उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों का नए सिरे से कराया जाएगा सर्वे, योगी सरकार का आदेश - up govt to survey nazul properties illegal encroachments targeted
उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों का नए सिरे से कराया जाएगा सर्वे, योगी सरकार का आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश की नजूल संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराने ...और पढ़ें समय कम ह…

सौजन्य से:- Jagran
उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों का नए सिरे से कराया जाएगा सर्वे, योगी सरकार का आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश की नजूल संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराने ...और पढ़ें
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बहुमत के बावजूद जिस उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध और उपयोग) विधेयक-2024 को सत्ता पक्ष ने विधान परिषद से पारित कराने के बजाय प्रवर समिति को भेजने का निर्णय किया था, उसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को पहली बैठक हुई।
बैठक में तय किया गया कि प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों (भूमि-भवन आदि) का नये सिरे से सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में देखा जाएगा कि कितनी नजूल संपत्ति अवैध कब्जे में है और कितनी फ्रीहोल्ड हैं? नजूल संपत्ति के कोर्ट में लंबित मामलों का ब्योरा भी जुटाया जाएगा।
आवास एव शहरी नियोजन विभाग के अधिकारियों को एक माह में सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद फिर प्रवर समिति की बैठक होगी। संबंधित विधेयक में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को विधान परिषद के शीतकालीन सत्र में रखा जा सकता है। प्रदेश में लगभग दो लाख करोड़ रुपये की 75 हजार एकड़ नजूल भूमि के ही होने का अनुमान है।
लगभग दो वर्ष पहले विधेयक के विधानसभा से पारित होने के बाद विधान परिषद में पहुंचने पर उसमें संशोधन के लिए उसे प्रवर समिति को सौंपने का निर्णय किया गया था। इसके लिए आवास मंत्री का भी दायित्व संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी की अगुवाई में परिषद की नौ सदस्यीय (डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, लालजी प्रसाद निर्मल, डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, डॉ. पीके श्रीवास्तव, आशुतोष सिन्हा, विच्छे लाल राम, योगेश चौधरी, ध्रुव कुमार त्रिपाठी व राजबहादुर सिंह चंदेल) प्रवर समिति का गठन किया गया था।
समिति की बुधवार को विधानभवन के कक्ष संख्या-77 में हुई पहली बैठक में आवास विभाग द्वारा नजूल संपत्तियों संबंधी प्रस्तुतीकरण किया गया। सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने विधेयक में संशोधन प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ऐसा कानून बने जिसमें वर्षों से वैध रूप से रह रहे नागरिकों, पट्टेदारों, गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हितों की रक्षा के साथ ही सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
राज बहादुर चंदेल ने नजूल की जमीनों का बेहतर उपयोग किये जाने की बात रखी। विधान परिषद में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विधेयक को जन उपयोगी बताया। सभी के सुझावों पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का नये सिरे से एक माह में सर्वे कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से नजूल संपत्तियों पर अवैध कब्जे और अदालतों में लंबित मामलों का ब्यौरा जुटाने को भी कहा। हिदायत दी कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। योगी ने कहा कि प्रत्येक संशोधन प्रस्ताव का विधिक आधार पर परीक्षण कर अगली बैठक में प्रस्तुत किया जाए।
दरअसल, सरकार का मानना है कि पूर्व की सरकारों में अरबों रुपये की नजूल संपत्तियों को कौड़ियों में फ्रीहोल्ड किया गया। भू-माफिया से लेकर नेता और नौकरशाह जनहित को ढाल बनाकर इस पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कानून का विरोध करते रहे हैं। प्रस्तावित कानून के लागू होने से विकास व सार्वजनिक कार्यों में ही नजूल भूमि का उपयोग किया जा सकेगा। नजूल भूमि का पूर्ण स्वामित्व निजी व्यक्ति या संस्था को नहीं होगा। कोर्ट या प्राधिकारी के समक्ष लंबित आवेदन अस्वीकृत समझे जाएंगे।
जिस नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कराने के लिए रकम जमा की गई है, उसे वापस किया जाएगा। लीज अवधि समाप्त होने की तिथि के बाद जितने दिन पट्टाधारी काबिज रहेगा, जिलाधिकारी को उसका किराया वसूलने का अधिकार होगा।
इस संबंध में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि ''नज़ूल जमीन विधेयक दरअसल भाजपा के कुछ लोगों के व्यक्तिगत फायदे के लिए लाया जा रहा है, जो अपने आसपास की ज़मीन को हड़पना चाहते हैं। गोरखपुर में ऐसी कई जमीने हैं, जिन्हें कुछ लोग अपने प्रभाव क्षेत्र के विस्तार के लिए हथियाना चाहते हैं।''
करोड़ों का है अवैध कारोबार
प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों व रसूख के बलबूते नजूल भूमि पर कब्जे तथा उसे फ्रीहोल्ड करा लेने का खेल पुराना है। लगभग तीन दशक पहले वर्ष 1993 में केंद्र सरकार द्वारा पूर्व गृह सचिव एनएन वोहरा की अगुवाई में गठित समिति की रिपोर्ट में राजनेता, अपराधी, भूमाफिया, नौकरशाह व न्यायपालिका से जुड़े लोगों के संगठित गिरोह पर चिंता जताते हुए कहा गया था कि बड़े शहरों में आय का मुख्य स्रोत अचल संपत्ति से जुड़ा है।
भूमि/भवनों पर जबरन कब्जा करना, मौजूदा निवासियों/किराएदारों को बाहर निकालकर सस्ते दामों पर ऐसी संपत्तियां खरीदना है। सरकारी जमीनों को सर्किल रेट का केवल 10 प्रतिशत भुगतान कर फ्रीहोल्ड कराने का खेल चलता रहा है। सर्वाधिक नजूल भूमि प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, वाराणसी, सुलतानपुर, गोंडा, बाराबंकी आदि में है। प्रयागराज के सिविल लाइन क्षेत्र की अधिकतर जमीन नजूल की है।
क्या होती है नजूल भूमि
देश की आजादी के पहले अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वालों में से बहुतों को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ा। अंग्रेज, विद्रोह करने वाले आम आदमी से लेकर राजाओं तक की जमीन पर कब्जा कर लेते। अंग्रेजों के जुल्मों से अपना शहर-गांव छोड़कर भागने वालों को फरार घोषित कर उनकी जमीन भी अंग्रेज ले लेते।
ऐसी ही जमीन नजूल की कहलाती है। स्वतंत्रता के बाद जिन जमीनों के वारिस अंग्रेजों द्वारा ली गई अपनी जमीन को वापस लेने के लिए नहीं आए उन नजूल जमीनों का पूर्ण स्वामित्व सरकार के पास ही है।
यह भी पढ़ें- सहारनपुर में मस्करा नदी पुल और गंदेवड़-चिलकाना मार्ग के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, 34.91 करोड़ रुपये स्वीकृत
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

UP में पलटी मारेगा मौसम! लखनऊ समेत इन 20 जिलों में बारिश का अलर्ट

Varanasi News: शिवपुर में बस की टक्कर से ठेकेदार की मौत

कानपुर में दवा कारोबारी हत्याकांड में बेटा गिरफ्तार, नौकर का दावा- शालू ने नहीं सुब्रत ने करवाई पिता की हत्या - kanpur vineet minocha murder case son subrat arrested confronted with shalu during probe


