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सीएम योगी के मझौलीराज दौरे से पहले विपक्षी नेता नजरबंद: माकपा ने बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन - Nadouli(Salempur) News

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Dainik Bhaskar के अनुसार29 अगस्त 2026 को 02:31 pm बजे
सीएम योगी के मझौलीराज दौरे से पहले विपक्षी नेता नजरबंद:  माकपा ने बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन - Nadouli(Salempur) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सीएम योगी के मझौलीराज दौरे से पहले विपक्षी नेता नजरबंद:माकपा ने बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शनिवार को मझौलीराज आगमन से पहले पुलिस प्रशासन ने विपक्षी दलों के नेताओं और किसान सभा से जुड़े पदाधिकारियों को नजरबंद कर दिया। पुलिस ने कई नेताओं को रात से ही उनके घरों में हाउस अरेस्ट रखा। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें पुलिस हिरासत से छोड़ा गया।

पुलिस कार्रवाई पर माकपा ने जताई नाराजगी

लार क्षेत्र के चौरिया निवासी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता कामरेड प्रेमचंद यादव को भी पुलिस ने नजरबंद किया था। शनिवार को रिहा होने के बाद उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया। माकपा की देवरिया जिला कमेटी ने विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने की कड़ी निंदा की है।

जनहित के मुद्दे उठाने की थी तैयारी

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि वे मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्र की समस्याओं और किसानों से जुड़े मुद्दे रखना चाहते थे। इनमें प्रतापपुर चीनी मिल पर गन्ना किसानों के करोड़ों रुपये के बकाए का भुगतान प्रमुख मुद्दा था।

जंगली जानवरों से फसल बचाने की मांग

नेताओं का कहना है कि क्षेत्र में जंगली जानवरों के कारण किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते थे।

प्रमाणपत्र और सड़क की समस्या भी उठानी थी

विपक्षी नेताओं के मुताबिक क्षेत्र में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा कई सड़कें खस्ताहाल हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत होती है। इन समस्याओं को भी मुख्यमंत्री के सामने रखने की तैयारी थी।

सीमा पर शराब तस्करी का मुद्दा भी शामिल

नेताओं ने सीमा क्षेत्र में कथित शराब तस्करी का मुद्दा भी उठाने की बात कही। उनका आरोप है कि इन समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने से रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें पहले ही घरों में नजरबंद कर दिया।

माकपा नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से जनसमस्याएं उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्षी नेताओं को नजरबंद करना इस अधिकार का हनन है और ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

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