चंद्रशेखर के खिलाफ रोहिणी घावरी का हमला तेज: लखनऊ पहुंचकर बोलीं- वाल्मीकि समाज को नजरअंदाज कर कोई पार्टी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी - Uttar Pradesh News
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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चंद्रशेखर के खिलाफ रोहिणी घावरी का हमला तेज:लखनऊ पहुंचकर बोलीं- वाल्मीकि समाज को नजरअंदाज कर कोई पार्टी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी
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आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी सोमवार को लखनऊ पहुंचीं। वह मेरठ से जनशताब्दी ट्रेन से दोपहर करीब 1 बजे लखनऊ पहुंचीं। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा- “अगली बड़ी खबर का इंतजार कीजिए।” इसके बाद उनके लखनऊ आने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
रोहिणी ने कहा कि वंचित समाज और खासतौर पर वाल्मीकि समाज को नजरअंदाज करके कोई भी राजनीतिक पार्टी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में वह अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ संवाद कर सकती हैं। कहा- “इन राजनीतिक पार्टियों से हाथ ना जुड़वा लिए तो कहना।”
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। रोहिणी लगातार वाल्मीकि समाज और सर्वसमाज को अपने राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रख रही हैं।
मुझे राजमाता की उपाधि देने वाले विरोधियों का शुक्रिया
रोहिणी ने चंद्रशेखर के समर्थकों की ओर से सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें “राजमाता” की उपाधि देने वाले सभी विरोधियों का वह शुक्रिया अदा करती हैं।
रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- वाल्मीकि समाज की बेटी देश की बेटी बन गई। पेट में दर्द होना लाजमी है।”
उन्होंने आगे चंद्रशेखर की राजनीति पर भी निशाना साधा। कहा कि “इनके नेता की पहचान दलितों के नेता ही बनी रह गई। कभी सर्व समाज ने नहीं स्वीकारा तो मुझसे जलन होना स्वाभाविक है।”
सिर्फ दो दिन हुए और विरोधियों का रोना शुरू हो गया
रोहिणी ने यह भी कहा कि उन्हें वापस आए अभी सिर्फ दो दिन हुए हैं और विरोधियों की तरफ से प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। उन्होंने लिखा- “मुझे वापस आए सिर्फ 2 दिन ही हुए और इनका रोना शुरू हो गया। अब देखो मेरी मेहनत।”
करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ तस्वीर का भी जिक्र
रोहिणी ने करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अम्मू पाल की ओर से मिले सम्मान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अम्मू पाल ने अपनी कुर्सी पर बैठाकर उनका सम्मान किया। राजनीतिक तौर पर रोहिणी के इस बयान को चंद्रशेखर पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है। उनके मुताबिक यह सम्मान इस बात का संकेत है कि वह केवल एक राजनीतिक नेता के समर्थक वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि व्यापक सामाजिक दायरा बनाने की कोशिश कर रही हैं।
दो दिन में बढ़ी सियासी हलचल
रोहिणी के सार्वजनिक रूप से सक्रिय होने के बाद पिछले दो दिनों में सोशल मीडिया पर उनके और चंद्रशेखर के समर्थकों के बीच बयानबाजी तेज हुई है। अब लखनऊ पहुंचकर उनके “अगली बड़ी खबर” वाले पोस्ट ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
हालांकि रोहिणी ने अभी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। लेकिन जिस तरह वह वाल्मीकि समाज, वंचित समाज और सर्वसमाज को लेकर बयान दे रही हैं, उससे साफ है कि उनका फोकस अब केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है।
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