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वाराणसी में स्टे के बावजूद गिरा दिया मकान, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा तो अफसर बोले- हमने नहीं, हमने नहीं

वाराणसी के दालमंडी स्थित एक मकान के ध्वस्तीकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों पर हैरानी जताई है। प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी स्थित एक मकान के ध्वस्तीकरण को लेकर…

Navbharat Times के अनुसार28 अगस्त 2026 को 01:27 am बजे
वाराणसी में स्टे के बावजूद गिरा दिया मकान, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा तो अफसर बोले- हमने नहीं, हमने नहीं

सौजन्य से:- Navbharat Times

वाराणसी के दालमंडी स्थित एक मकान के ध्वस्तीकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों पर हैरानी जताई है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी स्थित एक मकान के ध्वस्तीकरण को लेकर सरकारी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा कि तीन अधिकारियों के हलफनामों को एक साथ पढ़ने पर यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि आखिर 11 जून को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किसने करवाई।

एक अधिकारी ने कार्रवाई के दौरान मौके पर मैौजूद रहने की बात स्वीकार की है, जबकि अन्य अधिकारी ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी से इनकार कर रहे हैं। न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने तीनों हलफनामों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 22 सितंबर तय की है।

स्टे के बावजूद गिराया गया मकान

मामला वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र का हैं। जावेद आलम ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के सात मई 2026 के आदेश के बावजूद 11 जून को उसके मकान को गिरा दिया गया। सात मई के आदेश में नगर निगम को नई समिति गठित कर मकान का निरीक्षण कराने और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक मकान और संबंधित दुकान के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए। इसके बाद कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा था कि 11 जून को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिला प्रशासन अथवा किसी सरकारी विभाग ने करवाई थी या नहीं।

नगर निगम बोला- हमने नहीं गिराया मकान

नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नई समिति गठित की गई थी। इसमें नगर निगम, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता और एक स्वतंत्र पंजीकृत आर्किटेक्ट को शामिल किया गया था। निरीक्षण में भवन को जर्जर और खतरनाक पाया गया, जिसके बाद 26 मई को नया नोटिस जारी किया गया। हालांकि नगर निगम ने दावा किया कि मकान उसने नहीं गिराया, बल्कि कार्रवाई किसी अन्य विभाग ने की।

'मकान का जर्जर हिस्सा स्वतः गिरा'

लोक निर्माण विभाग से जुड़े अधिकारी ने कहा कि 11 जून को दालमंडी रोड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के दौरान ध्वस्तीकरण हुआ था। हालांकि कार्रवाई करवाने से इनकार करते हुए पुलिस के साथ मौके पर मौजूद रहने और कानून-व्यवस्था संभालने की बात स्वीकार की। वहीं तीसरे अधिकारी ने दावा किया कि जिला प्रशासन या विभाग ने कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की और मकान का जर्जर हिस्सा स्वतः गिर गया। तीनों हलफनामों में सामने आए विरोधाभासी दावों से हैरान कोर्ट ने याची से जवाब मांगा है।

लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें

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