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'मौसमी नेताओं से सावधान रहे मछुआरा समाज', यूपी के मंत्री संजय निषाद का मुकेश सहनी पर निशाना

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआरा समाज से कहा है कि वे वोटों की दलाली करने वालों से सावधान रहें। निषाद ने कहा है कि मछुआरा समुदाय से कहा है कि वे मौसमी नेताओं से सतर…

Navbharat Times के अनुसार14 सितंबर 2026 को 09:04 am बजे
'मौसमी नेताओं से सावधान रहे मछुआरा समाज', यूपी के मंत्री संजय निषाद का मुकेश सहनी पर निशाना

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआरा समाज से कहा है कि वे वोटों की दलाली करने वालों से सावधान रहें। निषाद ने कहा है कि मछुआरा समुदाय से कहा है कि वे मौसमी नेताओं से सतर्क रहें।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वोटों की खींचतान के लिए विपक्षी राजनीतिक दलों की रणनीतियों को लेकर चौकन्ने हो गए हैं। वे मछुआरा समुदाय, जो कि उनकी पार्टी की कोर वोटर है, को खोना नहीं चाहते हैं। उन्होंने चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच मछुआरा समाज से कहा है कि वे मौसमी नेताओं से सावधान रहें। संजय निषाद का इशारा बिहार की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी की ओर है।

संजय निषाद ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मछुआरा समुदाय को नसीहत दी है। उन्होंने इस पोस्ट में लिखा है कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है।

बिहार के बदनाम लोग यूपी में निषाद समाज को गुमराह कर रहे

संजय निषाद ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम लोग और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने निकले हैं।

लाल टोपी पहनकर निषाद समाज को राजनीति सिखाने चले

मंत्री निषाद ने कहा कि जो खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर उत्तर प्रदेश के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। यूपी के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।

समुदाय में भेद पैदा करने की कोशिश कर रहे

संजय निषाद ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण मछुआरा समुदाय का हक लुटता रहा। आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

संजय निषाद ने कहा कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और उसके वोटों का सौदा करने वालों को समाज पहचान ले। मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है।

मुकेश सहनी यूपी में सक्रिय

संजय निषाद का निशाना बिहार के विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी पर है। मुकेश सहनी मछुआरा समाज के नेता हैं। उनकी पार्टी बिहार में विपक्ष के महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) का हिस्सा है। पूर्व में मुंबई में बॉलीवुड में डिजाइनर रहे मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। वे यूपी के निषाद समाज को अपनी पार्टी के पक्ष में एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।

निषाद पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है VIP

मुकेश सहनी का दल वीआईपी यूपी के चुनाव में उतरकर मछुआरा समाज के वोट हासिल करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी समाज के अधिकारों को लेकर मुखर है और उसकी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सहनी लगातार रैलियां और जनसंपर्क के जरिए यूपी के निषाद बहुल्य इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश में जुटे हैं। यदि मुकेश सहनी की पार्टी यूपी के विधानसभा चुनाव में उतरती है तो इससे राज्य के मछुआरा समुदाय के वोट बंट सकते हैं। इससे संजय निषाद की निषाद पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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