सौभाग्य योजना: हर घर तक बिजली पहुंचाने में उत्तर प्रदेश बना मिसाल
2017 में शुरू हुई सौभाग्य योजना ने 2022 में बंद होने तक 2.86 करोड़ से ज्यादा भारतीय घरों तक बिजली पहुंचाई, जिसमें उत्तर प्रदेश ने किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा घरों को बिजली से जोड़ा. 2017 से पहले, भारत के…

सौजन्य से:- aajtak.in
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2017 में शुरू हुई सौभाग्य योजना ने 2022 में बंद होने तक 2.86 करोड़ से ज्यादा भारतीय घरों तक बिजली पहुंचाई, जिसमें उत्तर प्रदेश ने किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा घरों को बिजली से जोड़ा. 2017 से पहले, भारत के लाखों घरों में खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में बिजली का कनेक्शन ही नहीं था. प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, जिसे सौभाग्य के नाम से जाना जाता है, इसी आखिरी कड़ी के गैप को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से शुरू की गई थी.
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सौभाग्य योजना क्या है?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 25 सितंबर 2017 को घोषित किया था, जिसका मूल लक्ष्य दिसंबर 2018 तक पूरा करने का था (बाद में इसे मार्च 2019 तक बढ़ाया गया)
- 16,320 करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट रखा गया था.
- 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के तहत गरीब चिन्हित परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया गया, बाकी परिवार 500 रुपये में कनेक्शन ले सकते थे, जिसे किश्तों में चुकाया जा सकता था.
- हर कनेक्शन में नजदीकी पोल से सर्विस केबल, एनर्जी मीटर, LED बल्ब के साथ एक-लाइट-पॉइंट वायरिंग और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट शामिल था.
आंकड़े क्या कहते हैं?
- मार्च 2019 तक, सरकार के मुताबिक उस तारीख तक चिन्हित सभी "इच्छुक" बिजली-रहित परिवारों को कनेक्शन दिया जा चुका था.
- सात राज्यों - असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश - ने बाद में करीब 18-19 लाख अतिरिक्त परिवारों को जोड़ा, जिन्होंने शुरुआत में कनेक्शन लेने से इनकार किया था, लेकिन बाद में इच्छा जताई.
- यह योजना 31 मार्च 2022 को औपचारिक रूप से बंद हुई, जब तक कुल 2.86 करोड़ परिवारों को बिजली से जोड़ा जा चुका था, जिसके लिए 14,082 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुई थीं और 6,305 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया था.
उत्तर प्रदेश की भूमिका
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सौभाग्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश ने किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा घरों को बिजली से जोड़ा. 91.8 लाख से ज्यादा (91,80,000) कनेक्शन, जो बिहार (32.6 लाख), ओडिशा (24.5 लाख) और असम (23.3 लाख) से भी आगे है. चूंकि योजना शुरू होने के समय उत्तर प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा बिजली-रहित परिवार थे, यह आंकड़ा राज्य के सामने मौजूद चुनौती के पैमाने और उसे हल करने की रफ्तार, दोनों को दिखाता है.
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