किसानों को सस्ता लोन, पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण... योगी कैबिनेट के बड़े फैसले
योगी कैबिनेट ने 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इनमें चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और किसान…

सौजन्य से:- AajTak
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योगी कैबिनेट ने 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इनमें चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और किसानों को सस्ती दर पर लोन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं.
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को विकसित किए जाने के लिए संशोधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को भी मंजूरी दी गई है. बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रण वाले परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव पास किया गया है. पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी.
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है. उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के जरिए किसानों को 6 लाख रुपये तक का ऋण 6% वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है.
किरायेदारी व्यवस्था को आसान बनाया गया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश में किरायेदारी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए अहम फैसला लिया गया. सालाना 10 लाख तक के किराए पर यह बदलाव किया गया है. 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस में छूट को संशोधित करते हुए शुल्क व्यवस्था को सरल और किफायती बनाया गया है. इससे मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने-देने वालों को बड़ी राहत मिलेगी.
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स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अभी किसी व्यक्ति द्वारा मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने अथवा लेने पर स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी. इससे किरायानामा तैयार कराकर उसका पंजीयन कराने में लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था. योगी सरकार ने अब इस व्यवस्था को सरल करते हुए निर्धारित शुल्क की व्यवस्था की है. इसके तहत दो लाख रुपये तक की सालाना किराया राशि पर 1,000 रुपये, छह लाख रुपये तक 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है.
पूर्व अग्निवीरों को जेल वार्डर-प्रवर्तन सिपाही भर्ती में मिलेगा 20% क्षैतिज आरक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने वाला महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. योगी सरकार ने देशसेवा के बाद लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों को प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए जेल वार्डर और परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने को मंजूरी दी है. इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की विशेष छूट भी मिलेगी.
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग में जेल वार्डर तथा परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू होगा. पूर्व अग्निवीर जिस सामाजिक श्रेणी से संबंधित होंगे, उन्हें उसी श्रेणी में इस आरक्षण का लाभ देकर समायोजित किया जाएगा.
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4 वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों को भूतपूर्व सैनिकों की तर्ज पर अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट दी जाएगी. आयु की गणना में उनकी 4 वर्ष की सेवा अवधि को घटाने का प्रावधान किया गया है. इससे अधिक संख्या में पूर्व अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे.
प्रदेश की जेलों में सामान्य अपराधियों के साथ गंभीर, कुख्यात और संवेदनशील अपराधियों को भी निरुद्ध किया जाता है. ऐसे में पूर्व अग्निवीरों का सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन, कौशल व सुरक्षा संबंधी अनुभव कारागारों की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में उपयोगी साबित होगा. इससे जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.
स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सेहत (फिटनेस) को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के भीतर 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन-एटीएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है. अब गाड़ियों की जांच मशीनों से की जाएगी, जिससे सटीक रिपोर्ट मिलेगी. इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने 2 अगस्त 2023 के पुराने सरकारी आदेश को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नई नीति 'राज्य नीति-2026' को पास किया है.
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परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकते हैं. हर सेंटर पर 24 हजार गाड़ियों तक जांच की जाएगी. वहीं पूर्व में सेंटर के लिए 2.5 एकड़ जमीन की शर्तों में भी छूट दी गई है, अब यह 1 एकड़ कर दिया गया है. वहीं एटीएस सेंटर खोलने के लिए पहले 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की अनिवार्यता थी, जिसे अब हटा दिया गया है. इसके अलावा इन सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित होने के लिए 6 महीने तक कार्रवाई में भी छूट मिलेगी.
स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी
दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 में अध्याय-11 के तहत स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है. इन्हीं नवीनतम दिशा-निर्देशों और परिपत्रों को पूर्व में जारी राज्य नीति (2 अगस्त 2023) में समाहित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया था. योगी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार यानी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा. प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी.
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हर जनपद में एटीएस की स्थापना संभव
नई नीति के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की जल्द स्थापना संभव होगी. इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा. यानी एटीएस की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने का रास्ता खुलेगा.
रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
एटीएस के संचालन के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इस तरह स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे. वहीं नई व्यवस्था में वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा. इसके साथ ही सड़कों पर केवल पूरी तरह से फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी.
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