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मेरठ: देहरादून और यूपी के पेपर लीक केस में दिल्ली पुलिस का बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार, ऐसे करता था गड़बड़झाला

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Amar Ujala के अनुसार7 सितंबर 2026 को 06:31 pm बजे
मेरठ: देहरादून और यूपी के पेपर लीक केस में दिल्ली पुलिस का बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार, ऐसे करता था गड़बड़झाला

सौजन्य से:- Amar Ujala

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मेरठ: देहरादून और यूपी के पेपर लीक केस में दिल्ली पुलिस का बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार, ऐसे करता था गड़बड़झाला

Mon, 07 Sep 2026 11:24 PM IST

Mohd Mustakim

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

Published by: Mohd Mustakim

Updated Mon, 07 Sep 2026 11:24 PM IST

सार

पेपर लीक मामले में पुलिस ने दिल्ली पुलिस के बर्खास्त सिपाही गौतमबुद्धनगर निवासी प्रशांत कुमार सिंह उर्फ मोनू को गिरफ्तार कर लिया। उत्तराखंड में पेपर लीक के एक मामले में सीबीआई को जांच सौंपी गई थी।

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विस्तार

देहरादून और उत्तर प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस और स्वाट टीम के हाथ सोमवार को बड़ी कामयाबी लगी है। टीम ने दिल्ली पुलिस के बर्खास्त सिपाही गौतमबुद्धनगर जनपद के खटाना गांव निवासी प्रशांत कुमार सिंह उर्फ मोनू को मुंबई से दिल्ली के निजामुद्दीन आने पर गिरफ्तार कर लिया गया।

देहरादून में हुए पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इसके बावजूद आरोपी अब तक टीमों को चकमा दे रहा था। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

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देहरादून में हुए पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इसके बावजूद आरोपी अब तक टीमों को चकमा दे रहा था। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

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एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि 28 जून वर्ष 2023 में सिविल लाइन थाने में एसटीएफ के निरीक्षक सुनील कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि 26 और 27 जून को प्रदेश के विभिन्न जिलों में ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने के लिए सॉल्वर बैठाकर और पेपर लीक कराकर बड़ी रकम वसूली गई। इस मामले में एसटीएफ ने गाजियाबाद के मुरादनगर के अलावा शहर के सदर बाजार और सिविल लाइन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

एसटीएफ ने उस दौरान आरोपी उधम सिंह, उसके भाई संदीप और मनोज को गिरफ्तार किया था। बाद में पुलिस ने अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की थी। आरोपी अपने परिवार के साथ मुंबई घूमने गया था और ट्रेन से वापस दिल्ली लौट रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

सिविल लाइन थाना प्रभारी अरुण भाटी और जांच अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में बताया है कि वह वर्ष 2024 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गया था। जब आरोपी के खिलाफ मामले दर्ज होने की जानकारी मिली तो उसे बर्खास्त कर दिया गया था। इस मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने 25 अगस्त को बागपत निवासी आरोपी अनुज को भी गिरफ्तार किया था। उसी से पूछताछ के बाद प्रशांत के संबंध में पुलिस को ठोस सुराग मिला।

पहचान छिपाने के लिए बदल लेता था पिता का नाम

एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए प्रशांत अपने निक नेम मोनू का अधिक इस्तेमाल करता था। इसके अलावा आरोपी के पिता का नाम रामअवतार है लेकिन आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए अपने चाचा ओमपाल के नाम से भी पहचान पत्र बनवा लिया था। पेपर लीक केस में शामिल होने के बाद भी आरोपी दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गया था। सीबीआई ने जांच की जानकारी मिलने पर उसे कुछ माह पहले बर्खास्त कर दिया गया था।

एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए प्रशांत अपने निक नेम मोनू का अधिक इस्तेमाल करता था। इसके अलावा आरोपी के पिता का नाम रामअवतार है लेकिन आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए अपने चाचा ओमपाल के नाम से भी पहचान पत्र बनवा लिया था। पेपर लीक केस में शामिल होने के बाद भी आरोपी दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गया था। सीबीआई ने जांच की जानकारी मिलने पर उसे कुछ माह पहले बर्खास्त कर दिया गया था।

मोनू व खालिद समेत 11 आरोपियों पर दर्ज की थी प्राथमिकी

पुलिस ने इस मामले में सिविल लाइन थाने में 11 आरोपियों गांव कपसाड़ निवासी मनोज, मोहम्मदपुर चकबंदी आबाद निवासी संदीप, उधम सिंह, सैनिक विहार के अंकित पूनिया, लुहारी बड़ौत के विवेक, मोहम्मद खालिद, पूठ रोहटा के विकास गिरी, अलीगढ़ के राकेश, नीशू सिंह, मोनू और योगेश पर प्राथमिकी दर्ज की थी।

पुलिस ने इस मामले में सिविल लाइन थाने में 11 आरोपियों गांव कपसाड़ निवासी मनोज, मोहम्मदपुर चकबंदी आबाद निवासी संदीप, उधम सिंह, सैनिक विहार के अंकित पूनिया, लुहारी बड़ौत के विवेक, मोहम्मद खालिद, पूठ रोहटा के विकास गिरी, अलीगढ़ के राकेश, नीशू सिंह, मोनू और योगेश पर प्राथमिकी दर्ज की थी।

सीबीआई ने खालिद, उसकी बहन व असिस्टेंट प्रोफेसर को किया था गिरफ्तार

21 सितंबर 2025 को उत्तराखंड में यूके एसएसएससी की स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने मोहम्मद खालिद, उसकी कथित बहन साबिया और असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन (निलंबित) को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने इस मामले में कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया था।

21 सितंबर 2025 को उत्तराखंड में यूके एसएसएससी की स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने मोहम्मद खालिद, उसकी कथित बहन साबिया और असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन (निलंबित) को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने इस मामले में कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया था।

खुद परीक्षा में बैठता था खालिद, प्रशांत की मदद से ऐसे करता था पेपर लीक

खालिद और मोनू खुद अभ्यर्थी बनकर परीक्षा में बैठते थे। हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में अभ्यर्थी बनकर खालिद ने ही वॉशरूम में जाकर पेपर के तीन फोटो खींचकर लीक किए थे। आरोपी प्रशांत उर्फ मोनू ने आउट किए थे। मोनू ने प्रोफेसर आदि से संपर्क कर पेपर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे। मोनू के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के पांच और उत्तराखंड में एक प्राथमिकी दर्ज है। सीबीआई की जांच में खालिद के नौ प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करने की बात सामने आई थी।

खालिद और मोनू खुद अभ्यर्थी बनकर परीक्षा में बैठते थे। हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में अभ्यर्थी बनकर खालिद ने ही वॉशरूम में जाकर पेपर के तीन फोटो खींचकर लीक किए थे। आरोपी प्रशांत उर्फ मोनू ने आउट किए थे। मोनू ने प्रोफेसर आदि से संपर्क कर पेपर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे। मोनू के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के पांच और उत्तराखंड में एक प्राथमिकी दर्ज है। सीबीआई की जांच में खालिद के नौ प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करने की बात सामने आई थी।

गांव में पहुंची थी सीबीआई, नेताओं ने की सिफारिश

गौतमबुद्धनगर के खटाना गांव से जानकारी मिली है कि आरोपी प्रशांत उर्फ मोनू की तलाश में पिछले माह सीबीआई की टीम गांव पहुंची थी। आरोपी ने गांव में सिपाही के पद से बर्खास्त किए जाने की जानकारी नहीं दी थी। कुछ ग्रामीणों और एक नेता ने भी आरोपी की सिफारिश के लिए पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस ने आरोपी पर कार्रवाई की।

गौतमबुद्धनगर के खटाना गांव से जानकारी मिली है कि आरोपी प्रशांत उर्फ मोनू की तलाश में पिछले माह सीबीआई की टीम गांव पहुंची थी। आरोपी ने गांव में सिपाही के पद से बर्खास्त किए जाने की जानकारी नहीं दी थी। कुछ ग्रामीणों और एक नेता ने भी आरोपी की सिफारिश के लिए पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस ने आरोपी पर कार्रवाई की।

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