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यूपी में पंचायत चुनाव नवंबर में होंगे? हाईकोर्ट ने कहा- अधिसूचना से छह माह में वोटिंग के लिए सरकार बाध्य

यूपी में पंचायत चुनाव नवंबर में होंगे? हाईकोर्ट ने कहा- अधिसूचना से छह माह में वोटिंग के लिए सरकार बाध्य यूपी पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिसूचना की तिथि से छह माह के भीतर चुनाव…

Hindustan के अनुसार6 अगस्त 2026 को 01:18 pm बजे
यूपी में पंचायत चुनाव नवंबर में होंगे? हाईकोर्ट ने कहा- अधिसूचना से छह माह में वोटिंग के  लिए सरकार बाध्य

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी में पंचायत चुनाव नवंबर में होंगे? हाईकोर्ट ने कहा- अधिसूचना से छह माह में वोटिंग के लिए सरकार बाध्य

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिसूचना की तिथि से छह माह के भीतर चुनाव कराने के लिए सरकार बाध्य है। यह वैधानिक अनिवार्यता है। यह अवधि नवंबर में खत्म होगी।

यूपी में पंचायत चुनाव कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवायी करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने टिप्पणी की है कि राज्य सरकार अधिसूचना की तिथि से छह माह के भीतर वोटिंग कराने के लिए बाध्य हैं। यह एक वैधानिक अनिवार्यता है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार के अधिवक्ता के अनुसार यह अवधि नवंबर 2026 में समाप्त हो जाएगी। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवायी के लिए 11 अगस्त की तिथि नियत की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने एसके शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने कहा कि हमने अभिलेख इसलिए भी तलब किए थे क्योंकि हम यह देखना चाहते हैं कि क्या ऐसी परिस्थितियां विद्यमान थीं जो राज्य सरकार के नियंत्रण से परे थीं, जिनके कारण समय रहते चुनाव कराने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जा सके, अथवा राज्य सरकार उक्त अवधि की समाप्ति से पूर्व चुनाव संपन्न कराने के अपने दायित्व के निर्वहन में विफल रही।

न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में कुछ ई-अभिलेख प्रस्तुत किए गए हैं, अगली तिथि पर उनका पुनः परीक्षण किया जाएगा। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार के लिए यह उचित होगा कि वह सुरेश महाजन मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का अवलोकन करे।

कोर्ट ने कहा कि हमारा मत है कि भविष्य में चुनाव कराने की प्रक्रिया, तत्कालीन कार्यकाल की समाप्ति से कम-से-कम दो वर्ष पूर्व प्रारंभ कर दी जानी चाहिए, तभी संभवतः संविधान के अनुच्छेद 243-ई में निहित संवैधानिक अधिदेश के अनुरूप समय पर चुनाव सम्पन्न कराए जा सकेंगे। वर्तमान मामले में सरकार ने मई 2025 से प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी, फिर भी अब तक चुनाव सम्पन्न नहीं कराए जा सके हैं।

पिछड़ा आयोग और वोटर लिस्ट के कारण टला पंचायत चुनाव

उधर, प्रयागराज विधि संवाददाता के अनुसार राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर दाखिल जवाब में कहा कि वोटिंग समय पर न हो पाने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के कारण आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया आयोग की संस्तुतियों पर निर्भर है। दूसरा, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 10 जून 2026 निर्धारित किए जाने के कारण 26 मई 2026 से पूर्व पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं था।

एडीसी के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा एवं आयुष पांडेय की जनहित याचिका में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद समय पर चुनाव न कराए जाने को चुनौती दी है। जनहित याचिका में कहा गया है कि पंचायतों का संवैधानिक कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित ग्राम प्रधानों को उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12(3-ए) के तहत प्रशासक नियुक्त किया जाना संविधान के अनुच्छेद 243-ई की भावना के विपरीत है।

अपने जवाब में राज्य सरकार ने चुनाव में हुई देरी का कारण पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रक्रिया ओर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तिथि को भी चुनाव न करा पाने का आधार बनाया है। राज्य सरकार के इस विस्तृत जवाब पर अगले सप्ताह में मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होगी। इससे पूर्व याचियों को राज्य सरकार के काउंटर एफिडेविट का बिंदुवार उत्तर प्रस्तुत करना है।

लेखक के बारे में

Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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