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वाराणसी में वरुणा की बाढ़ से डूबे बुनकरों के करघे: लाखों का हुआ नुकसान, बोले- कमाई का साधन बाढ़ में डूबा; खाने के पड़े लाले - Varanasi News

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Dainik Bhaskar के अनुसार5 सितंबर 2026 को 08:31 am बजे
वाराणसी में वरुणा की बाढ़ से डूबे बुनकरों के करघे:  लाखों का हुआ नुकसान, बोले- कमाई का साधन बाढ़ में डूबा; खाने के पड़े लाले - Varanasi News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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वाराणसी में वरुणा की बाढ़ से डूबे बुनकरों के करघे:लाखों का हुआ नुकसान, बोले- कमाई का साधन बाढ़ में डूबा; खाने के पड़े लाले

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'हमारे पास दो लूम हैं। दोनों 10 दिन से बंद हैं क्योंकि लूम में पानी आ गया है। इसके निकलने में अभी समय लगेगा। तब तक कारोबार बंद है और घर का भरण-पोषण कैसे करें। इसके बारे में सोचना पड़ता है। क्योंकि जा तक पूरी जमीन सूख नहीं जाएगी लूम स्टार्ट नहीं होगा। वरना मकान के साथ ही साथ साड़ी को भी नुकसान होगा। ऐसे में सरकार को चाहिए की हमारी मदद करे।'

ये कहना है वाराणसी के नक्खीघाट के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हिदायत नगर के इकबाल अहमद का। इकबाल के अलावा उनके घर के आस-पास कई बुनकरों के लूम में पानी घुस गया है। जहां तक जाना भी सम्भव नहीं है। इकबाल की मानें तो उनके घर में भी जैसे-जैसे पानी बढ़ेगा वो सभी लोग ऊपर के तल पर शिफ्ट हो जाएंगे।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर शनिवार की सुबह 3 सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से घट रहा है। लेकिन वरुणा का पानी अभी स्थिर है। एनडीआरफ की टीम लगातार वरुणा में पेट्रोलिंग कर लोगों से बाढ़ से क्षेत्र से दूर जाने की चेतावनी दे रही है। स्थानीय अभी भी पानी बढ़ने की आशंका से चिंतित हैं।

ऐसे में दैनिक भास्कर नक्खीघाट के हिदायतनगर में पहुंचकर यहां के साड़ी कारोबारियों से बातचीत किया और जाना की आखिर उन्हें कैसी दिक्कतों का बाढ़ में सामना करना पड़ता है।

वरुणा में बाढ़ की 3 तस्वीरें देखिए…

अब जानिए जिनका कारोबार बंद है, उन्होंने क्या बताया

लूम डूबने से बंद हो गया कारोबार

नक्खीघाट के हिदायत नगर के रहने वाले इकबाल अहमद के घर में साड़ी की बुनाई से गुजर-बसर होता है। लेकिन उनके घर में पानी 5 फिट तक भरा हुआ है। वरुणा के किनारे बसे इकबाल अहमद ने बताया - यह हमारा कारोबार है। इसी लूम पर हम साड़ी बुनते हैं। यह डूब गया है और काम बंद हो गया है।

कारोबार डूबने से हम लोगों का हाथ कट सा गया है। हम कैसे दाल-रोटी चला रहे हैं। ये हम जानते हैं। ये मशीन खाली है क्योंकि डूब गई है। इसको जब कपड़ा पहनाएंगे तो पैसा लगेगा, लेकिन हमारे पर अब कोई पूंजी नहीं है।

सरकार हम लोगों की कुछ मदद करे तो हमें दिक्कत नहीं होगी। पानी आने और उतरने में एक महीने का समय लगेगा। उसके बाद इसे फिर से चालू किया जा सकेगा।

चोरी का रहता है डर

इकबाल ने कहा- घर-परिवार के लिए महंगाई से लड़ ही रहे हैं। बाढ़ में जब पानी आता है तो हम लोग नीचे का हिस्सा बंद करके ऊपर के हिस्से में चले जाते हैं। यदि हम मकान छोड़कर जाएं तो यहां चोरियों का डर रहता है। ऐसे में हम लोग इसी मकान ऊपरी तल पर रहते हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद इसकी साफ-सफाई में भी कई दिन लगेंगे।

कारोबार हो जाता है बाढ़ में चौपट

बेलाल अहमद ने बताया- बाढ़ आने के बाद हम औरतों को और बच्चों को ऊंचे स्थानों पर या किराय के मकानों में भेज देते हैं। लेकिन जब बाढ़ का पानी ज्यादा बढ़ता है तो हमें भी घर छोड़कर जाना पड़ता है। क्योंकि मकान का कोई भरोसा नहीं है। मकान में रहना भी जरूरी रहता है। क्योंकि अक्सर चोरियां होती हैं और ये चोरी जब बाढ़ तैरती है तब पता चलती है। इसलिए यहां रहते हैं।

बिलाल ने कहा की हमें कोई मदद सरकारी नहीं मिलती। जबकि हमारा कारोबार बाढ़ में चौपट हो जाता है। बेलाल के यहां भी लूम है जो डूबा हुआ है।

लूम पर साड़ियां थी जिन्हे आधे में हटाना पड़ा

इसी इलाके के इस्लाम ने बताया- हमारे घर में दो लूम थे दोनों पर साड़ियां लगी थीं। रात में अचानक पानी भरा तो साड़ियों को अधूरे में हटाना पड़ा। इससे हमें काफी नुकसान हुआ है। क्योंकि वह साड़ी अब दोबारा नहीं बन पाएगी और उसका मेटेरियल बर्बाद जाएगा।

हर बार वाराणसी में हजारों हैंडलूम और पावर लूम डूब जाते हैं और तीन महीने कारोबार ठप रहता है। क्योंकि पानी तीन महीनों में कभी बढ़ता और कभी घटता है। ऐसे में काम शुरू है किया जा सकता है।

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