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शुक्रवार को जेल, शनिवार को जमानत और रविवार को रिहाई! लखनऊ पुलिस भी हैरान, जब सोशल मीडिया पर देखा आरोपियों का वीडियो

UP News: राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित नदवा कॉलेज के मौलाना इरफान अहमद रिजवी की हत्या की साजिश से जुड़े मामले में एक हैरान कर देने वाला मो…

AajTak के अनुसार24 अगस्त 2026 को 06:55 pm बजे
शुक्रवार को जेल, शनिवार को जमानत और रविवार को रिहाई! लखनऊ पुलिस भी हैरान, जब सोशल मीडिया पर देखा आरोपियों का वीडियो

सौजन्य से:- AajTak

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UP News: राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित नदवा कॉलेज के मौलाना इरफान अहमद रिजवी की हत्या की साजिश से जुड़े मामले में एक हैरान कर देने वाला मोड़ सामने आया है. शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेजे गए तीन मुख्य साजिशकर्ताओं को कोर्ट से महज 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई और रविवार को वे जेल से रिहा भी हो गए. हड़कंप तब मचा जब सोशल मीडिया पर आरोपियों की जेल से रिहाई का वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद ही हजरतगंज पुलिस को मामले की जानकारी हुई.

मामले का खुलासा तब हुआ जब हजरतगंज पुलिस ने चोरी की बाइक और पिस्तौल के साथ दो शूटरों मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद जमील को गिरफ्तार किया. दोनों शूटर बीते एक महीने से मौलाना इरफान अहमद की हत्या के फिराक में घूम रहे थे.

जांच में सामने आया कि मौलाना के करीबी और मदरसे के मैनेजर बिलाल हाशमी ने वकीलों के साथ मिलकर मौलाना की हत्या के बाद दो मदरसों और करोड़ों की प्रॉपर्टी पर कब्जा करने की साजिश रची थी. शूटरों और साजिशकर्ताओं के बीच 157 बार फोन पर बात हुई थी और उनके मोबाइल से मौलाना की तस्वीर भी बरामद हुई थी.

शूटरों की निशानदेही पर 4 की गिरफ्तारी, फिर 24 घंटे में जमानत

शूटरों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने 2 लाख रुपये की सुपारी देने वाले बिचौलिये अमन कुरैशी और साजिश में शामिल वकील सोहेल अहमद सिद्दीकी व फरहान अहमद सिद्दीकी (जो आपस में साले-बहनोई हैं) को गिरफ्तार किया था.

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21 अगस्त (शुक्रवार): ACJM-2 की कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा.

22 अगस्त (शनिवार): CJM के प्रभार पर बैठी ACJM-3 की कोर्ट से तीनों आरोपियों अमन, सोहेल और फरहान को जमानत मिल गई.

23 अगस्त (रविवार): तीनों आरोपी जेल से रिहा हो गए.

बिना पुलिस रिपोर्ट और बिना वेरिफिकेशन के जमानत?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जमानत प्रक्रिया के दौरान कोर्ट ने न तो पुलिस से कोई केस डायरी या रिपोर्ट मांगी, न ही पुलिस को पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया. यहां तक कि जमानत में लगाए गए बेल बॉन्ड का वेरिफिकेशन तक नहीं कराया गया.

मामले में पुलिस प्रक्रिया और अदालती जल्दबाजी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल हजरतगंज पुलिस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही है.

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