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लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: धंसती रहीं PNC की बनाईं सड़कें, फाइलों में कैद होकर रह गए राइट्स के सुझाव - lucknow kanpur expressway constructed by pnc infratech agra poor road work

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: धंसती रहीं PNC की बनाईं सड़कें, फाइलों में कैद होकर रह गए राइट्स के सुझाव आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और न्यू दक्षिणी बाइपास के PNC इंफ्राटेक द्वारा निर्मित हिस्सों में घटिया निर्माण गुणवत्ता के कारण स…

Jagran के अनुसार7 अगस्त 2026 को 08:18 am बजे
लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: धंसती रहीं PNC की बनाईं सड़कें, फाइलों में कैद होकर रह गए राइट्स के सुझाव
 - lucknow kanpur expressway constructed by pnc infratech agra poor road work

सौजन्य से:- Jagran

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: धंसती रहीं PNC की बनाईं सड़कें, फाइलों में कैद होकर रह गए राइट्स के सुझाव

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और न्यू दक्षिणी बाइपास के PNC इंफ्राटेक द्वारा निर्मित हिस्सों में घटिया निर्माण गुणवत्ता के कारण सड़कें बार-बार धंस रही हैं। रा ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, आगरा। प्रदेश के दूसरे आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे के 56 किमी हिस्से के निर्माण की गुणवत्ता ठीक नहीं रही है। वर्ष 2016 में लोकार्पण के दो साल के भीतर एक्सप्रेसवे आठ बार धंसा है। रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम को अधूरा छोड़ दिया गया। वर्षा का पानी सीधे अंडरपास और किसानों के खेतों में भर रहा है। एक्सप्रेसवे के धंसने की जांच रेल इंडिया तकनीकी एवं आर्थिक सेवा (राइट्स) ने की थी।

राइट्स ने कई सुझाव उप्र एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अधिकारियों को दिए थे। राइट्स की रिपोर्ट ने पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के कार्यों की पोल खोल दी थी लेकिन यह सुझाव आज तक फाइलों में कैद होकर रह गए हैं।

कुछ यही स्थिति न्यू दक्षिणी बाइपास की है। एक्सप्रेसवे और बाइपास को लेकर कई शिकायतें हुई थीं। यूपीडा या फिर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने ठोस कार्रवाई नहीं की।

आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे

302 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे को पांच कंपनियों ने बनाया है। इसमें आगरा से फिरोजाबाद के 56 किमी हिस्से को पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा बनाया गया है। इस हिस्से में आधा दर्जन बड़े और 14 छोटे पुल, 15 वाहन अंडरपास और 20 पैदल अंडरपास बने हुए हैं। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण होना था लेकिन इसका निर्माण ठीक तरीके से नहीं किया गया।

21 नवंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। 36 माह में बनने वाला एक्सप्रेसवे 22 माह में बनकर तैयार हुआ था। जिस पर पीएनसी को 56 करोड़ रुपये का इंनसेंटिव मिला था। पांच साल तक कंपनी को देखभाल का जिम्मा मिला था। यह एक्सप्रेसवे अपनी पहली बरसात नहीं झेल सका था। आठ स्थलों पर रोड और सर्विस रोड धंस गई थी।

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इसकी शिकायतें यूपीडा अधिकारियों से हुई थीं। 30 और 31 जुलाई 2018 के मध्य सबसे अधिक बरसात हुई थी। इस दौरान भी छह से सात स्थलों पर छोड़ धंस गई थी। सबसे अधिक नुकसान किमी नंबर 14 की सर्विस रोड को हुआ था। 20 मीटर की रोड पानी में बह गई थी। रोड धंसने की जांच राइट्स से कराई गई थी। दो सप्ताह में राइट्स ने अपनी रिपोर्ट यूपीडा को भेज दी थी।

राइट्स की जांच में पाया गया कि वर्षा के पानी की निकासी के लिए मानकों से छोटे पाइप का प्रयोग किया गया है। यह 60 सेमी व्यास के हैं।पानी का बहाव अधिक तेज होने से रोड के नीचे कटाव हो गया। इसके बदले एक मीटर से अधिक व्यास वाले पाइप का प्रयोग करना चाहिए था। सर्विस रोड पर कच्ची ड्रेन का निर्माण किया गया है। उसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई भी पर्याप्त नहीं है।

यहां तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के कैच पिट को मानकों के अनुरूप नहीं बनाया गया है। उसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई ठीक नहीं मिली। इसी के चलते बरसात का पानी अंडरपास और खेतों में पहुंचने लगा था। राइट्स ने अपने सुझाव में कहा था कि सर्विस रोड के किनारे रिटेनिंग वाल की ऊंचाई को एक मीटर तक बढ़ाया जाए। क्षतिग्रस्त सर्विस रोड का दोबारा निर्माण किया जाए।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को ठीक तरीके से बनाया जाए। मानकों के अनुरूप पाइप लगाए जाएं। मानसून के दौरान एक्सप्रेसवे की चौकसी पर भी जोर दिया गया था। बाजिदपुर अंडरपास और नगर चंद्रा अंडरपास में पानी भर जाता है। सर्विस रोड धंसी पड़ी है। हार्वेस्टिंग सिस्टम टूटा पड़ा हुआ है।

न्यू दक्षिणी बाइपास

नेशनल हाईवे-19 को ग्वालियर रोड से जोड़ने के लिए वर्ष 2016 में न्यू दक्षिणी बाइपास का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया था। 32 किमी लंबी रोड के निर्माण में 450 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

इस रोड का लोकार्पण 10 दिसंबर 2016 को तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। यह रोड पहली बरसात नहीं झेल सकी। दो साल के भीतर दर्जनभर बार धंसी। एनएचएआइ अधिकारियों ने निरीक्षण किया और रिपोर्ट पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

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