वाराणसी में विपक्षी दलों का पैदल मार्च, प्रदर्शन; केंद्र और राज्य सरकार पर लगाए कई आरोप
वाराणसी में विपक्षी दलों का पैदल मार्च, प्रदर्शन; केंद्र और राज्य सरकार पर लगाए कई आरोप वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है. By ETV Bharat Uttar Prade…

सौजन्य से:- ETV Bharat
वाराणसी में विपक्षी दलों का पैदल मार्च, प्रदर्शन; केंद्र और राज्य सरकार पर लगाए कई आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 9:00 AM IST
वाराणसी: राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं-नेताओं की कथित व्यक्तिगत निगरानी और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के विरोध में प्रदर्शन किया गया. वाराणसी में कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, भाकपा (माले), राष्ट्रीय जनता दल और फॉरवर्ड ब्लॉक सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
विपक्षी दलों ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विरोध की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को घेरा. विभिन्न दलों के कार्यकर्ता वाराणसी कचहरी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के पास एकत्रित हुए. यहां से कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च के रूप में कचहरी पहुंचे.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध नहीं माना जा सकता और विपक्ष की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों का विरोध करने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार भी शामिल है. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है.
कार्यकर्ताओं के बैंक अकाउंट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वंश-वृक्ष, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतों पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई. नेताओं ने कहा कि किसी भी नागरिक की निजी जानकारी प्राप्त करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार, निर्धारित प्रक्रिया और जवाबदेही आवश्यक है.
मौखिक आदेशों या अस्पष्ट निर्देशों के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करना नागरिकों के निजता के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है. विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.
कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे विपक्ष को दुश्मन समझकर उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में सरकार स्थायी नहीं होती, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थायी होती हैं.
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