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रैकेट से वर्दी तक का सफर: जानें वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन स्टार रुद्राणी जायसवाल की कहानी - rudrani jaiswal varanasi badminton star joins up police

रैकेट से वर्दी तक का सफर: जानें वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन स्टार रुद्राणी जायसवाल की कहानी वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी रुद्राणी जायसवाल ने परिवार और सामाजिक चुनौतियों को पार कर अपना मुकाम बनाया है। व…

Jagran के अनुसार12 अगस्त 2026 को 11:18 am बजे
रैकेट से वर्दी तक का सफर: जानें वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन स्टार रुद्राणी जायसवाल की कहानी
 - rudrani jaiswal varanasi badminton star joins up police

सौजन्य से:- Jagran

रैकेट से वर्दी तक का सफर: जानें वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन स्टार रुद्राणी जायसवाल की कहानी

वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी रुद्राणी जायसवाल ने परिवार और सामाजिक चुनौतियों को पार कर अपना मुकाम बनाया है। वह अब उत्तर प्रदेश पुलिस में ...और पढ़ें

HighLights

- रुद्राणी जायसवाल: अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी, अब उत्तर प्रदेश पुलिस में।

- परिवार और चुनौतियों के बावजूद बैडमिंटन में बनाया मुकाम।

- महिला युगल में 91वीं विश्व रैंकिंग, देश का प्रतिनिधित्व।

अरुण कुमार मिश्र, वाराणसी। सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए कई बार अपने ही डर, परिस्थितियों और समाज के सोच से लड़ना पड़ता है। खासकर किसी लड़की के लिए खेल के मैदान में अपना मुकाम बनाना केवल प्रतिभा का सवाल नहीं होता। उसके सामने पढ़ाई, परिवार की चिंता, घर की जिम्मेदारियां, सुरक्षा, भविष्य और समाज के सवाल एक साथ खड़े होते हैं।

वाराणसी की रुद्राणी जायसवाल ने इन तमाम चुनौतियों के बीच अपने रैकेट को थामा और धीरे-धीरे उस मुकाम तक पहुंचीं, जहां आज उनकी पहचान एक अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश पुलिस की खिलाड़ी पुलिसकर्मी के रूप में है।

रुद्राणी ने वर्ष 2024 में ‘कुशल खिलाड़ी योजना’ यानी स्पोर्ट्स कोटा के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हासिल की। वर्तमान में उनकी तैनाती प्रयागराज में है। पुलिस की वर्दी मिलने के बाद भी उन्होंने खेल को नहीं छोड़ा। उनके लिए मैदान और नौकरी दोनों जिम्मेदारी हैं और दोनों को साथ लेकर वह आगे बढ़ रही हैं।

रुद्राणी की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में महिला युगल में 91वीं विश्व रैंकिंग शामिल है। वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के लिए उन्होंने कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पदक जीते हैं। वाराणसी की वह लगातार सात बार जिला चैंपियन भी रह चुकी हैं।

यह सफलता एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों का अभ्यास और त्याग है। एक लड़की के लिए खेल को गंभीरता से आगे बढ़ाना कई बार परिवार के सामने भी चुनौती बन जाता है। पढ़ाई छूटने का डर, प्रतियोगिताओं के लिए दूसरे शहरों में जाना, समय और सुरक्षा की चिंता तथा भविष्य को लेकर सवाल हर कदम पर परीक्षा होती है। इसके साथ घर और परिवार की जिम्मेदारियां भी होती हैं।

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रुद्राणी ने इन सबके बीच संतुलन बनाया और अपने खेल को अपनी पहचान बनने दिया। उनकी खेल यात्रा का एक यादगार पड़ाव 2018 में मुरादाबाद रहा, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के कपिल चौधरी के साथ सीनियर मिश्रित युगल का अपना पहला खिताब जीता। वर्षों बाद खेल ने ही उन्हें पुलिस की वर्दी तक पहुंचाया। हाल में 23 से 26 जुलाई 2026 तक मुरादाबाद में आयोजित पुलिस स्टेट टूर्नामेंट में रुद्राणी ने फिर अपनी प्रतिभा साबित की। उन्होंने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते।

रुद्राणी की कहानी उन बेटियों के लिए उम्मीद है, जिनके सामने परिस्थितियां रास्ता रोकती हैं। उन्होंने दिखाया कि बेटी को अवसर, भरोसा और अपनी मेहनत पर विश्वास मिल जाए तो वह परिवार का गौरव बनने के साथ देश का प्रतिनिधित्व भी कर सकती है। रुद्राणी की कहानी का संदेश साफ है मुश्किलें रास्ता रोक सकती हैं, मंजिल नहीं। सपने वही पूरे होते हैं, जिन्हें परिस्थितियों के सामने छोड़ा नहीं जाता।

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