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'स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ पर मायावती की सलाह, SC आरक्षण पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए यूपी सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत लागू की गई करीब 91 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। इस पर बसपा नेता मायावती ने यूपी सरकार को नसीहत…

Navbharat Times के अनुसार18 सितंबर 2026 को 07:04 am बजे
'स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ पर मायावती की सलाह, SC आरक्षण पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए यूपी सरकार

सौजन्य से:- Navbharat Times

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत लागू की गई करीब 91 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। इस पर बसपा नेता मायावती ने यूपी सरकार को नसीहत दी है।

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने स्पेशल कम्पोनेन्ट के तहत उत्तर प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में अनूसूचित जाति (Scheduled Caste) के उम्मीदवारों को दाखिले में तय सीमा से अधिक आरक्षण देने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रोक लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार अदालत में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख सकी, इसलिए कोर्ट ने रोक लगा दी। उन्होंने यूपी सरकार को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है।

सरकार ने नहीं की पुरजोर पैरवी

बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि, बहुचर्चित सामाजिक न्याय की जरूरत व मांग यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में इस बात की पुरजोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण के लिए ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से जिला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, कन्नौज व जालौन में मेडिकल कालेज बनाए गए हैं। इनमें एससी वर्ग के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है। इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है। यदि यूपी सरकार इसकी मजबूत पैरवी करती तो शायद माननीय कोर्ट इस पर जरूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।

उन्होंने लिखा है कि, अब जब माननीय हाईकोर्ट ने इस पर पाबंदी लगा दी है और मेडिकल दाखिला भी अब इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपेक्षित राहत के लिए अपील करे, यही उचित होगा।

अत्यधिक आरक्षण वैधानिक ढांचे के खिलाफ

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी (NEET-UG) के जरिए एडमिशन के लिए स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (SCP) के अंतर्गत लागू करीब 91 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस अत्यधिक आरक्षण को वैधानिक ढांचे के खिलाफ माना है और राज्य सरकार को काउंसलिंग प्रक्रिया को सामान्य आरक्षण नियमों के तहत आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

एससी वर्ग के लिए सबसे अधिक कोटा

यूपी सरकार ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत फंडेड चार मेडिकल कॉलेजों, जो कि सहारनपुर, अंबेडकर नगर, कन्नौज और जालौन में बनाए गए हैं, में कुल आरक्षण की सीमा बढ़ाकर करीब 91.76 प्रतिशत कर दिया था। इसमें सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) के लिए ही 50 प्रतिशत से अधिक विशेष कोटा रखा गया था।

50 प्रतिशत अधिकतम आरक्षण की सीमा का उल्लंघन

सरकार के इस फैसले को नीट के अभ्यर्थी याचिकाकर्ताओं ने अदालत में चुनौती दी थी। यह सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने इस दलील को सही मानते हुए विशेष कोटे पर रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने काउंसलिंग को पूरी तरह रोकने के बजाय निर्देश दिया है कि इसे उत्तर प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू सामान्य आरक्षण, जो कि अनुसूचित जाति (SC) के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत है, के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाए।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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