लखनऊ में सरकारी इमारतों का रियलिटी चेक: बिना फायर NOC के चल रहे दफ्तर और लोकबंधु अस्पताल
लखनऊ में सरकारी इमारतों का रियलिटी चेक: बिना फायर NOC के चल रहे दफ्तर और लोकबंधु अस्पताल लखनऊ के प्रमुख सरकारी भवनों और 300 बेड वाले लोकबंधु अस्पताल में ETV भारत ने फायर सेफ्टी का रियलिटी चेक किया. By ETV Bharat Uttar Pr…

सौजन्य से:- ETV Bharat
लखनऊ में सरकारी इमारतों का रियलिटी चेक: बिना फायर NOC के चल रहे दफ्तर और लोकबंधु अस्पताल
लखनऊ के प्रमुख सरकारी भवनों और 300 बेड वाले लोकबंधु अस्पताल में ETV भारत ने फायर सेफ्टी का रियलिटी चेक किया.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 8, 2026 at 11:20 PM IST
|Updated : September 8, 2026 at 11:26 PM IST
लखनऊ: राजधानी में आग की लपटें अब सिर्फ बाजारों और निजी इमारतों तक सीमित नहीं हैं. सरकारी दफ्तर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. पिछले दिनों खाद्य एवं रसद निदेशालय की बिल्डिंग में लगी आग ने एक बार फिर सरकारी भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जिस दफ्तर में कर्मचारी रोज काम करते हैं और सरकारी फाइलों के साथ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रखे जाते हैं, वहां आग से बचाव की व्यवस्था कितनी मजबूत है? यह जानने के लिए देखिए हमारे संवाददाता प्रशांत मिश्र की स्पेशल रिपोर्ट:
क्या सरकारी भवनों के पास फायर NOC है: क्या सरकारी भवनों के लिए Fire NOC लेना जरूरी है? आखिरी बार सरकारी बिल्डिंग का फायर ऑडिट कब हुआ और उसके क्या नियम हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आग लग जाए तो कर्मचारियों के साथ सरकारी रिकॉर्ड को बचाने के लिए इन भवनों में क्या इंतजाम हैं. खाद्य एवं रसद निदेशालय की आग को सिर्फ एक अग्निकांड मानकर छोड़ देना आसान है, लेकिन यह घटना सरकारी भवनों में फायर सेफ्टी की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है.
NOC होना सुरक्षा की गारंटी नहीं: आग लगने के बाद दमकल की गाड़ियां पहुंचकर आग बुझा सकती हैं, लेकिन आग लगने से रोकने के लिए भवन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना संबंधित विभाग और भवन प्रबंधन की जिम्मेदारी है. किसी भी भवन के लिए Fire NOC होना जरूरी है, लेकिन सिर्फ NOC मिल जाना सुरक्षा की गारंटी नहीं है. असली सवाल यह है कि NOC में तय किए गए सुरक्षा मानकों को भवन में लगातार बनाए रखा गया या नहीं. क्या भवन में लगे फायर एक्सटिंग्विशर चालू हालत में हैं?
फायर अलार्म और हाइड्रेंट सिस्टम की स्थिति क्या है: क्या हाइड्रेंट सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है? फायर अलार्म सक्रिय है या सिर्फ दीवार पर लगा हुआ है? आपातकालीन निकासी के रास्ते खुले हैं या वहां सामान रखा हुआ है? क्या कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की जानकारी और पर्याप्त ट्रेनिंग दी गई है?
ETV भारत ने किया सरकारी भवनों का रियल्टी चेक: यही वे सवाल हैं, जिनके जवाब खाद्य एवं रसद निदेशालय की आग के बाद सामने आने चाहिए. हमने सिर्फ कागजों और सरकारी दावों के आधार पर तस्वीर समझने के बजाय राजधानी लखनऊ की कुछ प्रमुख सरकारी इमारतों और 300 बेड वाले सरकारी लोकबंधु अस्पताल का रियलिटी चेक किया. लोकबंधु अस्पताल में पहले भी आग की घटनाएं हो चुकी हैं. इन भवनों में जाकर फायर सेफ्टी की जमीनी स्थिति जानने की कोशिश की गई.
जवाहर भवन और इंदिरा भवन में मिले फायर उपकरण: इसी सिलसिले में हमारी टीम जवाहर भवन, इंदिरा भवन और लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA के दफ्तर पहुंची. हमारी कोशिश थी कि कैमरे के जरिए देखा जाए कि इन भवनों में फायर एक्सटिंग्विशर कहां लगे हैं और हाइड्रेंट सिस्टम की स्थिति क्या है. साथ ही फायर अलार्म और दूसरे सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी तथा आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्तों की भी पड़ताल की गई. लखनऊ में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं के बीच ETV भारत की टीम ने राजधानी की इन प्रमुख सरकारी इमारतों और अस्पताल का रियलिटी चेक किया.
PWD के मुताबिक नियमित मेंटेनेंस की व्यवस्था: सबसे पहले हमारी टीम जवाहर भवन और इंदिरा भवन पहुंची. दोनों इमारतों में आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर समेत कई उपकरण पर्याप्त संख्या में लगे मिले. मौके पर मौजूद PWD के एक्सईएन अरविंद कुमार ने बताया कि दोनों भवनों में फायर सेफ्टी के लिए सालाना करीब 10-10 लाख रुपये का टेंडर किया गया है. ठेकेदारों के जरिए समय-समय पर उपकरणों का मेंटेनेंस कराया जाता है और मॉक ड्रिल के जरिए यह भी जांचा जाता है कि आपात स्थिति में उपकरण काम कर रहे हैं या नहीं.
चार कर्मचारियों की तैनाती, लेकिन NOC पर सवाल: फायर सेफ्टी का काम देख रहे गौरव मिश्रा ने बताया कि भवनों में लगे उपकरण चालू हालत में हैं और चार कर्मचारियों की तैनाती की गई है. किसी भी आपात स्थिति में ये कर्मचारी तत्काल फायर फाइटिंग शुरू कर सकते हैं. हालांकि, जब फायर NOC के दस्तावेज दिखाने की बात आई तो जिम्मेदार अधिकारी इसे मौके पर उपलब्ध नहीं करा सके. यानी उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन फायर NOC को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी.
LDA की बिल्डिंग में आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम: इसके बाद ETV भारत की टीम लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA पहुंची. राजधानी में बड़ी इमारतों के नक्शे पास करने में LDA की अहम भूमिका है और बड़ी इमारतों के लिए फायर NOC महत्वपूर्ण शर्त है. LDA की अपनी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के इंतजाम देखने पर आधुनिक उपकरण लगे मिले. यहां स्मोक डिटेक्टर, वॉटर फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम, हाइड्रेंट और पूरी बिल्डिंग में पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन मौजूद मिली.
LDA में दो शिफ्टों में कर्मचारी तैनात: LDA के फायर सेफ्टी वेंडर संजय तिवारी ने बताया कि यहां दो शिफ्टों में कर्मचारी तैनात रहते हैं. आग लगने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है. बिल्डिंग में फायर एग्जिट की व्यवस्था भी मौजूद है. हालांकि, यहां भी Fire NOC को लेकर सवाल खड़ा हुआ.
LDA ने फायर NOC के लिए किया है आवेदन: संजय तिवारी ने बताया कि Fire NOC के लिए आवेदन किया गया है और जल्द NOC मिलने की उम्मीद है. इसके बाद टीम 300 बेड वाले लोकबंधु अस्पताल पहुंची. इस अस्पताल में पहले भी आग की घटनाएं हो चुकी हैं. रियलिटी चेक के दौरान यहां फायर सेफ्टी के कई इंतजाम मौजूद मिले.
लोकबंधु अस्पताल में कई फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद: अस्पताल की पूरी बिल्डिंग में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और फायर एग्जिट की व्यवस्था मिली. लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सक अध्यक्ष विनय वर्मा ने बताया कि अस्पताल में आग से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं. कर्मचारियों को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जाती है. समय-समय पर मॉक ड्रिल भी कराई जाती है.
लोकबंधु अस्पताल के पास अभी फायर NOC नहीं: जब अस्पताल की Fire NOC के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर बताया कि अस्पताल के पास अभी Fire NOC नहीं है. इसके लिए आवेदन किया गया है और जल्द NOC मिलने की उम्मीद है. यानी अस्पताल में फायर सेफ्टी के कई उपकरण मौजूद होने के बावजूद NOC को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार और कर्मचारी मौजूद रहते हैं.
चीफ फायर अफसर ने क्या कहा: रियलिटी चेक के बाद ETV भारत की टीम ने चीफ फायर अफसर अंकुश मित्तल से बातचीत की. उन्होंने बताया कि अग्निशमन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर लोगों को अपनी इमारतों में फायर सेफ्टी के उपकरण लगाने के लिए जागरूक करता है. मानकों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस भी जारी किए जाते हैं. सरकारी और निजी दोनों तरह की इमारतों में फायर सेफ्टी को लेकर विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है.
सरकारी भवनों का भी होता है फायर सेफ्टी ऑडिट: अंकुश मित्तल के मुताबिक, खासतौर पर ऐसे सरकारी भवन, जहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है, वहां विभाग की टीम जाकर फायर सेफ्टी ऑडिट करती है. अगर निरीक्षण में फायर सेफ्टी के जरूरी उपकरण नहीं मिलते हैं तो संबंधित भवन को नोटिस देकर जरूरी संसाधन लगाने के निर्देश दिए जाते हैं. नोटिस का पालन नहीं होने पर रिमाइंडर भेजा जाता है. इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं होने पर आगे की कार्रवाई का प्रावधान है.
नियम तोड़ने पर कार्रवाई का प्रावधान: निजी क्षेत्र में कार्रवाई और भी आगे जा सकती है. अंकुश मित्तल के मुताबिक अस्पताल, स्कूल, औद्योगिक संस्थान और निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अगर फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करते हैं तो लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई का प्रावधान है. इसके बाद बिजली काटने की कार्रवाई भी की जा सकती है. सीलिंग का भी प्रावधान है, हालांकि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के तहत फिलहाल विभाग सीलिंग की कार्रवाई नहीं कर रहा है.
खाद्य एवं रसद निदेशालय की आग की वजह क्या थी: खाद्य एवं रसद निदेशालय में आग की शुरुआती वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही साफ होगा. लेकिन इस तरह की घटनाओं में बिजली की वायरिंग और इलेक्ट्रिकल पैनल भी अहम जांच बिंदु होते हैं. क्या भवन की वायरिंग पुरानी थी और आखिरी बार इसकी जांच कब हुई थी? क्या इलेक्ट्रिकल पैनल का नियमित मेंटेनेंस हुआ था और क्या इससे पहले किसी अधिकारी या कर्मचारी ने वायरिंग को लेकर शिकायत की थी?
शॉर्ट सर्किट हुआ तो इसकी वजह भी जांचना जरूरी: अगर आग शॉर्ट सर्किट से लगी तो यह भी जांच का विषय होगा कि शॉर्ट सर्किट क्यों हुआ. क्या उससे पहले कोई चेतावनी या तकनीकी खामी सामने आई थी? सरकारी दफ्तर में आग का नुकसान सिर्फ कंप्यूटर, फर्नीचर और उपकरणों तक सीमित नहीं होता. सबसे बड़ी चिंता सरकारी रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर होती है.
सरकारी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की चुनौती: यह पता लगाना भी जरूरी है कि आग में कितनी फाइलें और रिकॉर्ड प्रभावित हुए. इनमें से कितने दस्तावेज पूरी तरह नष्ट हुए और कितने रिकॉर्ड डिजिटल या दूसरी प्रतियों के जरिए सुरक्षित हैं. सरकारी कार्यालयों में महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की डिजिटल बैकअप व्यवस्था भी फायर सेफ्टी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जानी चाहिए. आग की स्थिति में जान-माल के साथ-साथ जरूरी सरकारी दस्तावेजों को बचाने की रणनीति भी पहले से तैयार होनी चाहिए.
व्यापारी नेता ने नियमों के पालन की मांग की: व्यापारी यूनियन के नेता संजय गुप्ता का कहना है कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में अभी भी ऐसे संस्थान हैं, जहां फायर सेफ्टी उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. उनके मुताबिक सरकार को इस मामले में गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और नियमों का कड़ाई से पालन कराना चाहिए. उनका कहना है कि जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी विभाग की नहीं है. जिस बिल्डिंग में लोग काम करते हैं और जहां कर्मचारी तथा आम लोग आते-जाते हैं, वहां जिम्मेदार व्यक्ति को खुद भी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.
सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, जमीनी सुरक्षा जरूरी: संजय गुप्ता के मुताबिक सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी करना मकसद नहीं होना चाहिए. कोशिश यह होनी चाहिए कि आग लगे ही नहीं और अगर आग लग जाए तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. राजधानी में संस्था चलाने वाले डॉ. साकेत चतुर्वेदी भी इसे गंभीर समस्या मानते हैं. उनका कहना है कि सरकारी और निजी दोनों तरह की इमारतों में नियमित फायर ऑडिट होना चाहिए.
सरकारी भवनों से निजी संस्थानों तक सवाल: डॉ. साकेत चतुर्वेदी का सवाल है कि जब सरकारी विभागों में ही कई जगह फायर उपकरण और Fire NOC को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो निजी संस्थानों से पूरी तरह नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है. हालांकि, उनका कहना है कि संस्थान चलाने वालों को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए. हर अस्पताल, स्कूल, कार्यालय और व्यावसायिक भवन में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण होने चाहिए. ताकि आग की स्थिति में कम से कम लोगों की जान बचाई जा सके.
बड़ा सवाल- क्या सिर्फ उपकरण पर्याप्त हैं: लखनऊ के इस रियलिटी चेक में कई सरकारी भवनों में फायर एक्सटिंग्विशर, हाइड्रेंट, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और फायर एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद मिलीं. लेकिन जवाहर भवन और इंदिरा भवन में Fire NOC के दस्तावेज मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जबकि LDA और लोकबंधु अस्पताल में NOC के लिए आवेदन किए जाने की बात सामने आई. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ फायर सेफ्टी उपकरण लगा देना पर्याप्त है या उनकी नियमित जांच, मेंटेनेंस, मॉक ड्रिल और वैध Fire NOC भी उतने ही जरूरी हैं. खाद्य एवं रसद निदेशालय की आग के बाद सरकारी भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की नियमित और पारदर्शी समीक्षा की जरूरत एक बार फिर सामने आई है.
लखनऊ में सरकारी भवनों की आग के मामले:
मई 2016: मंडी परिषद भवन में आग
राजधानी के विभूतिखंड स्थित मंडी परिषद भवन में आग ने कई मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया था. आग की वजह से कार्यालय में रखा सरकारी रिकॉर्ड और फाइलें भी प्रभावित हुईं थी. घटना के बाद यह सवाल उठा कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों वाले सरकारी भवन में आग से बचाव के इंतजाम कितने प्रभावी थे. इस हादसे में बड़ी जनहानि नहीं हुई थी.
मार्च 2017: भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कार्यालय में आग
अलीगंज स्थित भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के भवन में आग काफी ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई थी. आग सातवीं से नौवीं मंजिल तक फैलने के कारण दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. ऊंची इमारत में आग से निपटने और वहां मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे. इस घटना में भी किसी बड़ी जनहानि की नहीं हुई थी.
मार्च 2017: बापू भवन में आग
बापू भवन सचिवालय में आग लगने की घटना ने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े किए. आग भवन की एक मंजिल पर लगी और धुआं फैलने से कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई. दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया. घटना में सरकारी कामकाज और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आई थी.
जून 2017: वाणिज्य कर विभाग में आग
गोमतीनगर स्थित वाणिज्य कर विभाग के भवन में आग पांचवीं मंजिल तक पहुंच गई थी. कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकाला गया और दमकल की टीम ने काफी प्रयास के बाद आग को नियंत्रित किया. सरकारी रिकॉर्ड वाले इस भवन में आग लगने के बाद विद्युत व्यवस्था और फायर सेफ्टी इंतजामों की जांच की जरूरत महसूस हुई थी.
20 जुलाई 2026: जवाहर भवन में आग
राजधानी के बड़े सरकारी कार्यालय परिसरों में शामिल जवाहर भवन में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग कैंटीन वाले हिस्से से शुरू होने की बात सामने आई और देखते ही देखते धुआं पूरे इलाके में दिखाई देने लगा. भवन में मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकाला गया. आग से सरकारी कार्यालयों के कामकाज पर असर पड़ा और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। इस घटना में बड़ी जनहानि की सूचना नहीं थी.
17 अगस्त 2026: खाद्य एवं रसद निदेशालय में आग
सरकारी भवनों में आग की कड़ी में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय की घटना ने एक बार फिर फायर सेफ्टी पर सवाल खड़े किए. कार्यालय में आग लगने के बाद काफी धुआं और लपटें दिखाई दीं. दमकल की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया. शुरुआती तौर पर विद्युत गड़बड़ी की आशंका सामने आई, लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा. घटना में कोई जनहानि की सूचना नहीं मिली थी.
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