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सीएम योगी ने बदल डाला कानून, बुढापे में मां-बाप को सताया तो नहीं मिलेगी उनकी प्रॉपर्टी, होंगे बेदखल..जानिए पूरा कानून

70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने लिया तलाक, जानें क्या थी मजबूरी कि हाई कोर्ट ने दे दी मंजूरी योगी कैबिनेट ने क्या फैसला लिया? - बुजुर्ग नागरिको का बुढ़ापा चैन से बीते, इसके लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कैबि…

Navbharat Times के अनुसार26 अगस्त 2026 को 07:23 pm बजे
सीएम योगी ने बदल डाला कानून, बुढापे में मां-बाप को सताया तो नहीं मिलेगी उनकी प्रॉपर्टी, होंगे बेदखल..जानिए पूरा कानून

सौजन्य से:- Navbharat Times

70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने लिया तलाक, जानें क्या थी मजबूरी कि हाई कोर्ट ने दे दी मंजूरी

योगी कैबिनेट ने क्या फैसला लिया?

- बुजुर्ग नागरिको का बुढ़ापा चैन से बीते, इसके लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

- वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नियम 22 में 22-क, 22-ख और 22-ग जोड़े जाएंगे। इनका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को ऐसे बच्चों या आश्रित रिश्तेदारों से सुरक्षा देना है जो उनका भरण-पोषण नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

- यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इसे कैबिनेट द्वारा स्वीकृत संशोधन प्रस्ताव के रूप में बताया गया है। इसे कानून के रूप में लागू किए जाने के लिए सदनों से पास होने के बाद राज्यपाल की अनुमति की भी आवश्यकता होगी।

- इसलिए अंतिम लागू प्रक्रिया के लिए संबंधित संशोधन की आधिकारिक अधिसूचना और उसके सटीक शब्दों को देखना जरूरी होगा। बहरहाल बुजुर्ग नागरिकों के बुढ़ापे को आसान बनाने की दिशा में योगी सरकार की यह कोशिश अहम है।

क्या माता-पिता अब बच्चों को पूरी तरह विरासत से निकाल सकेंगे?

दरअसल, केंद्र के 2007 में लाए गए 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम’ में वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े अधिकार मौजूद हैं। उदाहरण के लिए धारा 23 के तहत यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने इस शर्त पर अपनी संपत्ति गिफ्ट या अन्य तरीके से ट्रांसफर की कि प्राप्तकर्ता उसकी बुनियादी जरूरतों और शारीरिक देखभाल की व्यवस्था करेगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, तो ट्रांसफर को ट्रिब्यूनल द्वारा निरस्त किए जाने का रास्ता मौजूद है। सरल शब्दों में धारा 23 वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा और उसके हस्तांतरण को रद्द करने का स्पष्ट अधिकार देती है। इसलिए यूपी के नए नियमों को भी मुख्यतः वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से लापरवाह संतान या आश्रितों को बेदखल कराने की व्यवस्था के तौर पर समझना ज्यादा सही है, न कि सामान्य उत्तराधिकार कानून को बदल देने वाली व्यवस्था के रूप में।IVF से हुई संतान,मां-बाप से DNA मैच नहीं, करोड़ों के हर्जाने का हक बनता है, क्या कहता है कानून

किस तरह की संतान या रिश्तेदार के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है?

मामले में गौर करने करने वाली बात यह है कि उपलब्ध सरकारी निर्णय संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित प्रावधान ऐसे मामलों में लागू होंगे जहां वरिष्ठ नागरिक की संतान या अन्य आश्रित रिश्तेदार उनका भरण-पोषण नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। यह व्यवस्था महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि 2007 के केंद्रीय कानून की धारा 4 भी सक्षम बच्चों पर माता-पिता के भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी डालती है। कानून के अनुसार ऐसा वरिष्ठ नागरिक जो अपनी कमाई या अपनी संपत्ति से खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, अपने बच्चों के खिलाफ भरण-पोषण के लिए आवेदन कर सकता है।गर्लफ्रेंड की 3400 किस वाली कार पर पुलिस ने लगाया 5500 का जुर्माना, किस कानून के तहत ऐसा करना अपराध है?

शिकायत कहां होगी और 30 दिन वाली व्यवस्था के बारे में जानिए

फिलहाल जो प्रस्ताव पारित किया गया है, उसके लिए सरकार की ओर से बताई गई व्यवस्था के मुताबिक ऐसे मामलों में शिकायत जिला मजिस्ट्रेट (DM) के समक्ष की जा सकेगी। संबंधित अधिकारियों को मामलों की मासिक रिपोर्ट देने की व्यवस्था भी बताई गई है और शिकायत की सुनवाई 30 दिन के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए टोल-फ्री नंबर जारी करने की भी बात कही है जो स्वयं कार्यालय तक पहुंचने की स्थिति में नहीं हैं।बुजुर्ग मां-बाप की संपत्ति पर कब्जा नहीं, वरिष्ठों की सुरक्षा के लिए बेटे की हो सकती है बेदखली, Supreme Court ने समझाया कानून

सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख से कैसे जुड़ता है यह फैसला?

देखा जाए तो वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का हालिया रुख भी खासा महत्व रखता है। साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत परिस्थितियों में बच्चों को संपत्ति से हटाने की शक्ति को मान्यता दी थी, जब ऐसा वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन की रक्षा के लिए जरूरी हो। साथ ही, न्यायिक फैसलों से यह भी स्पष्ट है कि बेदखली हर पारिवारिक विवाद में स्वतः नहीं हो जाती। परिस्थितियां, संपत्ति पर अधिकार, वरिष्ठ नागरिक की वास्तविक स्थिति और कानून की लागू शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं।'मां-बाप की इज्जत खराब होती है' घर से भाग कर Live-in Relationhship मामले में बोला हाईकोर्ट

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