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सवर्ण नहीं, दलितों के मुद्दे पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव? क्या कहते हैं आंकड़े

सवर्ण नहीं, दलितों के मुद्दे पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव? क्या कहते हैं आंकड़े उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी, समाजवादी और कांग्रेस सभी दलित और अति पिछड़ा वोट बैंक पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदेश में करीब 21 फीसदी…

Hindustan के अनुसार26 सितंबर 2026 को 01:04 am बजे
सवर्ण नहीं, दलितों के मुद्दे पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव? क्या कहते हैं आंकड़े

सौजन्य से:- Hindustan

सवर्ण नहीं, दलितों के मुद्दे पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव? क्या कहते हैं आंकड़े

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी, समाजवादी और कांग्रेस सभी दलित और अति पिछड़ा वोट बैंक पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदेश में करीब 21 फीसदी दलित मतदाता हैं और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सभी अपनी-अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाते हुए राजनीतिक दांव-पेंच लगा रहे हैं।

हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव में सबकी नजर दलित और अति पिछड़ा वोट बैंक पर है। प्रदेश में करीब 21 फीसदी दलित मतदाता हैं और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं। ऐसे में दलित मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सपा जहां ‘लाल’ से ‘नीले’ रंग की तरफ बढ़ रही है, वहीं चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश का प्रभारी बनाकर दलित मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की है।

बसपा के प्रति कम हुआ भरोसा?

कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि बसपा के प्रति दलित मतदाताओं का भरोसा कम हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को 65 फीसदी दलित वोट मिला था। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 44 प्रतिशत रह गया। पिछले दो वर्षों में बसपा के प्रति दलित मतदाताओं का भरोसा और कमजोर हुआ है। आरक्षण के खिलाफ सवर्ण समाज में उठती आवाज और आरक्षित सीट पर नियुक्तियां नहीं करने के विपक्ष के आरोप सहित कई अन्य मुद्दों पर दलित भाजपा के साथ बहुत सहज नहीं है। कांग्रेस और सपा इसमें अपना सियासी फायदा तलाश कर रही हैं।

बीजेपी का भी दलित समर्थन बढ़ा

लोकनीति सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा के प्रति भी दलित समर्थन बढ़ा है। यूपी विधानसभा में जहां भाजपा को 21 प्रतिशत दलित वोट मिला वहीं, लोकसभा में यह बढ़कर 24 फीसदी हो गया। दलित मतों में विभाजन का सीधा नुकसान बसपा को हुआ।

पश्चिमी यूपी में दलित मतदाता

अलीगढ़ -21.40%

आगरा- 21.78%

बिजनौर- 20.94%

सहारनपुर- 20.73%

मेरठ- 18.44%

बुलंदशहर- 20.21%

गाजियाबाद- 18.42%

मुरादाबाद- 15.86%

मुजफ्फरनगर- 13.50%

रामपुर- 13.38%

बरेली- 12.65%

बागपत- 11%

गठबंधन से कांग्रेस और सपा को फायदा

दलित, अति पिछड़ा मतदाता सपा पर अकेले भरोसा करने के बजाय कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन पर ज्यादा यकीन करता है। यूपी से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस और सपा गठबंधन में चुनाव लड़ते हैं, तो 2024 की तरह 2027 में भी दलित गठबंधन को वोट करेंगे। अति पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस के साथ गठबंधन में सपा की तरफ लौट सकता है।

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