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यूपी समेत चुनावी राज्यों में SSR का आदेश दे सकता है चुनाव आयोग, इस बात से खफा थे 2 आयुक्त

यूपी समेत चुनावी राज्यों में SSR का आदेश दे सकता है चुनाव आयोग, इस बात से खफा थे 2 आयुक्त चुनाव आयोग अक्टूबर में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की वोटर लिस्ट का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण करा सकता है। 1 जन…

Hindustan के अनुसार25 सितंबर 2026 को 07:04 am बजे
यूपी समेत चुनावी राज्यों में SSR का आदेश दे सकता है चुनाव आयोग, इस बात से खफा थे 2 आयुक्त

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी समेत चुनावी राज्यों में SSR का आदेश दे सकता है चुनाव आयोग, इस बात से खफा थे 2 आयुक्त

चुनाव आयोग अक्टूबर में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की वोटर लिस्ट का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण करा सकता है। 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जा सकता है। जानें EC की तैयारी और किन राज्यों में इसका असर होगा।

भारी विवाद के बीच चुनाव आयोग अगले महीने यानी अक्टूबर में चुनावी राज्यों की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दे सकता है। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जा सकता है।

हालांकि, इस साल पूरे देश में मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR कराने की संभावना नहीं है। इसकी एक वजह 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का तीसरा चरण है। इसके अलावा जनगणना की प्रक्रिया भी जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्त इस बात से खफा थे कि SSR की प्रक्रिया पहले से पूरे देश में क्यों नहीं कराई गई।

क्या होता है SIR और SSR?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची की ज्यादा व्यापक और गहन जांच की जाती है। इसमें मतदाताओं की पात्रता और सूची में दर्ज विवरणों का विस्तृत सत्यापन किया जाता है, ताकि पात्र लोगों के नाम शामिल किए जा सकें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जा सके। यानी SIR का फोकस मतदाता सूची की गहराई से जांच और शुद्धिकरण पर होता है।

वहीं SSR यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट और संशोधित किया जाता है। इसमें पात्र नए मतदाताओं को जोड़ने, गलतियों में सुधार और जरूरी बदलाव करने की प्रक्रिया होती है। आसान भाषा में कहें तो SIR में वोटर लिस्ट की गहन जांच होती है, जबकि SSR में मौजूदा सूची को अपडेट करने पर ज्यादा जोर रहता है।

किन राज्यों में हो सकता है वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण?

चुनाव आयोग अक्टूबर में इन राज्यों में SSR करा सकता है:

- उत्तर प्रदेश

- उत्तराखंड

- पंजाब

- गोवा

- मणिपुर

इन राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण किया जा सकता है। इसमें 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जाएगा।

देशभर में SSR कराने की संभावना कम

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि चुनाव आयोग के सदस्य एसएस संधू और विवेक जोशी ने 1 जनवरी 2025 के बाद देशव्यापी SSR नहीं कराए जाने पर आपत्ति जताई है। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि 2025 के अंत में करीब एक दर्जन राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही थी और बिहार में यह प्रक्रिया कुछ महीने पहले ही पूरी हुई थी। इसी बीच आयोग ने 2026 में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने वाले SIR के तीसरे चरण की योजना भी बनाई थी।

जनगणना की वजह से भी चुनौती

देशव्यापी SSR को लेकर आयोग को जनगणना की प्रक्रिया का भी ध्यान रखना होगा। जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित था। वहीं, दूसरा चरण लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में चल रहा है। अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में इसे हाल ही में आगे बढ़ाया गया था।

चुनाव से पहले मतदाता सूची में संशोधन क्यों?

चुनाव आयोग द्वारा चुनावी राज्यों में SSR जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 के तहत किया जाएगा। यह प्रावधान प्रत्येक चुनाव या उपचुनाव से पहले संबंधित अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का प्रावधान करता है।

चुनाव आयोग के अंदर भारी विवाद?

अंग्रेजी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी और पिछले कुछ महीनों में 14 बार निर्णय लेने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और उसके सभी आदेश ''पिछले एक वर्ष में आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।'' निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित फैसलों में आयोग के भीतर पूरी सहमति थी।

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