होमक्राइम'जान नहीं लेना चाहते, चुपचाप चाबी दे दो' कानपुर में पूर्व इंस्पेक्टर के घर 10 लाख की डकैती, बचने के लिए बदमाशों के पैरों में गिर पड़ी बुजुर्ग मां
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'जान नहीं लेना चाहते, चुपचाप चाबी दे दो' कानपुर में पूर्व इंस्पेक्टर के घर 10 लाख की डकैती, बचने के लिए बदमाशों के पैरों में गिर पड़ी बुजुर्ग मां

कानपुर के श्याम नगर चौकी स्थित सी-ब्लॉक में बदमाशों ने दिवंगत रिटायर्ड इंस्पेक्टर जय नारायण त्रिपाठी के घर दिनदहाड़े डकैती की घटना को…

Aaj Tak News के अनुसार4 अगस्त 2026 को 04:18 pm बजे
'जान नहीं लेना चाहते, चुपचाप चाबी दे दो' कानपुर में पूर्व इंस्पेक्टर के घर 10 लाख की डकैती, बचने के लिए बदमाशों के पैरों में गिर पड़ी बुजुर्ग मां

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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कानपुर के श्याम नगर चौकी स्थित सी-ब्लॉक में बदमाशों ने दिवंगत रिटायर्ड इंस्पेक्टर जय नारायण त्रिपाठी के घर दिनदहाड़े डकैती की घटना को अंजाम दिया. तीन हथियारबंद लुटेरों ने घर में घुसकर पूर्व इंस्पेक्टर की बहू रचना और उनके 16 वर्षीय पोते देवांश को चाकू व पिस्टल की नोक पर बंधक बना लिया. बदमाशों ने दोनों को रस्सी से बांधकर किचन में बंद कर दिया और 10 लाख रुपये से अधिक के जेवरात व 15 हजार रुपये नकद लूट लिए. विरोध करने पर लुटेरों ने नाबालिग पोते को चाकू मारकर घायल भी कर दिया. इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है. फिलहाल, पुलिस जांच-पड़ताल में जुटी है. 24 घंटे बाद भी कोई आरोपी पकड़ा नहीं गया है.

चाकू और पिस्टल दिखाकर दी धमकी

घटना के समय घर में शिक्षक बेटे शरद चंद्र त्रिपाठी का 16 वर्षीय बेटा देवांश पढ़ाई कर रहा था और पत्नी रचना किचन में काम कर रही थीं. तीन बदमाशों में से दो नकाब पहने थे जबकि एक का चेहरा खुला था. घर में घुसते ही देवांश एक लुटेरे से भिड़ गया, जिस पर बदमाश ने चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया. लुटेरों ने मां को बंधक बनाने की धमकी देकर दोनों के हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए.

'जान मत लेना, जो चाहो ले जाओ'

बदमाशों ने धमकी दी कि वे केवल चाबी चाहते हैं और जान नहीं लेना चाहते. यह सुनकर मां रचना बदमाशों के पैरों में गिर पड़ीं और जान बख्शने की गुहार लगाते हुए सामान ले जाने को कहा. लुटेरे मंगलसूत्र, पायल, अन्य जेवर, नकदी और दोनों के मोबाइल फोन लूट लिए. करीब 45 मिनट तक घर खंगालने के बाद वे अपाचे बाइक से फरार हो गए.

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मेड ने आकर खोला किचन का दरवाजा

घटना के लगभग 1 घंटे बाद जब काम करने वाली मेड प्रियंका पहुंची, तो उसने घर का सामान बिखरा देखा. किचन से रचना की दबी आवाज सुनकर उसने दरवाजा खोला और दोनों को बंधन मुक्त कराया. बदमाशों ने पीड़ित परिजनों के मोबाइल डेढ़ किलोमीटर दूर एक पेड़ के नीचे फेंक दिए थे, जिसे पुलिस ने एक दुकानदार की सूचना पर बरामद कर लिया.

पुलिस जांच और सीसीटीवी की पड़ताल

डीसीपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि दोपहर 12 बजे घटना की जानकारी मिली थी. तीन युवक अपाचे बाइक से आए थे. फिलहाल पुलिस और फोरेंसिक टीम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है. बदमाशों की पहचान और उनके भागने के रूट का पता लगाने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं.

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