NLU प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की जांच शुरू: कुलपति, रजिस्ट्रार और चयन समिति 16 सितंबर को लखनऊ तलब - Prayagraj (Allahabad) News
- Hindi News - Local - Uttar pradesh - Prayagraj - NLU Prayagraj Recruitment Controversy | VC Registrar Summoned In Lucknow NLU प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की जांच शुरू:कुलपति, रजिस्ट्रार और चयन समिति 16 सितंब…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Prayagraj
- NLU Prayagraj Recruitment Controversy | VC Registrar Summoned In Lucknow
NLU प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की जांच शुरू:कुलपति, रजिस्ट्रार और चयन समिति 16 सितंबर को लखनऊ तलब
- कॉपी लिंक
डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 12 पदों पर हुई भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी तीन प्रमुख सचिवों की उच्चस्तरीय समिति ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक, साक्षात्कार कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों और एक्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों को लखनऊ बुलाया है।
सभी को भर्ती से जुड़े दस्तावेज और सबूत लेकर 16 सितंबर को सुबह 10:30 बजे समिति के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। शासन के इस आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में लिए गए फैसलों की पड़ताल शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति अनुभाग-1 के विशेष सचिव विजय कुमार ने यह आदेश जारी किया है।
भर्ती में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए समिति का गठन 3 सितंबर को हुआ था। जांच समिति में कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज अध्यक्ष हैं। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल और न्याय/विधि परामर्शी विभाग के प्रमुख सचिव उदय प्रताप सिंह इसके सदस्य हैं।
समिति को भर्ती के प्रशासनिक, शैक्षणिक और कानूनी पहलुओं की एक साथ जांच करनी है। शासन ने समिति को चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े सभी तथ्यों, कागजात और दस्तावेजों की जांच का अधिकार दिया है। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने 27 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय में 12 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती की मंजूरी दी थी। इसके बाद 6 मार्च को विज्ञापन जारी हुआ। इसमें 680 आवेदन आए और जांच के बाद 569 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।
साक्षात्कार 22 से 31 जुलाई तक हुए। विवाद तब बढ़ा जब 31 जुलाई को ही कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई गई और देर रात परिणाम घोषित कर दिया गया। चयन प्रक्रिया पर कार्य परिषद के दो सदस्यों ने आपत्ति जताई थी।
एपीआई और यूजीसी मानकों के पालन पर उठे सवाल
कार्य परिषद के सदस्यों की ओर से सवाल उठाया गया था कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप अभ्यर्थियों का एपीआई (एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर) क्यों नहीं बनाया गया। सदस्यों ने विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के एक पद पर हुई भर्ती का उदाहरण देते हुए भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
उनका कहना था कि वहां परीक्षा और इंटरव्यू समेत निर्धारित मानकों का पालन किया गया, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में अलग प्रक्रिया अपनाई गई। आपत्तियों के बावजूद कार्य परिषद में मतदान कराया गया। इसमें दो के मुकाबले चार मतों से भर्ती को वैध घोषित किया गया और इसके बाद रात करीब 10 बजे परिणाम जारी कर दिया गया।
बिना हस्ताक्षर के नियुक्ति पत्र से ज्वाइनिंग का भी आरोप
भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक और गंभीर सवाल चयनित अभ्यर्थियों को भेजे गए नियुक्ति पत्रों को लेकर उठा था। आरोप है कि परिणाम जारी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को रात में ईमेल के जरिए नियुक्ति पत्र भेजे गए, लेकिन इन पर रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर नहीं थे। अगले दिन अभ्यर्थियों को बुलाकर इन्हीं नियुक्ति पत्रों के आधार पर ज्वाइन कराया गया।
अब शासन की समिति इन सभी बिंदुओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि विज्ञापन जारी करने से लेकर आवेदनों की स्क्रीनिंग, अभ्यर्थियों के चयन, इंटरव्यू, कार्य परिषद के निर्णय और नियुक्ति तक विश्वविद्यालय अधिनियम, शासनादेश और यूजीसी के निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
16 सितंबर की बैठक में सामने आएंगे भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड
विशेष सचिव के आदेश में विश्वविद्यालय के कुलपति को निर्देश दिया गया है कि वह बैठक में संबंधित अभिलेखों के साथ उपस्थित हों और अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। रजिस्ट्रार, साक्षात्कार कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्य, एक्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा परीक्षा नियंत्रक को भी निर्धारित समय पर समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए सूचित किया गया है।
इससे अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण हो गया है। समिति के सामने विश्वविद्यालय प्रशासन और चयन प्रक्रिया से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी में भर्ती से संबंधित रिकॉर्ड रखे जाएंगे। इसके आधार पर समिति यह तय करेगी कि चयन प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
30 दिन में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट
शासन ने जांच समिति को 30 दिन की समयसीमा दी है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी आख्या और निष्कर्ष विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन एवं मुख्यमंत्री को प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लगाए गए कथित अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब दो वर्ष पहले शुरू हुए इस नए विश्वविद्यालय का स्थायी कैंपस अभी झलवा में निर्माणाधीन है। बीए एलएलबी के दो सत्रों में प्रवेश हो चुका है और तीसरे सत्र की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय की पहली बड़ी शिक्षक भर्ती विवाद में आने के बाद अब शासन स्तर की जांच पर विश्वविद्यालय प्रशासन और चयनित अभ्यर्थियों दोनों की नजर है।
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

लखनऊ में भारी बारिश के चलते स्कूल-कॉलेज बंद: भारी बारिश के चलते डीएम ने जारी किया आदेश, 2 दिनों से लगातार हो रही बरसात - Lucknow News

लखनऊ में थमने का नाम नहीं ले रही बारिश, टूटा 19 साल का रिकॉर्ड

कानपुर में 32 घंटे से लगातार बारिश जारी: 12वीं तक के स्कूल बंद; सितंबर में 45 साल बाद रिकॉर्ड टूटा, CSJMU में परीक्षा रद्द - Kanpur News


