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प्रयागराज से सीएम योगी ने वकीलों को साधा: तीन घोषणाएं कीं, केशव बोले- चुनाव का मुकदमा वकीलों की अदालत में - Prayagraj (Allahabad) News

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Dainik Bhaskar के अनुसार15 सितंबर 2026 को 05:04 am बजे
प्रयागराज से सीएम योगी ने वकीलों को साधा:  तीन घोषणाएं कीं, केशव बोले- चुनाव का मुकदमा वकीलों की अदालत में - Prayagraj (Allahabad) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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प्रयागराज से सीएम योगी ने वकीलों को साधा:तीन घोषणाएं कीं, केशव बोले- चुनाव का मुकदमा वकीलों की अदालत में

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव की आहट का ऐहसास करा दिया। प्रदेश में वकीलों की संख्या लाखों में है। हाईकोर्ट के शहर प्रयागराज में वकीलों की संख्या 30 हजार के करीब है। ऐसे में उनके लिए बड़ा ऐलान यही से बनता था। सीएम ने सही जगह से सही दांव चल दिया। वकीलों को साधने के लिए सीएम ने तीन बड़ी घोषणाएं कर उनका दिल जीतने की कोशिश की।

कार्यक्रम भले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर के ग्राउंड पर हुआ हो लेकिन सीएम और डिप्टी सीएम ने 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर फोकस किया। सीएम का भाषण तो पॉलीटिकल कम रहा लेकिन डिप्टी सीएम तो चुनावी अंदाज में ही नजर आए। डिप्टी सीएम ने न्यायपालिका और सरकार की तारीफों के साथ 2027 के चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं की अदालत में अपना मुकदमा छोड़ने की बात कही। उन्होंने अधिवक्ताओं से 2027 के चुनाव में समर्थन भी मांगा।

अधिवक्ताओं के हित में की गई प्रमुख घोषणाएं: 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में नियमित प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस योजना से जोड़ा जाएगा। कल्याण निधि और सहायता राशि में वृद्धि: अधिवक्ता कल्याण निधि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया है। साथ ही दिवंगत अधिवक्ताओं के आश्रितों को मिलने वाली सहायता की पात्रता आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट: मुकदमों की मॉनिटरिंग और आधुनिक तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। विधि अधिकारियों के मानदेय में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि: जिला न्यायालयों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राज्य का पक्ष रखने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

चैंबरों के लिए अतिरिक्त बजट का भरोसा: नए चैंबरों में फर्नीचर व अन्य उपकरणों के लिए मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से आने वाले किसी भी प्रस्ताव पर सरकार द्वारा पूरा वित्तीय सहयोग दिया जाएगा। जनपदों में चैंबर निर्माण: कौशाम्बी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती सहित करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए बजट आवंटित किया गया है।

केशव बोले

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नए भवन की चाबी सौंपे जाने के ऐतिहासिक अवसर पर अधिवक्ताओं को बधाई देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास पूरे देश की न्यायिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि हर पाँच वर्ष में जनता की अदालत में जाते हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं से कहा, आप सबका मुकदमा लड़ते हैं, हम 2027 का मुकदमा आपकी अदालत में छोड़कर जा रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सरकार के अच्छे कार्यों को आपका समर्थन, न्याय और आशीर्वाद मिलेगा। प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए केशव मौर्य ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों पर था और जमीन पर 'गुंडाराज' चलता था। प्रयागराज इसका प्रमुख केंद्र बना हुआ था। आज योगी सरकार की नीति स्पष्ट है—निर्दोष को छेड़ा नहीं जाएगा और अपराधी को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार कानून बनाती है, लेकिन उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ता एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। न्याय व्यवस्था में प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि कानून सबके लिए समान हो, चाहे कोई गरीब हो या प्रभावशाली। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने बार और बेंच के आपसी तालमेल को न्याय वितरण प्रणाली की रीढ़ बताया है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि 'बार और बेंच' कोई प्रतिस्पर्धी संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे एक ही न्याय प्रणाली के दो आवश्यक घटक हैं। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि इस बार के प्रख्यात अधिवक्ताओं ने न केवल वकालत के पेशे में बल्कि सार्वजनिक जीवन और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने सामाजिक सुधारों और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि अधिवक्ताओं के सामूहिक ज्ञान ने संविधान को मजबूती दी है और आज भी उनके संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों की रक्षा करने के संकल्प के कारण ही संविधान जीवंत और गतिशील बना हुआ है। मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि हर समस्या का तुरंत समाधान संभव न हो, लेकिन न्यायपालिका हमेशा चिंताओं को समझकर उनका व्यावहारिक हल निकालने के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। हाल ही में बने अधिवक्ताओं के नए चैंबर्स और पार्किंग व्यवस्था इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा वातावरण तैयार करने की पहल है जहां अधिवक्ता गरिमा और दक्षता के साथ अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर सकें। न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सहयोग जरूरी मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों के पास विशिष्ट संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं। संवैधानिक स्वतंत्रता का अर्थ संस्थागत अलगाव नहीं है। व्यापक जनहित, त्वरित न्याय और बेहतर न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए संवैधानिक संस्थाओं के बीच परस्पर समन्वय और सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने पूरे प्रदेश में बनाए जा रहे एकीकृत अदालत परिसरों को इस सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि बार के युवा अधिवक्ता इस महान संस्था की धरोहर के भावी संरक्षक हैं। यह सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि युवा वकीलों को न केवल काम के बेहतर अवसर मिलें, बल्कि ऐसा माहौल भी मिले जहां उनकी पेशेवर उत्कृष्टता और नैतिक मूल्य फल-फूल सकें। वकीलों का इलाज सरकार कराएगी यूपी में 5 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड वकीलों का इलाज अब सरकार कराएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार शाम प्रयागराज में कहा- वकीलों को 5 लाख का कैशलेस इलाज मिलेगा।

उन्होंने 2 और भी बड़े ऐलान किए। कहा, 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर और उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा। 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक बढ़ोत्तरी की गई है।

सीएम शाम 4 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे थे। योगी ने कहा- अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए जो भी प्रस्ताव हाईकोर्ट की तरफ से आएगा, उसमें सरकार पूरा सहयोग करेगी।

इससे पहले अधिवक्ताओं ने जय श्रीराम का उद्घोष कर सीएम का स्वागत किया। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमित सिंह ‘सोनू’ ने पहले सीएम के पैर छुए, फिर दंडवत हो गए।

योगी के भाषण की 6 बड़ी बातें…

- आज मैं हाईकोर्ट के अंदर जब प्रवेश कर रहा था, तो यहां पर युवा अधिवक्ताओं के चेहरे की चमक को देखा। एक अलग ही चमक थी। जब ऐसी चमक युवाओं के चेहरे पर देखता हूं तो यह महसूस करता हूं कि भविष्य उज्जवल है।

- ये सच था कि 2017 से पहले हमारे सामने चुनौती केवल संसाधनों की नहीं थी, चुनौती व्यवस्था के दृष्टिकोण की भी थी। प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी। कानून व्यवस्था की भी चुनौती थी और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी चुनौती हम सभी के सामने थी।

- न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस होती है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। जब सरकार ने भर्ती प्रक्रिया शुरू की, तब पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता केवल 3 हजार थी। पुलिस के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं थीं।

- अब पुलिस ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ाकर 7 हजार पुलिसकर्मियों तक कर दी गई है। हर साल 7 हजार पुलिसकर्मियों को आधुनिक तरीके से प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

- अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का हिस्सा है। यह समाज की राय बनाने और लोगों के विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश की आजादी की लड़ाई, संविधान निर्माण, शासन-प्रशासन चलाने और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूत करने में अधिवक्ताओं का योगदान रहा है।

- राष्ट्र निर्माण के मौजूदा अभियान में भी अधिवक्ता समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन की कमान संभालने के बाद ही आजादी की लड़ाई को नई दिशा और मजबूती मिली।

3 तस्वीरें देखिए…

डिप्टी सीएम केशव बोले- निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं

केशव मौर्य ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानून बदले गए हैं। आज अपराधी कानून से डरता है और आम आदमी का कानून पर भरोसा बढ़ा है। सरकार की नीति साफ है कि निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं।

यूपी में 5.14 लाख रजिस्टर्ड वकील सीएम ने कार्यक्रम में अधिवक्ता कक्ष भवन की सांकेतिक चाबी एसोसिएशन को सौंपी। करीब 700 करोड़ से बनी 2400 चैंबर्स वाली बिल्डिंग का उद्घाटन 31 मई 2025 को हो चुका है। हालांकि अभी आवंटन नहीं हुआ। चाबी मिलने के बाद आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।

यूपी में इस समय 5 लाख 14 हजार 439 सक्रिय रजिस्टर्ड वकील हैं। यह जानकारी बीते दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकीलों की पृष्ठभूमि से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आई। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और पुलिस महानिदेशक की रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे पहले शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं और रसोइयों को 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा दे चुके हैं।

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