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उत्तर प्रदेश में RLD के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा, कहा-खतरे में लोकतंत्र

उत्तर प्रदेश में RLD के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा, कहा-खतरे में लोकतंत्र भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Pu…

ETV Bharat के अनुसार7 अगस्त 2026 को 11:18 am बजे
उत्तर प्रदेश में RLD के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा, कहा-खतरे में लोकतंत्र

सौजन्य से:- ETV Bharat

उत्तर प्रदेश में RLD के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा, कहा-खतरे में लोकतंत्र

भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 7, 2026 at 3:45 PM IST

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व MLC डॉ. रामाशीष राय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से चौधरी जयंत सिंह को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है. उन्होंने RLD की प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया.

डॉ. राय ने अपने पत्र में कहा, "उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों का दौरा किया और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया, लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है.

धनबल और जातिवाद से लोकतंत्र खतरे में:

त्यागपत्र में डॉ. राय ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए लिखा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है. समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्षरत हैं और नौजवान बेरोजगारी व भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा से जनमानस में असंतोष जन्म ले रहा है.

डॉ. राय ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 'संपूर्ण क्रांति' के आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीति में धनबल के बढ़ते प्रभाव को लेकर जताई चिंताओं का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक "आज उनकी आशंकाएं काफी हद तक सत्य सिद्ध होती दिखाई दे रही हैं. राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता के स्थान पर आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है".

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