होमराजनीतिलद्दाख की तरह यूपी में भी बन सकती है हाई कोर्ट बेंच? वह कौन सा नियम… जो वकीलों ने सीएम योगी को बताया - western up high court bench lawyers demand cm yogis stance
राजनीति

लद्दाख की तरह यूपी में भी बन सकती है हाई कोर्ट बेंच? वह कौन सा नियम… जो वकीलों ने सीएम योगी को बताया - western up high court bench lawyers demand cm yogis stance

लद्दाख की तरह यूपी में भी बन सकती है हाई कोर्ट बेंच? वह कौन सा नियम… जो वकीलों ने सीएम योगी को बताया पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों ने मेरठ में सीएम योगी से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसे…

Jagran के अनुसार22 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
लद्दाख की तरह यूपी में भी बन सकती है हाई कोर्ट बेंच? वह कौन सा नियम… जो वकीलों ने सीएम योगी को बताया - western up high court bench lawyers demand cm yogis stance

सौजन्य से:- Jagran

लद्दाख की तरह यूपी में भी बन सकती है हाई कोर्ट बेंच? वह कौन सा नियम… जो वकीलों ने सीएम योगी को बताया

पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों ने मेरठ में सीएम योगी से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।

HighLights

- पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों का प्रदर्शन।

- सीएम योगी ने कहा, बेंच गठन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं।

- वकीलों ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 का हवाला दिया।

शिवम यादव, मेरठ। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में हाई कोर्ट बेंच के गठन की मांग सालों से चली आ रही है, हालांकि इस पर किसी राजनीतिक दल ने इतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई है, चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। सोमवार को जब मेरठ में भाजपा के सम्मेलन के दौरान वकीलों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ उनकी ‘हाई कोर्ट बेंच के गठन’ की मांग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

सीएम योगी ने दलीलों को नकारा

मेरठ में योगी के आने पर वकीलों ने एकजुट होकर केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। बाद में प्रतिनिधिमंडल से सीएम योगी ने बात की और सभी दलीलों को यह कहकर नकार दिया और बेंच देना उनके अधिकार में नहीं है।

इसके बाद, वकीलों ने सीएम योगी को यह सुझाव दिया कि जम्मू कश्मीर की लद्दाख बेंच की तरह आप भी विधानसभा से बेंच के गठन का प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के लिए भेज दीजिए। वकीलों ने इसके नियमों की जानकारी भी दी तो सीएम ने कह दिया कि आप ये नियम लिखकर दे दीजिए।

अब जानिए क्या है ये नियम?

भारत देश जब आजाद हुआ तो कई हिस्सों में बंटा हुआ था, तब देश को सुव्यवस्थित करने और भाषाई व प्रशासनिक आधार एक साथ मिलाने के लिए तत्कालीन सरकार ने 1953 में एक आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग) बनाया था, जिसने 1955 में अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपी। इसके आधार पर बने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत राज्य खुद हाई कोर्ट का गठन कर सकता है।

इस संबंध में मेरठ बार के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट गजेंद्र सिंह धामा ने बताया कि हमने मुख्यमंत्री योगी जी को राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर हाई कोर्ट के गठन का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट का मामला बताकर इनकार कर दिया। दिया।

हाई कोर्ट बेंच की क्यों उठ रही मांग?

केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा, संयोजक परवेज आलम, जिला बार अध्यक्ष रविंद्र सिंह और महामंत्री प्रशांत गुप्ता ने उन्हें मांगपत्र सौंपकर बताया कि पश्चिम में 22 जनपदों में दो लाख वकील और सात करोड़ की आबादी है। लंबित मामलों और क्षेत्रफल के आधार पर इस क्षेत्रफल को हाई कोर्ट बेंच मिलनी चाहिए। 50 साल से यह मांग की जा रही है।

गौरतलब है कि बीते माह केंद्र सरकार ने लद्दाख में उच्च न्यायालय की एक स्थानीय बेंच के गठन का प्रस्ताव तैयार किया, जिस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वीकृति दे दी है। लद्दाख क्षेत्र जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन लद्दाख के लिए कोई अलग से स्वतंत्र हाई कोर्ट नहीं है। इस नए नियम के अनुसार, लद्दाख की हाई कोर्ट का स्थान तो जम्मू और श्रीनगर में ही रहेगा, लेकिन लद्दाख के न्यायिक मामलों के लिए विशेष पीठ की स्थापना होगी।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें