच बातचीत के बाद ही तय होगी.
2017 का फॉर्मूला इस बार नहीं चलेगा?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 2017 में गठबंधन के दौरान पार्टी ने 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसलिए इस बार भी उसे इतनी सीटें मिलनी चाहिए. लेकिन सपा नेतृत्व पुराने फॉर्मूले के बजाय मौजूदा चुनावी परिस्थितियों के हिसाब से सीटों का बंटवारा करने के पक्ष में है. 2022 में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे. सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं. ऐसे में 2027 के लिए सीट शेयरिंग में मौजूदा राजनीतिक ताकत और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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