नेपाल की बाढ़ से यूपी में बढ़ी चिंता, गंडक में फिर बढ़ा पानी, सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट
नेपाल की बाढ़ से यूपी में बढ़ी चिंता, गंडक में फिर बढ़ा पानी, सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट नेपाल में बाढ़ के बीच गंडक नदी का जलप्रवाह एक बार फिर बढ़ने से महराजगंज और कुशीनगर में चिंता बढ़ गई है। वाल्मीकिनगर बैराज से डि…

सौजन्य से:- Hindustan
नेपाल की बाढ़ से यूपी में बढ़ी चिंता, गंडक में फिर बढ़ा पानी, सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट
नेपाल में बाढ़ के बीच गंडक नदी का जलप्रवाह एक बार फिर बढ़ने से महराजगंज और कुशीनगर में चिंता बढ़ गई है। वाल्मीकिनगर बैराज से डिस्चार्ज बढ़कर 1.02 लाख क्यूसेक पहुंच गया, जिससे संवेदनशील हिस्सों पर दबाव बढ़ गया है।
Nepal Flood: नेपाल में आई बाढ़ के तीसरे दिन गंडक नदी के जलस्तर में फिर से वृद्धि हो रही है। पानी का डिस्चार्ज बढ़ने से कुशीनगर में छितौनी बांध के संवेदनशील हिस्सों पर खतरा बढ़ गया है। तिब्बत सीमा पर शुक्रवार को प्राकृतिक झील टूटने से रात में अधिक पानी आने की आशंका में सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। प्रशासन की टीम लगातार निगरानी में जुटी है।
महराजगंज में गंडक नदी का जलस्तर गुरुवार शाम से स्थिर है, लेकिन नेपाल से आने वाले पानी को लेकर अभी भी खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को सुबह नारायणी गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बैराज पर जलस्तर घटकर 99800 क्यूसेक हो गया था। लेकिन शाम चार बजे मामूली बढ़त के साथ डिस्चार्ज 102100 क्यूसेक पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान 359.80 फुट से नीचे 350.60 फुट पर है। नेपाल से आने वाले पानी से जलस्तर कब अचानक बढ़ जाएगा, इसे लेकर ग्रामीण सशंकित हैं।
नारायणी नदी के बी. गैप बांध से सटे नेपाल के नरसही, बेलाटारी समेत एक दर्जन गांव, भारतीय क्षेत्र में निचलौल तहसील के भेड़िहारी, गेड़हवा, तिलवारी, कटान टोला सहित समीप के गांव तथा नदी पार के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा की तकरीबन 20 हजार की आबादी दहशत में है। रात में अधिक पानी आने की आशंका से सीमावर्ती गांवों में हाईअलर्ट है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, एसडीएम निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता ने बताया कि नारायणी का जलस्तर स्थिर है। अभी किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। जिले में नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। राहत की बात यह है कि जिले के साथ-साथ नेपाल सीमा से सटे सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कुशीनगर में नेपाल में आई बाढ़ के वक्त गंडक में डिस्चार्ज बढ़कर करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पहुंच गया था। अगले दिन गुरुवार को डिस्चार्ज घटने से खड्डा रेता क्षेत्र में बाढ़ का खतरा टल गया था। शुक्रवार को नदी का डिस्चार्ज फिर बढ़ने लगा। गुरुवार के 88 हजार क्यूसेक के सापेक्ष शुक्रवार को डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 2 हजार क्यूसेक हो गया। इसका असर यह है कि नदी छितौनी बांध के भेडियारी ठोकर नम्बर तीन के समीप दबाव बना रही है। बांध के संवेदनशील प्वाइंट्स पर खतरा बढ़ गया है। हालांकि, बाढ़ खंड विभाग का दावा है कि इतने डिस्चार्ज से बाढ़ का खतरा नहीं है।
बाढ़ में बहकर तीन और लाशें आईं
नेपाल से बाढ़ में बहकर आईं तीन और लाशें शुक्रवार को गंडक नदी से बरामद हुईं। कुशीनगर जिले के खड्डा इलाके में दो महिलाओं और एक पुरुष का शव पाया गया। प्रशासन ने एसडीआरएफ की मदद से शवों को निकलवाकर सुरक्षित मोर्चरी में रखवा दिया है। गुरुवार को भी तीन लाशें मिली थीं, जिन्हें मोर्चरी में रखवाया गया है। सभी छह शवों के बारे में नेपाल प्रशासन को जानकारी दे दी गई है। जिले की मोर्चरी के फ्रीजर में छह लाशें रखे जाने की ही जगह है। फ्रीजर फुल हो गया है।
सीएचसी बना शरणालय, NDRF-SDRF मुस्तैद
गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि को लेकर अभी भी डर बना हुआ है। महराजगंज प्रशासन की ओर से सोहगीबरवा सीएचसी को बाढ़ शरणालय बनाया गया है। बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैद हैं।
जान जोखिम में डाल लकड़ियां निकाल रहे लोग
नेपाल से नदी में लकड़ी के साथ अन्य सामान बहकर आने से सिलसिला अभी थमा नहीं है। कुशीनगर जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की थी कि तेज बहाव वाली नदी में बह रहे सामानों के चक्कर में न जाएं। पुलिस और होमगार्ड जवानों को लगाकर ऐसे लोगों को सख्ती से रोकने के आदेश दिए गए थे ताकि किसी की जान को खतरा न हो। शुक्रवार को खड्डा व छितौनी इलाके में इस अपील का कोई असर नहीं दिखा। तटबंध के आसपास गांव के लोग नदी में कह रही लकड़ियों और अन्य सामानों को पकड़ने के लिए अब भी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
बानगंगा नदी बैराज पर अलर्ट, नेपाल जाने की मनाही
नेपाल की बाढ़ का जिले की नदियों पर कोई असर नहीं हुआ था, लेकिन शुक्रवार को तिब्बत सीमा पर एक प्राकृतिक झील टूटने से सिद्धार्थनगर में बानगंगा नदी पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ड्रेनेज खण्ड पल-पल की निगरानी में लगा हुआ है। इसके साथ ही भारतीय क्षेत्र के आमजनों और तीर्थयात्रियों को सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल नेपाल जाने से मना कर रही हैं।
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