देखभाल नहीं करने वाले बच्चे को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे मां-बाप, योगी सरकार ने बदला कानून
देखभाल नहीं करने वाले बच्चे को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे मां-बाप, योगी सरकार ने बदला कानून अब बुढ़ापे में यदि संतान काम न आए तो मां-बाप उसे अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। मां-बाप अपने इस अधिकार का आसानी से इस्तेमाल कर…

सौजन्य से:- Hindustan
देखभाल नहीं करने वाले बच्चे को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे मां-बाप, योगी सरकार ने बदला कानून
अब बुढ़ापे में यदि संतान काम न आए तो मां-बाप उसे अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। मां-बाप अपने इस अधिकार का आसानी से इस्तेमाल कर सकें, योगी सरकार इसका भी इंतजाम कर रही है। योगी कैबिनेट बैठक में सरकार ने अधिनियम में संशोधन के साथ ही जल्द एक टोल नंबर जारी करने की भी बात कही है।
उत्तर प्रदेश में माता-पिता के बुढ़ापे में उनसे मुंह मोड़ लेने और देखभाल न करने वाली संतानों के खिलाफ योगी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने यूपी में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण कल्याण अधिनियम में संशोधन करने का निर्णय लिया है जिससे माता-पिता को ऐसी संतानो को बेदखल करने का अधिकार मिल गया है। वरिष्ठ नागरिक नीति के तहत मां-बाप अपने बच्चों को बेदखल करने का अधिकार दिया गया है। बेदखली की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। सरकार टोल नंबर भी जारी करेगी जिससे कि यदि वरिष्ठ नागरिक जा नहीं जा सकें तो इस नंबर पर संपर्क करके अपनी बात कह सकें। जिला मजिस्ट्रेट हर महीने रिपोर्ट देंगे। 30 दिन में सुनवाई होगी।
मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में 22 क, 22 ख और 22 ग जोड़ने का निर्णय लिया है। अधिनियम में जोड़े गए इन प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए माता-पिता अपनी संतानों को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। सरकार ने बेदखली की प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी है। बताया गया है कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की संतान या उसके अन्य आश्रित रिश्तेदार भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं या उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं, दुर्व्यहार कर रहे हैं तो पीड़ित वरिष्ठ नागरिक उन्हें अपनी प्रॉपर्टी से बेदखल कर सकेंगे।
जल्द टोल नंबर जारी करेगी सरकार
योगी कैबिनेट ने इस बात का भी इंतजाम किया है कि बुजुर्गों को इस व्यवस्था का लाभ आसानी से मिल सके। सरकार ने बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया है। इसके साथ ही सरकार जल्द ही एक टोल नंबर भी जारी करेगी। इस नंबर से उन वरिष्ठ नागरिकों को आसानी होगी जो खुद जाकर अपनी शिकायत करने में सक्षम नहीं हैं। वे टोल नंबर पर फोन कर अपनी बात कह सकेंगे। शिकायत मिलते ही उन्हें तत्काल जरूरी मदद मुहैया कराई जाएगी।
डीएम के पास कर सकेंगे शिकायत
अधिनियम के नए प्रावधानों के मुताबिक पीड़ित बुजुर्ग ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के पास शिकायत कर सकेंगे। डीएम को इस प्रकार के सभी मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के अंदर की जाएगी। मकसद यह है कि बुजुर्गों को अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। योगी सरकार इसके पहले भी बुजुर्गों की देखभाल को लेकर कई प्रावधान कर चुकी है। अब योगी कैबिनेट द्वारा अधिनियम में किए गए इस बदलाव का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का हक दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। जानकारों का कहना है कि इससे उन पर होने वाले अत्याचारों और दुर्व्यवहार में निश्चित ही कमी आएगी।
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