यूपी में लाभार्थी राजनीति का जोर: योगी सरकार की योजनाएं और चुनावी समीकरण - up beneficiary politics yogis schemes 2027 election push
यूपी में लाभार्थी राजनीति का जोर: योगी सरकार की योजनाएं और चुनावी समीकरण यूजीसी विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय तक मौन रहकर प्रदेश की राजनीति में उफान मारती प्रतिकूलता साधने में ...और पढ़ें HighLights - योग…

सौजन्य से:- jagran.com
यूपी में लाभार्थी राजनीति का जोर: योगी सरकार की योजनाएं और चुनावी समीकरण
यूजीसी विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय तक मौन रहकर प्रदेश की राजनीति में उफान मारती प्रतिकूलता साधने में ...और पढ़ें
HighLights
- योगी सरकार वरिष्ठ महिलाओं को दे रही आजीवन मुफ्त बस यात्रा।
- युवाओं को रोजगार, छात्राओं को स्कूटर देने की योजनाएं शुरू।
- 2027 चुनाव से पहले लाभार्थी वर्ग साधने पर राजनीतिक दलों का जोर।
राज्य परिवहन निगम की बस में सवार होकर जब मुख्यमंत्री स्टैंडिंग पोज में सेल्फी का फ्रेम गढ़ते हैं, तो उसके चतुर्दिक उन महिलाओं की बस यात्री के रूप में उपस्थिति रहती है, जिनके लिए रक्षाबंधन के दिन की यात्रा अब जीवन भर के लिए यादगार बन जाएगी। रक्षाबंधन के दिन तो सभी महिलाओं को निश्शुल्क यात्रा पहले से ही मिल रही थी, अबकी वरिष्ठ महिला नागरिकों को जीवन पर्यंत सभी राजकीय बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू की गई है।
ऐसी महिलाओं की संख्या प्रदेश में करीब एक करोड़ है। ज्यों-ज्यों उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, योगी आदित्यनाथ सरकार की घोषणाओं में लाभार्थी समूह के रूप में महिलाओं, युवाओं पर फोकस बढ़ता जा रहा है। यूपी की राजनीतिक धरा पर सपा प्रमुख के रूप में अखिलेश यादव भी तू डाल-डाल तो मैं पात-पात का दांव चल रहे हैं।
महिला आरक्षण के ओज के बीच कांग्रेस में प्रियंका गांधी की सतत सक्रियता, सपा में डिंपल यादव का अखिलेश यादव के साथ प्रेस कान्फ्रेंस और अन्य पार्टी कार्यक्रम में लगातार साझीदार होना और भाजपा में स्मृति ईरानी का उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक नव प्रभुत्व अनायास नहीं है। सबके अपने-अपने निहितार्थ हैं।
यूजीसी विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय तक मौन रहकर प्रदेश की राजनीति में उफान मारती प्रतिकूलता साधने में सफल रहे। दिल्ली के जंतर-मंतर के आंदोलन की आग उत्तर प्रदेश में नहीं पसरी। चंदा चोरी की आग में भी योगी आदित्यनाथ की शासकीय छवि नहीं झुलसी।
युवाओं की बड़ी संख्या वाले उत्तर प्रदेश में जेन-जी का आंदोलन भले ही जोर न पकड़ा हो, पर योगी सरकार का वर्तमान फोकस ‘कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व’ वाले पारंपरिक भाजपा नैरेटिव से आगे बढ़कर लाभार्थी, जेन-जी को संबोधित रोजगार के अवसर और महिलाओं के बीच भरोसे की ओर बढ़ता दिख रहा है।
छह माह में एक लाख युवाओं को नौकरी देने का खांचा तो अभी अस्पष्ट है, पर यह तय है कि जेन-जी को संतुष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप नियुक्ति पत्र बांटने के शिविर लगाने ही होंगे।
2027 में भाजपा के सामने मुख्य चुनौती केवल अपने समर्थक आधार को बनाए रखना नहीं, बल्कि महिलाओं, युवाओं और पहली बार के युवा मतदाताओं में सरकार के प्रति भरोसे को बनाए रखना होगी।
अपने-अपने आधार वोटों की ‘रक्षा’ और उनको अपने सापेक्ष ‘बंधन’ में कसे रखना ही 2027 के विधान सभा चुनाव की अग्निपरीक्षा में सफल होने का मंत्र होगा, यह भाजपा भी जानती है और मुख्य प्रतिद्वंद्वी सपा भी। एक ओर दस साल के शासन के प्रति उपजा विक्षोभ भाजपा के लिए चुनौती हो सकती है, तो दूसरी ओर लाभार्थी समूह के बीच पैठ उसकी शक्ति।
यही कारण है कि 2027 के चुनाव में युवाओं और रोजगार का मुद्दा सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियों में से एक रहेगा। इसलिए युवा आयोग का गठन और नौकरी आएगी कहने की जगह छह माह में एक लाख नौकरी की निश्चित संख्या और समयसीमा चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
पचास हजार पढ़ाकू बेटियों को स्कूटर बांटने, मिड-डे-मील की रसोइयों का मानदेय बढ़ा देने, सेविका-सहायिका की पगार बढ़ाने, साठ साल उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा जैसी घोषणाओं के सापेक्ष अखिलेश यादव भी महिलाओं को 40 हजार एकमुश्त देने, टैबलेट बांटने और आंगनबाड़ी में काम करने वालों की पगार तीन गुना कर देने के आश्वासन में नहीं चूकते हैं।
सपा सरकार बनने पर गरीबों को बिना किसी कार्ड के अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराने का ताजा वादा भी करते हैं। चुनाव भले चंद माह दूर है, पर घोषणा पत्र के नए-नए पन्ने रोज दलों की ओर से लिखे-भरे जा रहे हैं।
नोएडा में जब श्रमिक आंदोलन जोर पकड़ा, उपद्रव बढ़ा तो सरकार ने कानूनी सख्ती के साथ श्रमिक हित की भी चिंता की। यह कड़ी बढ़ रही है। अब नई घोषणा श्रमिकों को पांच से दस रुपये में भरपेट भोजन उनके शहर में कराने की है। लगभग पौने दो करोड़ पंजीकृत मजूदरों की संख्या वाले प्रदेश में इस योजना के अभी घोषित होने के सीधे राजनीतिक निहितार्थ हैं।
भाजपा के लिए महिला मतदाता पहले से महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए स्कूटर जैसी दिखने वाली और सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजना का राजनीतिक असर नकद सहायता से इसलिए अलग हो सकता है, चूंकि यह कहीं न कहीं लड़कियों को स्वयं के प्रति भरोसा जगाने का उपकरण भी है।
बेटियों को साधने के साथ ही बुजुर्ग महिला वोटरों को मुफ्त यात्रा का लाभ केवल आर्थिक राहत नहीं है। अयोध्या, मथुरा, काशी और दूसरे धार्मिक स्थलों तक जाने की सुविधा को भी इसके सामाजिक, भावनात्मक राजनीतिक प्रभाव से जोड़ा जा सकता है।
सरकार का जोर केवल सरकारी नौकरी पर नहीं बल्कि स्टार्टअप और उद्यमिता पर भी है। भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि युवा केवल सरकारी नौकरी के पीछे न रहें। प्रांतीय रक्षा दल के जवानों को चिकित्सा सुविधा, स्कूल-कालेज के शिक्षकों और शिक्षामित्रों को हेल्थ कार्ड व उनका बढ़ा मानदेय जैसे बंधन पहले ही बांधे गए हैं। राजनीति में ‘चवन्नी’ उछल रही है।
परिवार में पांच सांसदों के मजबूत गठजोड़ का अखिलेश का गर्व और योगी आदित्यनाथ की ओर से इस गर्व को जनता पार्टी जैसा हश्र हो जाने की जिद्दी भविष्यवाणी के बीच जो तय है, वह यह कि यूपी की सियासी जमीन पर पाशा उछालने की गति और तेज होगी।
- भारतीय बसंत कुमार: वरिष्ठ समाचार संपादक, उत्तर प्रदेश
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