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सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद गिराने पर तनाव: इकरा हसन हाउस अरेस्ट, यूपी पुलिस ने रोका तो भड़क गईं सपा सांसद

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद गिराने पर तनाव: सपा सांसद इकरा हाउस अरेस्ट, ध्वस्तीकरण पर मायावती ने कही ये बात सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही कलेक्ट्रेट परिसर के प…

Amar Ujala के अनुसार5 सितंबर 2026 को 06:31 am बजे
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद गिराने पर तनाव: इकरा हसन हाउस अरेस्ट, यूपी पुलिस ने रोका तो भड़क गईं सपा सांसद

सौजन्य से:- Amar Ujala

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद गिराने पर तनाव: सपा सांसद इकरा हाउस अरेस्ट, ध्वस्तीकरण पर मायावती ने कही ये बात

सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही कलेक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट सील किए गए हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को एंट्री नहीं दी गई है। वहीं, कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किया गया है। यूपी पुलिस ने इकरा को सहारनपुर जाने से रोक दिया है।

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विस्तार

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। वह सहारनपुर जाने के लिए निकल रहीं थीं। इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।

मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद के संबंध में शिकायत की थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई।

16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध करार देते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष की ओर से 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई।

जिला जज की अदालत में मामले की 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद दो सितंबर को अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।

'मस्जिदों को ध्वस्त करने का अभियान ठीक नहीं'

मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए अभियान पर तत्काल रोक लगाने और समस्या के समाधान के दूसरे उपाय तलाशने की अपील की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक और सेक्युलर सरकार का दायित्व है कि वह सभी धर्मों को मानने वाले लोगों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा करे। उन्होंने मस्जिदों को इस्लाम में इबादत और सामूहिक नमाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए भारतीय परंपरा के अनुसार उनके सम्मान को देश और व्यापक जनहित में जरूरी बताया।

मायावती ने अपने पोस्ट में बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए अभियुक्तों के मकान ध्वस्त करने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पूरे परिवार को सामूहिक रूप से सजा देकर बेघर कर दिया जाता है, जिससे लोग काफी विचलित हैं।

मायावती ने कहा कि ऐसे हालात में उनकी पार्टी की सरकार की तरह 'कानून द्वारा कानून का राज' वाला व्यवहार जरूरी है। उन्होंने सरकार के साथ-साथ न्यायालय से भी इस दिशा में समुचित ध्यान देने की अपील की।

मायावती ने अपनी पोस्ट के अंत में लोगों से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब सियासी और कानूनी विवाद में बदलता नजर आ रहा है। मस्जिद गिराए जाने के बाद कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तमाम दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया। उनके मुताबिक यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों का सवाल है।

इमरान मसूद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद 1911 से पहले की है और आज भी इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद की मिल्कियत वहीद खान और याकूब खान के नाम बताई गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन को तमाम जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई की गई।

बयान में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का भी जिक्र किया गया। नेता के मुताबिक आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 24 तारीख को इस मामले में स्टे हो गया था और करीब 22 दिन की अवधि अभी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि वक्फ को मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने वक्फ-ए-यूजर समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन पहलुओं की भी अनदेखी की गई।

बयान में जमीन के खसरा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया गया। इमरान मसूद ने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी आधार पर जमीन को लेकर प्रशासनिक निष्कर्ष निकाला गया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि रातों-रात पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। उनका दावा है कि लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसी दौरान मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर पार्टी के नेता और एमएलसी भी मौजूद थे और पूरी रात इलाके में स्थिति पर नजर रखते रहे।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जहां तक जरूरत होगी, वहां तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है।

बयान में उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल के गिराए जाने से किसी भी समुदाय के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे सहारनपुर के लोगों के लिए 'काला दिन' बताते हुए कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में यही कार्रवाई दूसरों के खिलाफ भी हो सकती है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए इस पर तत्काल रोक लगाने और समाधान के अन्य उपाय तलाशने की मांग की।

मायावती ने कहा कि संवैधानिक और सेक्युलर सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी धर्मों के मानने वालों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि मस्जिदें इस्लाम धर्म में इबादत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और भारतीय परंपरा के अनुरूप उनका सम्मान करना व्यापक जनहित में जरूरी है।

मकान गिराने की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

मायावती ने बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए किसी अभियुक्त का मकान ध्वस्त कर उसके पूरे परिवार को बेघर करने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोग विचलित हैं और कानून के मुताबिक कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार के साथ न्यायालय को भी इस दिशा में समुचित ध्यान देना चाहिए। साथ ही मायावती ने सभी लोगों से सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की।

शाहनवाज खान बोले-जब शहर सो रहा था, तब मस्जिद ध्वस्त कर दी

एमएलसी शाहनवाज खान ने कहा कि जब पूरा शहर सो रहा था, तब मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इतने साल पुरानी मस्जिद पर किसी को आपत्ति नहीं थी और अचानक एक फैसले में उसे अवैध बताया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी क्या जल्दी थी कि रात में ही कार्रवाई करनी पड़ी।

शाहनवाज खान ने कहा कि सभी को उच्च अदालत में जाने का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि रात में जिलाधिकारी की ओर से ध्वस्तीकरण नहीं किए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई की गई।

'2027 के चुनाव को देखते हुए कार्रवाई' का आरोप

एमएलसी शाहनवाज खान ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई 2027 के चुनाव को देखते हुए की जा रही है। उन्होंने शहर के बुद्धिजीवी लोगों से चुप न रहने और इस घटनाक्रम पर विचार करने की अपील की। हालांकि उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि मस्जिद की पैरवी करने वाले लोग मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे।

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