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UP गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर इलाहाबाद HC की सख्त टिप्पणी, गाजियाबाद पुलिस को 50 हजार रुपया मुआवजा देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का उत्पीड़न के हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर सख्त टि…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार17 सितंबर 2026 को 05:04 am बजे
UP गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर इलाहाबाद HC की सख्त टिप्पणी, गाजियाबाद पुलिस को 50 हजार रुपया मुआवजा देने का आदेश

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का उत्पीड़न के हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का उत्पीड़न के हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस से जुड़े एक प्रकरण पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल एक या दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट लगाना कानून का दुरुपयोग है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि नौकरशाही इस तरह के अवैध और मनमाने अधिकारों के प्रयोग को रोके, अन्यथा दंडात्मक हर्जाना भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पूर्व के दो आदेशों को निरस्त कर पूरी कार्यवाही रद कर दी। साथ ही याची को हुई पीड़ा और प्रतिष्ठा के नुकसान के लिए 50 हजार रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया।

गाजियाबाद थाना टीला मोड़ से जुड़ा हुआ मामला

मामला गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है। थाना टीला मोड़ के याची के खिलाफ दो मुकदमे क्रमश: 2022 और 2025 में दर्ज किए गए थे। इन्हीं के आधार पर यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 2/3 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई। अपर पुलिस आयुक्त ने 18 सितंबर 2025 को आदेश पारित कर याची को छह महीने तक हर दूसरे और चौथे शनिवार को थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया।

इस आदेश के खिलाफ याची ने मंडलायुक्त मेरठ मंडल के समक्ष अपील दाखिल की, जिसे 10 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने लालनी पांडे, शंकरजी शुक्ला, गोवर्धन, सौरभ और राहुल बनाम यूपी राज्य के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए इस दलील को सही माना। कोर्ट ने कहा कि दोनों मुकदमों में तीन साल का अंतर है, इससे यह साबित नहीं होता कि याची आदतन अपराधी है।

हाई कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि गुंडा एक्ट का दुरुपयोग कर आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने याची अभिषेक त्यागी के खिलाफ की गई गुंडा एक्ट की कार्रवाई को रद करते हुए उसे 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसे संबंधित अधिकारियों के वेतन से भी वसूला जा सकता है।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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