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जिसके जाट, उसी के ठाठ! पश्चिमी यूपी पर क्यों है सबकी नजर… आंकड़ों की जुबानी समझें पूरी कहानी

जिसके जाट, उसी के ठाठ! पश्चिमी यूपी पर क्यों है सबकी नजर… आंकड़ों की जुबानी समझें पूरी कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लेकर एक कहावत काफी चर्चा होती है, जिसके जाट, उसी के ठाठ. यानी यूप…

Hindustan के अनुसार22 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
जिसके जाट, उसी के ठाठ! पश्चिमी यूपी पर क्यों है सबकी नजर… आंकड़ों की जुबानी समझें पूरी कहानी

सौजन्य से:- Hindustan

जिसके जाट, उसी के ठाठ! पश्चिमी यूपी पर क्यों है सबकी नजर… आंकड़ों की जुबानी समझें पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लेकर एक कहावत काफी चर्चा होती है, जिसके जाट, उसी के ठाठ. यानी यूपी की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसका फैसला जाट मतदाता कई सीटों पर कर सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाटलैंड के नाम से भी जाना जाता है

उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव की सियासी तैयारियां काफी तेज होती दिख रही हैं। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर बीजेपी ने अपनी घेराबंदी भी करनी शुरु कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं और पार्टी की निगाह यहां की 71 सीटों पर गड़ी हुई है। कहते हैं जिस तरह दिल्ली जाने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, ठीक उसी तरह पश्चिमी यूपी को सूबे की राजनीति में "सत्ता का प्रवेश द्वार" माना जाता है। उत्तर प्रदेश में हुए पिछले दो विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो जिस पार्टी ने पश्चिमी यूपी में कब्जा जमाया सत्ता का चाभी उसी के हाथ लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां कमाल का प्रदर्शन किया और लगातार अपनी सरकार बनाई। आइए जानते पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सारा चुनावी गणित।

जिसके जाट, उसी के ठाठ

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लेकर एक कहावत काफी चर्चा होती है, "जिसके जाट, उसी के ठाठ." यानी यूपी की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसका फैसला जाट मतदाता कई सीटों पर कर सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाटलैंड के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां इस समुदाय की आबादी करीब 17 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है। ऐसे में 45 से 50 विधानसभा सीटों पर जाट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

भाजपा का दबदबा

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी पर किसान आंदोलन के असर की बात कही जा रही थी, पर नतीजों में इस आंदोलन का कोई भी असर नहीं पड़ा समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोक दल (SP-RLD) के मजबूत गठबंधन के बावजूद बीजेपी ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की और राज्य की सत्ता पर दोबारा वापसी की। हालांकि, 2017 के मुकाबले बीजेपी को 13 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। 2017 में 60 सीटों पर कब्जा जमाया था।

वहीं 2012 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने पश्चिमी यूपी में केवल 19 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को राज्य में बहुमत मिला था। सपा ने पश्चिमी यूपी में अच्छा प्रदर्शन किया था और अपनी सरकार बनाई थी।

2024 ने सबको चौंकाया

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के गठबंधन ने यहां बीजेपी को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव ने एक बात तो साफ कर दी थी कि पूरे उत्तर प्रदेश का मूड एक जैसा नहीं है। कहीं बीजेपी मजबूत रही, कहीं समाजवादी पार्टी ने बढ़त बनाई। 2024 में लोकसभा चुनाव हुए, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 80 में से 43 सीट जीत कर सबको चौंका दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल की थी।

भाजपा-सपा नहीं छोड़ना चाहते कोई कसर

2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने पश्चिमी यूपी में 15 सीटें खोईं, लेकिन फिर भी करीब 70 प्रतिशत सीटों पर बढ़त बनाए रखी। समाजवादी पार्टी और रालोद के गठबंधन ने BJP को कड़ी टक्कर दी थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी को 33 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था और वहां आरएलडी 8 सीटें जीतने में कामयाब भी हो गई थी। लेकिन 2024 लोक सभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी, भाजपा गठबंधन में शामिल हो गए। वहीं इस बार भाजपा के पास जयंत चौधरी का साथ है तो अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। सपा को बीते दो विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के मुकाबले पश्चिमी यूपी से काफी कम समर्थन मिला है। वहीं इस बार BJP पश्चिमी यूपी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

14 जिलें की 71 सीटों पर नजर

बता दें कि, 71 विधानसभा सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का प्रवेश द्वार मानी जाती हैं। इनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और रामपुर शामिल हैं। इन जिलों के 71 विधानसभा सीटों पर भाजपा, आरएलडी के साथ -साथ समाजवादी पार्टी ने खास नजर रखी है।

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