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मंत्री निषाद बोले- जेब में गड्डी लेकर निकले मौसमी नेता: मछुआरा समाज को गुमराह कर रहे; यूपी में निषाद वोट की लड़ाई - Uttar Pradesh News

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Dainik Bhaskar के अनुसार14 सितंबर 2026 को 02:04 pm बजे
मंत्री निषाद बोले- जेब में गड्डी लेकर निकले मौसमी नेता:  मछुआरा समाज को गुमराह कर रहे; यूपी में निषाद वोट की लड़ाई - Uttar Pradesh News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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मंत्री निषाद बोले- जेब में गड्डी लेकर निकले मौसमी नेता:मछुआरा समाज को गुमराह कर रहे; यूपी में निषाद वोट की लड़ाई

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यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने सोमवार को विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी पर जमकर हमला बोला। हालांकि, निषाद ने सहनी का नाम नहीं लिया। कहा- कुछ “मौसमी नेता” अब तक तय नहीं कर पाए हैं कि मुंबई में व्यापार करेंगे। यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछाएंगे या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करते रहेंगे। जैसा उन्होंने अपने राज्य में किया है।

आजादी के बाद पहली बार यूपी में मछुआरा समुदाय राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। अब विधानसभा चुनाव का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में बाहर से आने वाले नेताओं से समाज को सावधान रहने की जरूरत है।

जो बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम रहा हो। जिसने वहां मछुआरों के राजनीतिक उभार को ग्रहण लगा दिया हो। जो एक विधानसभा चुनाव तक जीतने की हैसियत नहीं रखता हो। वह जेब में नोटों की गड्डी रखकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को गुमराह करने की राजनीति करने निकला है।

संजय निषाद बोले- मछुआरा समाज बिकने वाली कौम नहीं

संजय निषाद ने कहा- मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। यूपी के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझना होगा कि राजनीति उनके खून में है। मछुआरा गरीब भले है, लेकिन गद्दार पुत्र नहीं है। अंग्रेजों और मुगलों से लड़ने वाला है। उन्हें मौत के घाट उतारने वाला, देश को आजाद कराने वाला और संविधान लिखवाने वाला है। संविधान में आरक्षण भी लिखवाने वाला है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की वजह से समाज का आरक्षण लुटा और आज भी लूटा जा रहा है। समाज को एकजुट नहीं होने दिया जा रहा है। केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर समाज में भेद पैदा किया जा रहा है।

जो दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज में बांटता है और लोगों को “बिकाऊ” या “पीआऊ” का लेबल देता है, वह सही मायने में सन ऑफ केवट नहीं बल्कि “गद्दार पुत्र” है।

जानिए संजय निषाद की नाराजगी की वजह

गोंडा की घटना के बाद बढ़ी तल्खी

संजय निषाद के इस हमले के पीछे गोंडा में निषाद समाज के विनोद कुमार निषाद की हत्या का मामला अहम माना जा रहा है। इस मामले में मुकेश सहनी की सक्रियता से संजय निषाद नाराज बताए जा रहे हैं। सहनी ने घटना के बाद निषाद समाज के बीच पहुंचकर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। लखनऊ में धरना देने सबसे परिवार को लेकर पहुंच गए थे।

दरअसल, मुकेश सहनी पिछले कुछ समय से पूर्वांचल में निषाद समाज के बीच सक्रियता बढ़ा रहे हैं। वह लगातार मछुआरा समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाकर यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा से तालमेल की चर्चा से भी संजय बेचैन

यूपी विधानसभा चुनाव- 2027 से पहले मुकेश सहनी की सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही, क्योंकि उनकी सपा से तालमेल की चर्चा चल रही है। सहनी की पार्टी बिहार में मछुआरा और अति पिछड़ा वोटबैंक के बीच अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करती रही है।

इसके अलावा, यूपी में पूर्वांचल की बड़ी संख्या में विधानसभा सीटों पर निषाद, मल्लाह, बिंद, केवट और कश्यप समुदाय की मौजूदगी है। ऐसे में सहनी की सक्रियता निषाद पार्टी के लिए सीधे राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

दूसरी ओर, संजय निषाद लंबे समय से निषाद समाज को अपने राजनीतिक आधार के तौर पर मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में बाहर से आने वाले किसी नेता की ओर से इसी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश को वह अपने राजनीतिक प्रभाव के लिए चुनौती मान रहे हैं।

निषाद वोट की लड़ाई अब आमने-सामने

एक तरफ संजय निषाद अपनी पार्टी को भाजपा के साथ गठबंधन में निषाद समाज की सबसे बड़ी राजनीतिक आवाज के तौर पर पेश कर रहे हैं। दूसरी तरफ मुकेश सहनी पूर्वांचल में सक्रिय होकर इसी सामाजिक आधार को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में निषाद, मल्लाह, बिंद, केवट और कश्यप समुदाय के बीच दोनों नेताओं की राजनीतिक सक्रियता बढ़ सकती है। संजय निषाद का आज का बयान इसी बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का खुला संकेत माना जा रहा है।

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