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पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, रोड रेज केस में यूपी पुलिस की कार्रवाई पर रोक

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने क्या कहा चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को संबंधित एफआईआर की प्रति उन्हें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि एफआईआर क…

Navbharat Times के अनुसार25 अगस्त 2026 को 09:55 am बजे
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, रोड रेज केस में यूपी पुलिस की कार्रवाई पर रोक

सौजन्य से:- Navbharat Times

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने क्या कहा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को संबंधित एफआईआर की प्रति उन्हें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि एफआईआर की प्रति मिलने के बाद पत्रकार उचित राहत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात सितंबर की तारीख तय की और गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराने संबंधी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने कहा कि उनके मुवक्किल का अक्षम्य अपराध यह था कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित घोटाले को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अभिषेक उपाध्याय ने कई अन्य मामलों में भी खोजी रिपोर्टिंग की है। प्रदीप राय ने एफआईआर को पूरी तरह आधारहीन बताते हुए निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज आरोपों की वास्तविकता सामने ला सकता है और इसे सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए।इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि बार-बार एफआईआर दर्ज होने की आशंका को अदालत समझती है। उन्होंने कहा कि पत्रकार हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं और यदि एफआईआर रद्द करने का मामला बनता है तो वहां उचित राहत मिल सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट अंतरिम संरक्षण दे रहा है।

रोड रेज मामले में दर्ज हुई एफआईआर

इंदिरापुरम थाने में 18 अगस्त को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि शिप्रा मॉल के पास एक बाइक को बलेनो कार ने टक्कर मारी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार ड्राइवर ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी दी। एफआईआर में अभिषेक उपाध्याय को कार से जोड़ते हुए आरोपी बनाया गया है। उपाध्याय ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि 18 अगस्त को बेटी को स्कूल से लेकर लौटते समय शिप्रा मॉल के पास एक बाइक सवार उनकी कार के पास आया और हंगामा करने लगा।अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक, न तो कोई टक्कर हुई और न ही कोई शारीरिक विवाद हुआ तथा बेटी के साथ होने के कारण वह वहां से चले गए। उन्होंने एफआईआर में बाइक के नंबर को लेकर भी विसंगति का दावा किया है। उनके अनुसार, एफआईआर में स्प्लेंडर बाइक का उल्लेख है, जबकि दर्ज नंबर किसी दूसरी बाइक का है।

सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ का आरोप

याचिका में उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने घटनास्थल के आसपास की दुकानों पर जाकर दुकानदारों पर सीसीटीवी फुटेज मिटाने या उपलब्ध नहीं कराने का दबाव बनाया। उन्होंने सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका के अनुसार, 20 अगस्त की रात करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, जबकि वह वहां मौजूद नहीं थे। उस समय उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर थीं। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई की आशंका हुई।अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की है। वैकल्पिक तौर पर उन्होंने यूपी पुलिस के बजाय सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी वैध जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

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