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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड का PNC को मिला फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फिर भी उठ रहे सवाल - lucknow kanpur expressway quality doubts despite final certificate

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड का PNC को मिला फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फिर भी उठ रहे सवाल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड सेक्शन को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद, सड़क धंसने और जल निकासी में खा…

Jagran के अनुसार8 अगस्त 2026 को 08:18 pm बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड का PNC को मिला फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फिर भी उठ रहे सवाल
 - lucknow kanpur expressway quality doubts despite final certificate

सौजन्य से:- Jagran

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड का PNC को मिला फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फिर भी उठ रहे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड सेक्शन को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद, सड़क धंसने और जल निकासी में खामियों जैसे गंभीर गुणवत्ता संब ...और पढ़ें

HighLights

- फाइनल सर्टिफिकेट के बावजूद एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल।

- सड़क धंसने, ट्रक पलटने और ड्रेनेज में खामियां मिलीं।

- एनएचएआई ने ठेकेदार पीएनसी पर 18 करोड़ का जुर्माना लगाया।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड का अक्टूबर 2025 में प्रोविजनल और दो फरवरी 2026 को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट पीएनसी को मिल गया था। वहीं सवाल खड़ा होता है कि क्या फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट देते वक्त भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के जिम्मेदारों ने शर्तों का पालन नहीं किया था?

फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट तभी जारी किया जा सकता है जब ग्रीन फील्ड पर स्वतंत्र इंजीनियर या प्राधिकृत समिति द्वारा पूरे प्रोजेक्ट का भौतिक निरीक्षण कर लिया गया हो। सभी तकनीकी मानक व सुरक्षा जांच पूरी हो गई हो।

इसके अलावा निर्माण से जुड़ी सभी कमियां दूर कर दी गई हो। जैसे मुख्य मार्ग, सर्विस लेन, टोल प्लाजा, ड्रेनेज और साइनबोर्ड के साथ ही सड़क की गुणवत्ता, लोड बेयरिंग क्षमता और सड़क सुरक्षा मानकों की जांच सफलतापूर्वक पास होने के बाद, इसे जारी किया जाता है।

अगर यह पालन किया गया है तो एक्सप्रेसवे पर ट्रक कैसे पलटी, सड़क दर्जनों पर ग्रीन फील्ड पर कैसे धंसी और आईआईटी खड़गपुर की आई टीम को प्रारंभिक जांच में ड्रेनेज सिस्टम में खामी कैसे मिली?

ऐसे कई सवाल सर्टिफिकेट जारी करने वालों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बता दें कि एएनआई के अनुसार यह पीएनसी द्वारा जारी बयान में प्रोविजनल व फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट की तिथियों का उल्लेख है।

एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट को जुलाई 2025 में पूरा होना था। तमाम प्रयासों के बाद भी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इसे संचालित नहीं करवा पाया। परियोजना को पूरा करने के लिए अनुबंध के मुताबिक तीन माह का ग्रेस पीरियड (अक्टूबर 2025 तक) भी दिया गया।

इसके बाद भी पैकेज वन यानी सरोजनी नगर से बनी का काम नहीं हो पाया। इस दौरान पैकेज टू जो बनी से आजाद चौक तक (ग्रीन फील्ड) का काम जरूर पूरा हो गया। पैकेज वन को पूरा करते-करते 15 मई 2026 की तिथि आ गई।

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लोकार्पण 13 जुलाई 2026 को हुआ। तत्कालीन परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के मुताबिक पीएनसी ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में कई बार समय बढ़ाया, इसे देखते हुए छह करोड़ की पेनाल्टी पहली लगाई गई थी।

एनएचएआई को उम्मीद थी कि काम में सुधार होगा और समय पर प्रोजेक्ट पूरा होगा लेकिन ऐसा न हुआ। ऐसी स्थिति में दोबारा 12 करोड़ की पेनाल्टी लगानी पड़ी। कुल 18 करोड़ की पेनाल्टी लगाई गई।

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