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UP Floods: प्रयागराज में बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा, फिर बढ़ने लगी यमुना

UP Floods: प्रयागराज में बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा, फिर बढ़ने लगी यमुना प्रयागराज में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा और यमुना फिर बढ़ने लगी है। जलस्तर चार घंटे में तीन सेमी बढ़ा…

Hindustan के अनुसार9 सितंबर 2026 को 02:31 am बजे
UP Floods: प्रयागराज में बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा, फिर बढ़ने लगी यमुना

सौजन्य से:- Hindustan

UP Floods: प्रयागराज में बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा, फिर बढ़ने लगी यमुना

प्रयागराज में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा और यमुना फिर बढ़ने लगी है। जलस्तर चार घंटे में तीन सेमी बढ़ा है। गंगा के घटाव की रफ्तार भी आधी हुई है। 50 सेमी से एक मीटर तक जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

यूपी के प्रयागराज में चंबल और बेतवा में बढ़े पानी का असर अब यहां यमुना में दिखाई देने लगा है। पिछले तीन दिनों से नैनी में यमुना का जलस्तर लगातार घट रहा था, लेकिन मंगलवार सुबह से घटाव की रफ्तार धीमी पड़ गई। शाम चार बजे अचानक चार घंटे में यमुना का जलस्तर एक सेंटीमीटर बढ़ गया। रात आठ बजे दर्ज आंकड़ों में बढ़ोतरी की गति और तेज हो गई तथा चार घंटे में जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़ गया।

यमुना के बढ़ते दबाव का असर गंगा के जलस्तर पर भी पड़ने लगा है। छतनाग में गंगा के प्रवाह पर यमुना का दबाव महसूस किया जा रहा है। गंगा के जलस्तर में सुबह जहां करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से कमी हो रही थी, वहीं, अब घटाव की गति लगभग आधा सेंटीमीटर प्रति घंटा रह गई है। पिछले दिनों चंबल और बेतवा का जलस्तर बढ़ने से यहां ऐसी स्थिति बनी है। दो दिन में यमुना की सहायक चंबल नदी का जलस्तर इटावा में 11 मीटर बढ़ गया था।

बेतवा में भी व्यापक वृद्धि हुई थी। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता निखिल प्रसाद ने बताया कि टोंस का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे फिलहाल राहत है। हालांकि यमुना के जलस्तर में 50 सेंटीमीटर से एक मीटर तक बढ़ोतरी की संभावना है। उन्होंने बताया कि कानपुर बैराज से गंगा में डिस्चार्ज बढ़ाए जाने का असर भी दो दिन बाद फाफामऊ में दिखाई पड़ सकता है। बुधवार को जलस्तर बढ़ने की स्थिति साफ हो पाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में गंगा-यमुना के जलस्तर पर निगरानी और बढ़ा दी गई है।

बाढ़ में 80 सड़कें हो गईं क्षतिग्रस्त

मेजा, करछना और कोरांव में बाढ़ की वजह से 80 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पीडब्ल्यूडी की ओर से सर्वे कार्य कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान यह देखा जा रहा है कि कौन सी सड़क या संपर्क मार्ग कितनी दूरी में क्षतिग्रस्त हुआ है। इसकी मरम्मत कराने में कितना खर्चा आएगा। जिसे विशेष मरम्मत योजना के अंतर्गत सात दिनों में सर्वे रिपोर्ट लखनऊ स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय को भेजी जाएगी। खंड के सहायक अभियंता मो. अरशद ने बताया कि सड़कों की मरम्मत कराने को रिपेार्ट भेजी जाएगी। जहां थोड़ी मरम्मत होनी है, उसे कराया जाएगा लेकिन कई सड़कें ऐसी हैं। जिन्हें विशेष मरम्मत की योजना के अंतर्गत प्रस्ताव भेजा जाएगा। ताकि बजट को स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

डूबी किसानों की मेहनत नुकसान के लिए सर्वे तेज

गंगा-यमुना समेत सहायक नदियों के बढ़े जलस्तर और लगातार बारिश से जिले के कई इलाकों में खरीफ की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से धान समेत अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं। मेजा, कोरांव और बारा तहसील में फसल नुकसान सबसे अधिक होने की आशंका जताई गई है। जिला प्रशासन ने फसल क्षति का आकलन कराने के लिए सभी तहसीलों में राजस्व अधिकारियों की टीमें गठित की थीं। एसडीएम और तहसीलदारों को मौके पर जाकर फसल नुकसान का ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए गए।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों को मिलने वाली राहत और कृषि निवेश अनुदान की तस्वीर साफ होगी। मेजा क्षेत्र में कई खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से धान की फसल खराब हुई है। वहीं, फूलपुर समेत अन्य ग्रामीण इलाकों में भी जलभराव से खड़ी फसल प्रभावित हुई। जिले में सामान्य मानसून के मुकाबले इस बार बारिश भी काफी अधिक रही है। फिलहाल जिले के स्तर पर कुल कितने हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई और किसानों को कितने रुपये का नुकसान हुआ, इसका अंतिम सरकारी आंकड़ा अभी नहीं जारी किया गया है। प्रशासनिक सर्वे पूरा होने के बाद ही वास्तविक क्षति का आंकड़ा सामने आएगा।

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