यूपी: प्रदेश की राजनीति में एक नए दलित चेहरे की एंट्री, विदेश से लौटीं रोहिणी घावरी की निगाह चन्द्रशेखर के वोट बैंक पर
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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यूपी: प्रदेश की राजनीति में एक नए दलित चेहरे की एंट्री, रोहिणी घावरी की निगाह चन्द्रशेखर के वोट बैंक पर
Mon, 14 Sep 2026 06:06 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 14 Sep 2026 06:06 AM IST
सार
Rohini Ghavri: यूपी की राजनीति में नए दलित चेहरे की एंट्री हो रही है। स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद रोहिणी घावरी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने की तैयारी में हैं।
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विस्तार
यूपी की दलित राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक मोर्चा बनता दिख रहा है। स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद रोहिणी घावरी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने की तैयारी में हैं। उनका मुख्य फोकस वाल्मीकि समाज को एकजुट करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन 21 विधानसभा सीटों पर है, जहां वाल्मीकि मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। इन इलाकों में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर का भी प्रभाव माना जाता है।
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रोहिणी वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए इन क्षेत्रों में अभियान चलाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि वाल्मीकि समाज को लंबे समय से मुख्य रूप से सफाईकर्मी के तौर पर देखा गया, जबकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही है। वह अगले पांच साल में किसी राज्य में वाल्मीकि समाज से मुख्यमंत्री बनाए जाने का लक्ष्य भी सामने रख रही हैं।
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उनकी नजर आगरा कैंट, एत्मादपुर, जसराना, फिरोजाबाद, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, गाजियाबाद, लोनी, लखनऊ की मध्य, उत्तर और पश्चिम विधानसभा सीटों के अलावा सीसामऊ, आर्यनगर, किदवईनगर, अलीगढ़ और खैर समेत 21 सीटों पर है। इन सीटों पर वह जाटव और वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठाने की तैयारी में हैं।
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कई जिलों का दौरा करेंगी रोहिणी
रोहिणी 13 सितंबर को मेरठ पहुंचेंगी। इसके बाद 14 और 15 सितंबर को लखनऊ में वाल्मीकि समाज के लोगों से मुलाकात करेंगी। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात की भी संभावना है। रोहिणी का दावा है कि चंद्रशेखर के खिलाफ उनकी लड़ाई में अखिलेश ने सहयोग का भरोसा दिया है। ऐसे में सपा से नजदीकी बढ़ती है और पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारती है तो पश्चिमी यूपी में दलित वोटों के नए समीकरण बन सकते हैं।
रोहिणी ने चंद्रशेखर पर शादी का वादा कर शोषण करने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आर्थिक मदद करने के बावजूद सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर ने उनसे संबंध तोड़ लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाल्मीकि समाज से होने के कारण उनकी शिकायत पर एफआईआर नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।
दलित राजनीति में अब तक जाटव मतदाताओं का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में वाल्मीकि समाज को अलग राजनीतिक ताकत के तौर पर लामबंद करने की कोशिश 2027 के चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर नए समीकरण पैदा कर सकती है। रोहिणी सर्वसमाज को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात भी कह रही हैं।
रोहिणी ने चंद्रशेखर पर शादी का वादा कर शोषण करने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आर्थिक मदद करने के बावजूद सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर ने उनसे संबंध तोड़ लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाल्मीकि समाज से होने के कारण उनकी शिकायत पर एफआईआर नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।
दलित राजनीति में अब तक जाटव मतदाताओं का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में वाल्मीकि समाज को अलग राजनीतिक ताकत के तौर पर लामबंद करने की कोशिश 2027 के चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर नए समीकरण पैदा कर सकती है। रोहिणी सर्वसमाज को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात भी कह रही हैं।
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