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चुनाव से पहले अखिलेश ने बदला PDA का फॉर्मूला? समझें यूपी में ब्राह्मण वोटों का गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है. समाजवादी पार्टी ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी के दिग्गज नेता जनेश्वर म…

Aaj Tak News के अनुसार5 अगस्त 2026 को 08:18 pm बजे
चुनाव से पहले अखिलेश ने बदला PDA का फॉर्मूला? समझें यूपी में ब्राह्मण वोटों का गणित

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है. समाजवादी पार्टी ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी के दिग्गज नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में साफ संकेत दिया कि इस बार उसकी नजर BJP के कोर वोट बैंक पर है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या सपा 100 विधानसभा सीटों पर असर डालने वाले ब्राह्मण वोट में बंटवारा करा सकती है?

वहीं, कई लोग कहते हैं कि ये मुश्किल है. सामने भगवा वेशधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, संत समाज है, सनातन की बात करने वाली बीजेपी है और हिंदू-हिंदुत्व की सियासत हर बयान में दोहराई जाती है. परंपरागत रूप से दस में से आठ ब्राह्मण वोट बीजेपी को मिलते रहे हैं. ऐसे में सपा ब्राह्मण वोट की आहुति से सत्ता का हवन कर पाएगी?

इसी के जवाब में लखनऊ में पवन पांडेय, सनातन पांडेय, माता प्रसाद पांडेय, अभिषेक मिश्रा, करुणेश द्विवेदी समेत तमाम युवा ब्राह्मण नेताओं की मौजूदगी में अखिलेश यादव ने त्रिशूल उठाया. छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की जयंती पर प्रबुद्ध सम्मेलन हुआ, डमरू बजा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ हुआ. इन सबके बीच अखिलेश यादव ने पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक के रूप में गढ़े गए पीडीए के ‘पी’ का नया रूप बताया.

PDA की नई परिभाषा

अखिलेश ने कहा, 'लोग पीडीए की बात करते हैं. पीडीए की नई नई परिभाषा बनाते हैं. जबसे पीडीए से हारे हैं. तब से पीडीए की नई परिभाषा वो लोग बना रहे हैं. पीडीए में पीडी पंडित का ही शॉर्ट फॉर्म है जो लोग पीडीए की परिभाषा समय-समय पर अलग बनाते हैं. वो जान ले पीडी ही पंडित का शॉर्ट फॉर्म है. जितनी पीड़ा दोगे पीड़ा बढ़ाओगे. उतना ही पीडीए और मजबूत दिखाई देगा.

यूपी में ब्राह्माण वोटों का गणित

जिस ब्राह्मण वोट को साधने की कोशिश में समाजवादी पार्टी लगी है. उससे जुड़े कुछ तथ्य पहले नोट कर लीजिए. यूपी में ब्राह्मण वोट पर राजनीतिक इतिहास का पहला तथ्य ये है कि ब्राह्मण कांग्रेस का मुख्य वोट बैंक माना जाता था. यूपी में अब तक 6 मुख्यमंत्री ब्राह्मण रहे और सभी कांग्रेस पार्टी से थे ब्राह्मणों ने 23 साल तक यूपी पर राज किया. आजादी के बाद राम मंदिर आंदलोन तक ब्राह्मण ज्यादातर कांग्रेस के साथ रहा. यूपी में आखिरी ब्राह्मण सीएम कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी थे.

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यूपी में ब्राह्मण वोट पर राजनीतिक इतिहास का दूसरा तथ्य ये है कि राम मंदिर आंदोलन के बाद ब्राह्मण बीजेपी की तरफ आने लगे 6 दिसंबर 1992 के बाद गठबंधन की राजनीति शुरू हो गई, जिसकी वजह से ब्राह्मण वोट बंट गया. साल 2007 में कई सालों बाद पूर्ण बहुमत की सरकार जब मायावती की बनी तो इसका पूरा श्रेय ब्राह्मणों को गया.

तीसरा तथ्य ब्राह्मण वोटों का ये है कि 2007 से अब तक जिसके ब्राह्मण विधायक ज्यादा रहे हैं, यूपी में उसकी सत्ता रही है. साल 2007 में मायावती के बीएसपी के 41 ब्राह्मण विधायक बने. 2012 में समाजवादी पार्टी के 21 ब्राह्मण विधायक जीते थे. 2017 में बीजेपी के 58 ब्राह्मण विधायक जीते, जबकि 2022 में बीजेपी के 41 ब्राह्मण विधायक जीते हैं.

अखिलेश ने याद दिलाई कृष्ण-सुदामा की दोस्ती

इन्हीं सब तथ्यों के बीच जब अखिलेश यादव मुस्लिम, यादव और फिर पिछड़े वोट के कुछ हिस्से के साथ अब सवर्णों में सबसे बड़े वर्ग ब्राह्मण वोट को हासिल करना चाहते हैं. इसीलिए कृष्ण और सुदामा की दोस्ती तक याद कराते हैं.

अखिलेश ने कहा, 'भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती आज की नहीं है, बताओ कितने हजार साल पुरानी है, किस युग की है दोस्ती. कितने हजार साल पुरानी दोस्ती है. दोस्त हम लोग ऐसे भी होते हैं. परवाह नहीं करते, जिन्होंने महाभारत पढ़ी होगी. जिनको जानकारी होगी पौराणिक व्यवस्था का पता होगा. दुनिया में ऐसी दोस्ती कहीं और नहीं है. कृष्ण और सुदामा का दूसरा उदाहरण बता दो. समाजवादी पार्टी को जब भी मौका मिला है, हमने सम्मान देने का काम किया है.'

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डिप्टी सीएम का सपा पर पलटवार

उधर, समाजवादी पार्टी के इस सम्मेलन और रणनीति पर तीखा हमला बोलते हुए यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा की हालत 'सौ-सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली' जैसी है.

उन्होंने कहा कि जनता और चूहे इस बात पर कभी भरोसा नहीं करेंगे. पाठक ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में हमेशा गुंडागर्दी, अराजकता, दंगे, सर्व समाज का पतन और सनातन संस्कृति को ध्वस्त करने का काम हुआ है.

दिल्ली से लखनऊ तक घमासान

दूसरी ओर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद से लेकर यूपी विधानसभा तक सियासी घमासान जारी है. लखनऊ विधानसभा के बाहर विपक्षी विधायक हाथों में दानपात्र और तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करते दिखे. मंगलवार को सदन से बाहर निकाले गए सपा विधायक सचिन यादव बुधवार को विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए. सपा की नजर राम मंदिर विवाद और ब्राह्मण वोट बैंक को साधकर बीजेपी के हिंदू वोट में सेंध लगाने पर है.

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