पश्चिम यूपी में 'चवन्नी' की चमक, अखिलेश यादव और सपा पर जातिगत बयानों को लेकर तगड़ा प्रहार
'सबको गाली, सबका अपमान...' पिछले कुछ अरसे में समाजवादी पार्टी के नेताओं की बदजुबानी के कई मामले सामने आए हैं। इसके खिलाफ जाटलैंड अब पोस्टरों से पट गया है। इन पर समाजवादी पार्टी के नेताओं के वे बयान हैं जिनमें उन्होंने अल…

सौजन्य से:- Navbharat Times
'सबको गाली, सबका अपमान...'
पिछले कुछ अरसे में समाजवादी पार्टी के नेताओं की बदजुबानी के कई मामले सामने आए हैं। इसके खिलाफ जाटलैंड अब पोस्टरों से पट गया है। इन पर समाजवादी पार्टी के नेताओं के वे बयान हैं जिनमें उन्होंने अलग-अलग जातीय समुदायों पर विवादित टिप्पणी की है। इन होर्डिंगों पर सबसे ऊपर लिखा है- 'सबको गाली, सबका अपमान, समाजयादव पार्टी की यही पहचान।' पोस्टर पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर है, जिसमें वे ठहाका लगाते हुए दिख रहे हैं। उनकी मुख मुद्रा कुछ ऐसी है जैसे वे किसी का मजाक उड़ा रहे हों।चवन्नी, ब्राह्मण, राजभर, निषाद और ठाकुर का जिक्र
मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, मोदीनगर और लखनऊ सहित अन्य शहरों में लगाए गए इन पोस्टरों में सपा प्रमुख अखिलेश के बयान 'जयंत चौधरी चवन्नी थे' का जिक्र है। इसमें सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का बयान 'ब्राह्मण, वेश्या की तरह' अंकित है। इसमें शिवपाल यादव का 'राजभर-निषाद नीच' वाला बयान है और 'ठाकुर-ब्राह्मण चोर हैं' वाले बयान का भी जिक्र किया गया है। पोस्टर में सबसे नीचे 'जातिवादी सपाई' लिखा गया है।यह पोस्टर मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (जाटलैंड) के शहरों और यूपी की राजधानी लखनऊ में लगाए गए हैं। सड़कों पर जगह-जगह लगे इन पोस्टरों के जरिए समाजवादी पार्टी पर करारा हमला किया गया है। पीडीए, यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बनाने वाले अखिलेश यादव और सपा को इन पोस्टरों के जरिए आईना दिखाने की कोशिश की गई है।
किसने लगाए पोस्टर और होर्डिंग?
इन पोस्टरों पर यह कहीं भी जिक्र नहीं है कि यह किस व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल ने लगवाए हैं, लेकिन इन्हें खास तौर जिन स्थानों पर लगाया गया है, उससे साफ संकेत यही मिल रहे हैं कि ये जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने लगवाए हैं। अखिलेश यादव ने 'चवन्नी को रुपया बनाने' वाला बयान देकर जयंत चौधरी को वह हथियार दे दिया है जिससे वे समाजवादी पार्टी पर हमलावर हो गए हैं। हाल ही में अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के लिए कहा था कि'चवन्नी से जिसे रुपया बना दिया, वे भी छोड़कर चले गए।' यह बात उन्होंने जयंत चौधरी के सपा का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल होने पर कही थी।'चवन्नी' और जाटों का स्वाभिमान
जयंत चौधरी ने इस बयान को जाटों के सम्मान से जोड़कर अखिलेश यादव पर जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावी जाट नेता जयंत चौधरी ने यह संदेश तेजी से फैलाया कि अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी के लिए जाट समुदाय के लोग 'चवन्नी' से अधिक कुछ नहीं हैं। चवन्नी, यानी 25 पैसा वह छोटा सिक्का है जो अब प्रचलन से बाहर हो चुका है। अखिलेश ने जयंत चौधरी को 'चवन्नी' कहकर ललकारा। जयंत ने इसे जाटों के स्वाभिमान पर चोट की तरह लिया।सहारनपुर में रैलियों से पहले आए पोस्टर
अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोस्टरों के जरिए राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) 'चवन्नी', यानी जाट ही नहीं, अन्य जातियों के लिए भी दिए गए बयानों को लेकर समाजवादी पार्टी को निशाना बना रही है। यह पोस्टर तब लगाए गए हैं जब आठ दिन बाद तीन सितंबर को सहारनपुर में जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली होने वाली है। इसके तीन दिन बाद सहारनपुर में ही छह सितंबर को अखिलेश यादव 'युवा योद्धा सम्मेलन' को संबोधित करने वाले हैं। आरएलडी और समाजवादी पार्टी की पश्चिमी यूपी की चुनावी लड़ाई सहारनपुर से शुरू होने वाली है। अखिलेश यादव 12 सितंबर को बुलंदशहर में भी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।पश्चिमी यूपी में इन रैलियों से पहले पोस्टर संग्राम शुरू हो गया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से कोई होर्डिंग या पोस्टर नहीं लगाए गए हैं, लेकिन संभव है जल्द ही सपा के पोस्टर भी लगे दिखाई दें। समाजवादी पार्टी युवा योद्धा सम्मेलनों के जरिए युवाओं पर डोरे डालने की कोशिश करने वाली है। आरएलडी जाटों को एकजुट करने के साथ सपा पर उसके कथित जातिवाद को लेकर निशाना बनाने वाली है।
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