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लखनऊ: वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत, हाईकोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार; दिए जांच के आदेश

लखनऊ: वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत, हाईकोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार; दिए जांच के आदेश लखनऊ में वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत पर हाईकोर्ट ने अफसरों को फटकार लगाई है। जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार से ऐसे मामलों…

Amar Ujala के अनुसार11 सितंबर 2026 को 08:04 pm बजे
लखनऊ: वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत, हाईकोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार; दिए जांच के आदेश

सौजन्य से:- Amar Ujala

लखनऊ: वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत, हाईकोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार; दिए जांच के आदेश

लखनऊ में वेंटिलेटर की कमी से नवजात की मौत पर हाईकोर्ट ने अफसरों को फटकार लगाई है। जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार से ऐसे मामलों को संभालने के लिए कार्ययोजना मांगी है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

विस्तार

सुल्तानपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से लखनऊ लाए गए नवजात की वेंटिलेटर न मिलने से मौत हो गई। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को अफसरों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश चिकित्सा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) को लापरवाही की जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही सरकार से ऐसे मामलों को संभालने की कार्ययोजना भी मांगी है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने नवजात शिशु की मृत्यु का मुद्दा उठाने वाली आशुतोष कुमार सिंह की जनहित याचिका (पीआईएल) पर शुक्रवार को यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने जन्म के बाद पता चली जन्मजात जटिलताओं के कारण नवजात को लखनऊ के बड़े अस्पतालों में वेंटिलेटर और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराए जा सकने के कारण मृत्यु के मामले पर गंभीर संज्ञान लिया था।

न्यायालय ने लखनऊ स्थित चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, केजीएमयू के कुलपति, राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक, संजय गांधी पीजीआई के निदेशक या उनके द्वारा नामित किसी जिम्मेदार डॉक्टर या अधिकारी तथा सुल्तानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 11 सितंबर को मामले की सुनवाई में शामिल होने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 अक्तूबर तय की है।

जिस अस्पताल में प्रसव, वहां विशेषज्ञ तक नहीं : कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सरकारी अस्पतालों का यही हाल है। सुल्तानपुर में तीन साल पहले मेडिकल कॉलेज खुला लेकिन वहां वेंटिलेटर और कोई बाल रोग सर्जन नहीं है जबकि प्रसव उसी अस्पताल में होते हैं। प्रसव होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें बाल रोग विशेषज्ञ या सर्जन की जरूरत हो लेकिन यहां ये सुविधाएं नहीं हैं। हमें नहीं पता कि प्रदेश के कितने मेडिकल कॉलेजों में यही हाल है।

लखनऊ में भटकता रहा परिवार, नहीं मिला इलाज

सुल्तानपुर के सरकारी स्वायत्त चिकित्सा महाविद्यालय में 25 जुलाई 2026 को नवजात के जन्म के बाद जन्मजात जटिलताओं के कारण जरूरी वेंटिलेटर और अन्य सेवाएं नहीं मिल सकीं। नवजात को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज करने में असमर्थता जता दी। नवजात को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया, लेकिन यहां भी बेड नहीं मिला। यहां से शिशु को पीजीआई ले जाया गया, लेकिन वहां भी बेड नहीं मिल सका। इसके चलते 24 घंटे के भीतर 26 जुलाई 2026 को नवजात की मृत्यु हो गई।

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