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लखनऊ में बाढ़ के बीच घरों में तड़प रहे बुजुर्ग: लोग रोते हुए बोले- पीने को पानी, निकलने को नाव नहीं ; अपने तोड़ रहे दम - Lucknow News

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Dainik Bhaskar के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
लखनऊ में बाढ़ के बीच घरों में तड़प रहे बुजुर्ग:  लोग रोते हुए बोले- पीने को पानी, निकलने को नाव नहीं ; अपने तोड़ रहे दम - Lucknow News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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ग्राउंड रिपोर्टलखनऊ में बाढ़ के बीच घरों में तड़प रहे बुजुर्ग:लोग रोते हुए बोले- पीने को पानी, निकलने को नाव नहीं ; अपने तोड़ रहे दम

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लखनऊ के फैजुल्लागंज में इन दिनों बाढ़ है। हर तरफ पानी ही पानी भरा है, लेकिन पीने वाला पानी मौजूद नहीं है। कई घरों में बीमार बुजुर्ग तड़प रहे हैं। बुखार है, पर खत्म हुई दवा दोबारा नहीं मिल रही है। घर का कोई लड़का दवा लेने जाता है तो हर तरफ बाढ़ की वजह से 6-6 घंटे लौटने में लग जाते हैं।

10 दिन से चल रहे बाढ़ के हालातों के बीच अब तक बीमारी से ज्ञात 3 मौतें हो चुकी हैं। पहली मौत- 2 अक्टूबर को कैलाश बिहार में मीना कन्नौजिया निधन हो गया। दूसरी मौत- लोहरामऊ में 3 अक्टूबर को डेढ़ साल की बीमार शिफा की मौत हो गई। तीसरी मौत- अन्नपूर्णानगर में बुखार से पीड़ित 72 वर्षीय बंशीलाल ने 5 अक्टूबर को दम तोड़ दिया।

दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने बाढ़ के हालातों को ग्राउंड से जानना चाहा। 7 अक्टूबर को एक नाव से हम बाढ़ के हालात देख रहे थे, तभी कहीं दूर से मदद की आवाज आई- “ओ नाव वाले भैया... इधर आ जाओ, ओ भैया आ जाओ।” इतना सुनना था कि रिपोर्टर ने नाववाले को रुकवाया। एक युवक कमर तक पानी में चला आ रहा था। उसके हाथ में एक बोरी थी, जिसमें कुछ जरूरी सामान के साथ मां की दवा थी।

लखनऊ की बाढ़ की 2 तस्वीरें देखिए-

नाव नहीं मिली, तो 5 घंटे से घर नहीं पहुंच पाया

युवक का नाम आकाश। वह जिस नाव को आवाज लगा रहा था, उसमें पहले से 7 लोग सवार थे। नाव जर्जर थी। मल्लाह बार-बार नाव में भर रहे पानी को बाहर निकालता और आगे बढ़ता। कुछ देर में नाव आवाज लगाने वाले युवक के पास पहुंची।

बात करने पर पता चला कि युवक आकाश करीब 3 किलोमीटर दूर से कमर तक भरे पानी में चलकर यहां पहुंचा था। आकाश ने बताया कि उसकी मां बीमार है। वह करीब 5 घंटे पहले दवा लेने के लिए घर से निकला था, लेकिन नाव नहीं मिलने के कारण घर वापस नहीं पहुंच पा रहा था।

आकाश के चेहरे पर मां की बीमारी की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। मल्लाह ने उसी जर्जर नाव में उसे भी बैठा लिया और घर तक पहुंचाया। वहां पहुंचकर मां को देखते ही आकाश के चेहरे पर राहत नजर आई। मां बुखार में तप रही थीं।

अब बाढ़ की कुछ दूसरी तस्वीरें-

रोते हुए मां बोलीं- पानी नहीं मिल रहा, हम जिंदा कैसे रहेंगे

प्रभात देवी की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। भर्राई आवाज में उन्होंने बताया, दोपहर के 3 बजने वाले हैं, लेकिन अभी तक न एक दाना खाया है और न ही एक घूंट पानी पिया है। एक बेटा मेरे साथ है। दूसरा बेटा अपने बीमार बच्चों को लेकर दोस्त के घर छोड़ने गया है।”

उन्होंने बताया, हम करीब 3 घंटे तक नाव का इंतजार करते रहे। जब कोई नाव नहीं आई तो बेटा बच्चों को लेकर चला गया। नीचे घर में पानी भरा है। सुबह से छत पर धूप में बैठे हैं। पीने के लिए एक घूंट पानी तक नहीं मिल रहा। समझ नहीं आ रहा कि हम कैसे जिंदा रहेंगे।”

प्रभात देवी ने बताया कि रात में उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई थी। सुबह होते ही बेटा करीब 10 नाव वालों को रोककर मदद मांगता रहा, लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद वह सीने तक पानी में करीब 4 किलोमीटर पैदल गया और दवा लेकर लौटा। दवा लाने और वापस आने में करीब 6 घंटे लग गए।

उन्होंने कहा, हम खुद को बेसहारा महसूस कर रहे हैं। जिंदगी में इतनी पीड़ा कभी नहीं उठाई।

‘इलाज न मिलने से हुई मौत’

दाउदनगर निवासी उत्कर्ष मिश्रा ने बताया कि इलाके में सीने तक पानी भरा है। नगर निगम या प्रशासन का कोई अधिकारी हालात देखने नहीं आ रहा है। स्थिति बेहद खराब है।

उन्होंने बताया कि मोहल्ले की एक बुजुर्ग महिला को कई दिनों से बुखार था। जलभराव के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका और उनकी मौत हो गई। पहली बार ऐसा हुआ है कि पानी के बीच से अंतिम यात्रा निकालनी पड़ी।

उत्कर्ष ने कहा कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं और अपनापन दिखाते हैं, लेकिन आज मुश्किल की घड़ी में कोई सहारा देने नहीं आ रहा। उन्होंने बताया कि करीब 10 साल पहले बांध बनाने की योजना पास हुई थी, लेकिन अब तक बांध नहीं बन सका है।

‘20 हजार परिवारों ने किया पलायन’

अलीगंज से आकर फैजुल्लागंज में राहत सामग्री बांटने वाले आशुतोष ने कहा कि यहां के हालात देखकर रोना आता है। उन्होंने बताया कि लगभग 20 हजार परिवार पलायन करने पर , घर छोड़ने पर मजबूर है। लगभग 40 हजार घरों में पहले फ्लोर पर रखा हुआ कीमती सामान टीवी, फ्रिज, एसी सबकुछ बर्बाद हो चुका है।

करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है मगर सरकार की तरफ से बेसिक मदद तक नहीं मिल रही। छोटे बच्चों को दूध तक नहीं मिल रहा है पानी में डूबे हुए लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं यहां कितना दुख है क्या-क्या बताया जाए।

'हजारों रुपए का माल हुआ बर्बाद'

ग्राउंड फ्लोर पर पानी के बीच खड़े आदर्श ने बताया कि एक हफ्ते से घर के आसपास पानी भरा है। घर के अंदर ही उनकी दुकान भी है। पानी बढ़ने पर बड़ी मुश्किल से कुछ सामान निकालकर फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर रखा, लेकिन इसके बावजूद 10 हजार रुपए से ज्यादा का सामान खराब हो गया।

उन्होंने बताया कि दुकान में किराए पर रहने वाले लोग भी अपना सामान छोड़कर चले गए हैं। वे कब लौटेंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं है। पिछले 24 घंटे से बिजली भी कटी हुई है। मोबाइल चार्ज नहीं हो पा रहा, जिससे किसी से फोन पर संपर्क करना भी मुश्किल है।

आदर्श ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस मुसीबत के बीच घरों में चोरियां भी शुरू हो गई हैं। हम लोग चारों तरफ से परेशानी में घिरे हैं।

अंत में 2 और तस्वीरें-

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