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Dainik Bhaskar के अनुसार30 अगस्त 2026 को 10:31 am बजे
लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर चलेंगे बुलडोजर:  पीएसी, पुलिस के साथ मौजूद रहेगी नगर निगम की ईटीएफ, अधिकारी अलर्ट - Lucknow News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर चलेंगे बुलडोजर:पीएसी, पुलिस के साथ मौजूद रहेगी नगर निगम की ईटीएफ, अधिकारी अलर्ट

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लखनऊ में जिला अदालत परिसर के आसपास वकीलों के अवैध चैंबर पर आज रविवार को बुलडोजर चलेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने तैयारी पूरी कर ली है। करीब 8 बुलडोजर और हाईवा की मदद से यह कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर पीएसी, कई थानों की पुलिस बल के साथ नगर निगम की ईटीएफ (एन्क्रोचमेंट टास्क फोर्स- प्रवर्तन दल) और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। नगर निगम ने 100 वकीलों को 30 अगस्त तक अवैध चैंबर छोड़ने का नोटिस जारी किया था। इसमें नाले पर बने हुए अवैध चैंबर भी शामिल हैं।

वकीलों के चैंबरों को तोड़े जाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तो होगी। जस्टिस विक्रम नाथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया कि मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए। पीठ ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने से भी इन्कार कर दिया और वकील को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

हाईकोर्ट ने भी नोटिस जारी कर हटाने को कहा था

इस याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के 4 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को निर्देश दिया था कि वह 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करे। इनमें से अधिकतर वकील हैं। यह चैंबर और ढांचे लखनऊ जिला अदालत परिसर के पास सार्वजनिक रास्तों और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर बनाए गए हैं।

17 मई को हुई कार्रवाई का हुआ था विरोध

17 मई को नगर निगम की टीम ने पुलिस और पीएसी बल के साथ में मिलकर अवैध चैंबर पर कार्रवाई की थी। इस दौरान जमकर विरोध हुआ था। एक वकील ने फांसी लगाने की भी कोशिश की थी। पुलिस ने उसे बचाया था। वकीलों ने कार्रवाई के दौरान हंगामा करते हुए पथराव भी कर दिया था। इसपर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था। इसमें सिपाही सहित तीन वकील घायल हो गए थे। सुबह से दोपहर तक कार्रवाई हुई थी।

वकीलों ने एक दिन पहले किया विरोध

वकीलों ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर निगम का विरोध करने की बात कही। उनका कहना है कि नगर निगम प्रशासन पर उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के अध्याय के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि नोटिस के नाम पर चस्पा किया गया फॉर्मेट धारा 554 और 564 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के ‘In Re: Manoj Tibrewal’ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि प्रभावित अधिवक्ताओं को विधिसम्मत नोटिस और अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर दिए बिना चैंबर तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

कार्रवाई हुई तो अवमानना याचिका दाखिल करेंगे

वकीलों ने प्रशासन से 30 अगस्त को प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि आगे की कोई भी कार्रवाई हाईकोर्ट के 4 अगस्त के आदेश, नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करने के बाद ही की जानी चाहिए।

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